विशेष : अन्धो के नगरी में आइना बेचते युवराज - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 19 जनवरी 2014

विशेष : अन्धो के नगरी में आइना बेचते युवराज

rahul at aicc
बदलते वैश्विक परिदृश्य में इंटरनेट की बजह से विश्व एक वैश्विक गाँव बन गया है. ऐसे में भारत जैसे विशाल लोकतंत्र जहां युवाओं की सर्वाधिक सशक्त भागीदारी है, को कोई अब अपनी लच्छेदार बातों से दिग्भ्रमित कर ले इसकी सम्भावना काफी नगण्य दिखती है.भारत जैसे विशाल सांस्कृतिक देश का परिपक्व होता लोकतंत्र भले ही एक सामंतवादी परिवार की कैद में अपना कुंठित बाल्यकाल गुज़ारा हो किन्तु भारत की मिटटी से लथपथ लोकतंत्र अपने मूल धारणा से नहीं भटक सकी, कैद में है बुलबुल रूपी लोकतंत्र का तराना वैभवशाली वैशाली से लेकर आज तक अनवरत दिक् दिगन्त को सुनाती आ रही है. 

1947 से लेकर 2013 तक का एक लम्वा सफ़र अपना देश ने तय किया.इस लम्वे शासन के कालखंड में भारत की स्थिति ;परिस्थिति और उपस्थिति विश्व परिदृश्य में कहाँ हैं यह गंभीर चिंतन इस देश के हर नागरिक को करना ही होगा ? खासकर भारत जैसे शोषित पीड़ित जन समूह 1947 से पूर्व इस्लामी अतिवादियो और अंग्रेजी क्रूरता की दास्ताँ से आज तक मुक्त हो पाई ? 1947 से आजतक के 67 सालों का कालखंड में लगभग 60 साल तक इस देश पर साम्राज्यवादी और राजशाही सोच का प्रतिक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का शासन रहा. वंशवादी परम्परा के कौरव कुल के वाहक यह तथाकथित राजनितिक दल के कौरवों ने सत्ता का रसास्वादन कर आम भारतीय को बद से बदतर जीवन जीने को मजबूर किया जिसके कोख से इस देश में आतंकवाद, नक्सलवाद और सम्प्रदायवाद का जन्म हुआ .

इस देश में कौरव परम्परा के पोषक रूपी कांग्रेस के युवराज ने अभी हाल ही में अपने तल्ख़ मिज़ाज से देश की शीर्षस्थ संवैधानिक प्रधानमंत्री पद की ऐसी की तैसी कर दी और देश का प्रधानमन्त्री अनुशासित नौकरशाह की तरह राजतंत्र के युवराज के आगे नतमस्तक हुआ ? आखिर लोकतंत्र को युवराज की तानाशाही प्रवृति ने राजशाही ठसक से धुल धूसरित करने की कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी ? उसके बाद भी युवराज का कथन है –“कांग्रेस लोकतंत्र को गहराई से लागू करना चाहती है”. किस लोकतंत्र की बात ये कहते है अब जनता भी जानती है . कुछ राज्यों में हुए चुनाव में राज्यों की जनता ने इसी राजशाही सोच को सिरे से खारिज कर दिया. इतना ही नही युवराज ने आगे कहा की –“हमारी पार्टी में फैसला नेता लेते हैं पहले भी इसी तरह फैसले लिए जाते रहे हैं.” फिर इस दल में “आलाकमान” किस चिड़िया का नाम है और गैर नेहरु-गांधी परिवार से हुए लोकप्रिय लाल बहादुर शास्त्री जी से लेकर सीता राम केसरी का क्या हश्र हुआ देश की जनता ये भी जानना चाहती है? नेहरु-गांधी परिवार से त्रस्त इस देश की जनता अब महात्मा गांधी जी का सपना कांग्रेस मुक्त भारत साकार करना चाहती है जिसकी शुरुयात कुछ राज्यों में हो भी चुकी है . नेहरु-गांधी परिवार ने इस देश के संवैधानिक संस्थाओं की जो दुर्गति की है इससे भी देश त्रस्त है .आज देश में सर्वोच्च न्यायालय ; चुनाव आयोग और महालेखा नियंत्रक जैसे अनिर्वाचित गैर संसदीय संस्थाएं नहीं होती तो भारत का लोकतंत्र सरे आम मुगलों की तरह मीना बाज़ार लगाकर ये दल नीलाम करा रही होती इसमें तनिक संदेह नहीं है.आज भी इस देश का लोकतंत्र 10 जनपथ ;24 अकबर रोड या लुटियन के शाही गलियारे में मारी-मारी फिर रही है ? वंशानुगत राजनीति के पोषको ने इस देश को जाति;अपराध;भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर संवैधानिक संस्थाओं का क्षरण किया जिसके परिणाम स्वरुप आज आम नागरिक बुनियादी सुविधाओ से भी महरूम है?हर साल इस देश में 50 लाख से अधिक लोग सिर्फ हृदयजनित रोग से अकाल मौत को प्राप्त करते है, देश की आवादी का  लगभग 4 फीसदी यानी 5 करोड़ आवादी मधुमेह जैसे वीमारी से ग्रस्त है; 67 सालों के बाद भी भारत के सरकारी अस्पतालों में यमराज का दर्शन सुलभ है किन्तु सरकारी चिकित्सक का दर्शन दुर्लभ है .प्राकृतिक संसाधनों से पूरित एवं जीवनदायी नदियो के होते हुए भी देश की एक बड़ी आवादी आज भी स्वच्छ ज़ल पीने को तरस रहा है. क्या  नेहरु-गांधी परिवार का यह दल और उसके युवराज इसी स्वस्थ भारत की कल्पना को साकार करना चाहते है ?

देश की माली हालात नित्य प्रति खास्ताहाल होता जा रहा है, लाख चेतावनियो के बाद भी इस देश का राजकोषीय घाटा दिन दुनी रात चौगनी बढ़ रही है .जबकि इस वंशवादी दल के कुनवे में विदेशो में डिग्री हासिल किये महान अर्थशास्त्री कुनवो का ज़मात है फिर भी देश का विकास दर 4 से 5 फीसदी के आसपास बिलखती नज़र आती क्यों है . देश का ऑधौगिक उत्पादन बढ़ने के बजाय 1.8 फीसदी घट गयी .सिचाई के आभाव में देश की कृषि व्यवस्था चौपट हो रही है .पशुधन एवं गौवंश इस दल के शाशन काल में कृषि व् दुग्ध क्षेत्र के बजाय कत्लगाहो में भेजे जा रहे हैं .कृषि के प्रति सरकार की उपेक्षा से तंग आकर कृषि प्रधान देश के कृषक प्रतिवर्ष लाखो की संख्या में आत्महत्या कर रहे है और इस दल के संवेदनहीन कृषि मंत्री शरद पवार कहते है की –“इस वर्ष किसानो की आत्महत्या में 50 फीसदी की कमी आई”. डुव मरनी चाहिए ऐसे सरकार और उसके सिपहसलार को जो भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जीवित सत्तासीन है .महगाई आसमान छू रही है डीज़ल और पेट्रोल की कीमत सुरसा की भाँती मुंह फैलाती जा रही है ,आउटलुक (हिंदी मासिक जनवरी २०१४ अंक) के एक रपोर्ट के अनुसार_ “सरकार पेट्रोल और डीज़ल पर एक उपकर लेती है इस मद में अब तक सरकार के पास १,१८,५०० करोड़ जामा हो चुके हैं.अभी तक इसका बमुश्किल 1 % (लगभग 10000 करोड़) राशि खर्च हुआ.बाकी आपकी हमारी जेव से जुटाए गए 1,०८,५०० करोड़ रूपये पर सरकार कुंडली मारकर बैठी है .एक अध्ययन के मुताविक भारत के पास २३३ अरब बैरल कच्चा तेल भण्डार है यह सऊदी अरब के तेल भण्डार के बराबर है”.इसके बावजूद कारपोरेट समूहों के दवाव में पूंजीपतियो के हित को साधने हेतु पेट्रोल और डीज़ल का मूल्य वृद्धि कर महगाई बढ़ने का अक्षम्य अपराध करती रही है .

आल इंडिया कांग्रेस कमिटी के सलाना जलसा के अपने तकरीर में युवराज की आवाज़ को आजकल मिडिया में पुरे जोरशोर से उछाला गया. भाट चारण परम्परा के मिडिया वाहको को तो मानो पर निकल गये ; कल तक जो देश के किसी भी समसामयिक मुद्दे पर अपने मुख को कष्ट नहीं देते वो इस जलसे में अहम तकरीर पेश किया;तकरीर देश के तक़दीर को बदलने के लिए नही बल्कि अपनी रियासत को बचाने के लिए दी गयी थी और वह घिसा पिटा तकरीर २१ वी सदी के युवाओ के लिए प्रेरणा नही युवाओं के मूंह पर जोरदार थप्पड़ था जिसका जवाव इस देश के युवा २०१४ के चुनाव में सूद सहित युवराज को लौटा देंगे इसकी गारंटी है ? 

उस जलसे में युवराज ने कहा की कांग्रेस् शासित राज्य में 50 फीसदी मुख्यमंत्री महिला होंगी.अब सुनने में बड़ा मनमोहक लगा की महिलाओं के लिए युवराज की कितनी चिंता है किन्तु ध्यान दें मुख्यमंत्री कैसी हो?राजस्थान के मुख्यमंत्री श्रीमती बसुन्धरा राजे सिंधिया जैसी या दिल्ली की पूर्व मुख्यमत्री श्री मति शीला दीक्षित जैसी? .भारत की शासन व्यवस्था को नियंत्रित करने वाली गैर संवैधानिक पद पर रहकर श्रीमती सोनिया गांधी और तत्कालीन दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के होते हुए विश्व में दिल्ली की छवि बलात्कारिओ की राजधानी के रूप में कुख्यात हुई .देश की जनता को अभी भी वो दृश्य याद होगी किस तरह से दिल्ली;निर्भय काण्ड के बाद उबली और युवराज ना जाने किस लोक में मुंह छुपाए थे ? समानता को लागू करने के बजाय ये दल देश में हमेशा विलगाव पैदा किया.समाज के दोनों अंग स्त्री –पुरुष को अलग अलग चश्मों से देखा और महिलाओं के लिए अलग बैंक अलग सार्वजनिक वाहन जैसे भेद्कारी विध्वंसक व्यवस्था को लाकर समाज को रसातल में ले जाने का घृणित प्रयास किया है.शासन के ६७ सालों के बाद भी स्त्री पुरुष की समानता को ये दल कायम रखने में असफल रही, अपने जन्मकाल से ही वोट के चश्मे से इस दल ने देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को तरजीह दिया ? ऐसे विघटनकारी वंशवादी दल से अब देश की एकता;सुरक्षा ;भाईचारा;सहिष्णुता;प्रेम और प्रगति आदि की सुरक्षा की आशा करना रेत से तेल निकालने के सामान है .

भारत अब २१ वी सदी की अंगडाई ले रही है ,अपने भरपूर तरुनाई को ऐसे वंशवादी कौरवो के हाथो इस देश का बागडोर सौपेंगी इसकी दूर दूर तक संभावना नहीं दिखती है.भारत के संस्कार और संस्कृति को सदेव दूषित कर सत्ता सुख का आनंद भोगने बाले इस भोग्बादी दल से लोकसभा २०१४  चुनाव के साथ ही महात्मा गांधी के सपनो को इस देश का युवा पूरा करेगा इसकी ज्यादा सार्थकता और समय की मांग भी है क्योंकि भारत की आँखे अब खुल चुकी है और युवराज का पूरा तेवर और कलेवर रूपी आइना तो अन्धो की बस्ती के लिए है और वह बस्ती कांग्रेसीओ का कुनवा है. वंशवादी परम्परा के अंतिम युवराज का पूरा हक है वो अन्धो की नगरी में पूरा मार्केटिग और पैकेजिग के साथ अपने आईने को बेचे .




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(संजय कुमार आज़ाद )
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