बिहार : कई समस्याओं से जूझ रहे हैं महादलित मुसहर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

बिहार : कई समस्याओं से जूझ रहे हैं महादलित मुसहर

bihar maha dalit
भोजपुर। प्लीज मुखिया जी महादलित मुसहर समुदाय की सुधि लें। 10 साल पहले अगलगी से पवना मुसहरी टोला के 74 लोगों की जमीनी कागजात जलकर स्वाहा हो गयी। इन दिनों अंगीआव प्रखंड में पैक्स के सहयोग लेकर गैर सरकारी संस्था प्रगति ग्रामीण विकास समिति के द्वारा भूमि अधिकार और स्वास्थ्य को लेकर कार्य किया जाता है। पवना ग्राम पंचायत के मुखिया उमेश सिंह हैं। प्रगति ग्रामीण विकास समिति के कार्यकर्ता इन्दु देवी और विनोद कुमार कार्यरत हैं। दोनों मिलकर सीओ को आवेदन देकर वासगीत पर्चा निर्गत करने का आग्रह किया है।

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बाबू साहब की छत्रछाया में पवना मुसहरी का विकास और कल्याण हो रहा है। 4 बीघा जमीन में मुसहरी फैला है। कच्चे-पक्के-झोपड़ी के 75 घर है। जनसंख्या करीब 300 सौ बताया जाता है। मात्र 3 बच्चे मैट्रिक उत्र्तीण हैं। प्रमोद राम, विमलेश राम और सुरजीत राम हैं। बताते चले कि भोजपुर  जिले में मुसहर समुदाय को ‘मांझी’ के बदले ‘राम’ टाईटस लगाया जाता है। केवल 5 भाग्यशाली हैं,जिनको राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्मार्ट कार्ड बना है। मगर स्मार्ट कार्ड का उपयोग नहीं किये हैं। बगल में स्थित प्राथमिक विघालय में 25 बच्चे पढ़ने जाते हैं। व्यवस्थित ढंग से आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित नहीं है। महाराज राम ने जानकारी दी है कि उनके 12 साल के बेटे शारदा कुमार को मिर्गी बीमारी हो गयी है। वहीं तपेश्वर राम की 10 साल की बेटी हीराझरी कुमारी को भी मिर्गी बीमारी हो गयी है। महादलितों ने बताया कि किसी की मौत हो जाने के बाद अग्नि अथवा मिट्टी के हवाले कर दिया जाता है। रामाशीष राम ने कहा कि इन्दिरा गांधी सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि नियमित नहीं मिलती है। अभी 1 साल से अनियिमित है।
   

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झोपड़ी में बैठी यमुनी देवी कहती हैं कि इन्दिरा आवास योजना के तहत मकान नहीं बन रहा है। जिसका मकान बना है। उन्हें 20 हजार रू. मिले हैं। कुछ सिमेंट भी मिला था। घर के पैसा भी लगाया गया। इसके बावजूद भी अधूरा मकान ही बना है। अभी कुछ लोगों को 70 हजार रू. मिला है। यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित है। इसके आलोक में 75 हजार रू. मिलना चाहिए। केवल एक चापाकल है। इसी से मुसहरी का का तमाम कार्य निपटारा किया जाता है। यहां के लोग खेत में मजदूरी करते हैं। अभी गेहूं कटनी में 12 बोझा तैयार करने पर एक बोझा मजदूरी में दिया जाता है। इसी गेहूं को जन्नत करके दाल और रोटी खाया जाता है।




                    
आलोक कुमार
बिहार 

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