सुप्रीम कोर्ट यदि दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने के आदेश को रद्द कर विधानसभा भंग करने के पूर्व केजरीवाल सरकार के आदेश को सही मानता है तो निर्वाचन आयोग लोकसभा चुनावों के साथ ही विधानसभा चुनाव करवा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को चुनौती देने वाली आम आदमी की याचिका पर केंद्र से जवाब तलब किया है। जस्टिस आरएम लोढ़ा और दीपक मिश्रा की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते 10 दिन में जवाब मांगा है। इस जवाब के मिलने तक अगर लोकसभा चुनावों का ऐलान हो चुका हो तब भी आखिरी चरण में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं।
सूत्रों ने कहा कि चुनाव करवाने के लिए जरूरी है राज्य की विधानसभा भंग हो गई हो। इसके बिना आयोग अपना काम आगे नहीं बढ़ा सकता। चुनाव की घोषणा के बाद प्रचार के लिए सामान्यतया 30 दिन का समय मिलना चाहिए। यदि दिल्ली में लोकसभा चुनाव की घोषणा अंतिम चरण में की जाए तो भी दिल्ली को यह समय हासिल हो सकता है।
निर्वाचन आयोग जल्द ही लोकसभा चुनावों की घोषणा करने वाला है। यह घोषणा शुक्रवार से लेकर सोमवार के बीच हो सकती है। चुनाव छह चरणों में होंगे और इसका अखिरी चरण मई के पहले हफ्ते या अप्रैल के अंत में होगा। आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा है कि हमें लोकसभा चुनावों के साथ विधानसभा चुनाव करवाने में कोई दिक्कत नहीं है। आयोग को एक साथ चुनाव के लिए सिर्फ यही करना होगा कि हर बूथ पर एक ही जगह दो ईवीएम लगानी होगी।

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