बिहार में लालू प्रसाद की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 22 में से 13 विधायकों के पार्टी छोड़ने और उन्हें बिहार विधानसभा में पृथक समूह के तौर मान्यता दिए जाने के बीच बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में राजद ने अपनी पार्टी में टूट की बात से इंकार करते हुए उनमें से छह विधायकों ने सोमवार को देर शाम पार्टी छोड़ने से इंकार कर दिया।
बिहार विधानसभा से सोमवार को जारी एक आदेश में राजद के 13 विधायकों राघवेंद्र प्रताप सिंह, सम्राट चौधरी, राम लषण राम रमन, जावेद इकबाल अंसारी, अनिरूद्ध कुमार, दुर्गा प्रसाद सिंह, अख्तरउल इमान, फैयाज अहमद, जितेन्द्र कुमार राय, अब्दुल गफ्फूर, चंद्रशेखर, ललित कुमार यादव और अख्तर उल इस्लाम शाहिन को राजद का पूर्व सदस्य बताते हुए कहा गया है कि उनके अनुरोध पर सदन के अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने अंतरिम व्यवस्था के तहत पृथक समूह के रूप में मान्यता प्रदान कर दी है।
राजद के प्रदेश कार्यालय में सोमवार को देर शाम इन 13 विधायकों में से छह अख्तर उल इस्लाम शाहिन, अब्दुल गफ्फूर, ललित कुमार यादव, अब्दुल गफ्फूर, चंद्रशेखर, दुर्गा प्रसाद सिंह और फैयाज अहमद को मीडिया के समक्ष पेश करते हुए बिहार विधानसभा में राजद विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने बिहार विधानसभा द्वारा जारी विवरण के बारे में बताया कि उन्होंने बताया कि इन विधायकों तक मीडिया के जरिए इस आशय का समाचार पहुंचा तब वे आर्श्यचकित होकर उनके आवास पर आए और इन सभों ने कहा कि हम लोगों सपने में भी कभी दलबदल करने का सोचा नहीं और पृथक समूह के रूप में मान्यता प्रदान करने के लिए किसी पत्र पर हस्ताक्षर करने की बात तो दूर है।
विधानसभा में राजद विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि इन सभी छह विधायकों का कहना है कि जिसने भी यह सूची विधानसभा अध्यक्ष को दी है उसने धोखा किया है और पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए जदयू और वर्तमान सरकार की सांठगांठ से यह कार्रवाई की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार वर्तमान में अल्पमत में है। इसलिए वे इस तरह की साजिश करके, ऐसी चर्चा करके जनता को दिग्भ्रमित करना चाहते हैं।
यह पूछे जाने पर कि यह कैसे संभव है कि बिना इन विधायकों के हस्ताक्षर के उन्हें सदन में पृथक समूह के तौर पर मान्यता दे दी गयी सिद्दीकी ने कहा कि यदि किसी विधायक ने इन 13 विधायकों की सूची अध्यक्ष को दी तो उन्हें नियम के हिसाब से चाहिए था कि सभी जिनका पत्र पर हस्ताक्षर था उसको बुलाते और उनसे उनका हस्ताक्षर सत्यापित करवाते मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया।
यह पूछे जाने पर कि बिहार विधान सभा द्वारा राजद के इन 13 विधायकों को पृथक समूह के तौर पर अब मान्यता दे दिए जाने पर राजद आगे क्या कदम उठाएगा, सिद्दीकी ने कहा कि दल-बदल अधिनियम के तहत किसी के लिए दो तिहाई सदस्यों की संख्या चाहिए। बिहार विधानसभा में राजद के 22 विधायक हैं और पार्टी में टूट के लिए 15 विधायकों की संख्या चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने जिन 13 विधायकों को पृथक समूह के तौर पर मान्यता दी है उसके खिलाफ हम संघर्ष करें और हर दरवाजे को खटखटाएंगे। सिद्दीकी ने कहा कि उनकी बात बिहार विधानसभा अध्यक्ष से हुई है और उन्होंने कहा है कि जिन लोगों का हस्ताक्षर नहीं है और जो लोग इंकार कर रहे हैं उनके द्वारा लिखित तौर पर दिए जाने पर उन्हें पृथक समूह की सूची से वे हटा देंगे।
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