आलेख : कहां जा रहा है स्वास्थ्य सुविधाअ¨ं के नाम पर मिलने वाला पैसा ? - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

आलेख : कहां जा रहा है स्वास्थ्य सुविधाअ¨ं के नाम पर मिलने वाला पैसा ?

जम्मू एवं कष्मीर का सरहदी जि़ला पुंछ हमेषा किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहता है। हिंदुस्तान और पकिस्तान के बंटवारे को लेकर जि़ला पुंछ की बात अक्सर होती रहती है। बंटवारे को आज भले ही 66 साल से ज़्यादा का लंबा अर्सा गुज़र चुका हो लेकिन सरहद पर बसे लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। राज्य की करीब अस्सी प्रतिषत आबादी गांव में निवास करती है। जहां केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा करोड़ो रूप्ये नहीं बल्कि अरबों रूपये खर्च करने का दावा किया जाता है और प्रत्येक वर्श इसके बजट में  वृद्धि भी की जाती है। पिछले महीने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री गुलाम नबी आजाद के एक बयान के अनुसार केंद्र ने जम्मु कश्मीर क¨ मिलने वाले स्वास्थ्य बजट क¨ दुगना कर दिया है। परंतु यह सारे पैसे जाते कहां हैं, किन विकास योजनाओं में खर्च हो जाते हैं, समझ में नहीं आता। करोड़ो रूपयेे खर्च होने के बावजूद भी जम्मू प्रांत के दूर दराज़ इलाकों में आज भी चिकित्सा सुविधाओं की हालत बदतर ही है। अ©र यह हालत तब है जब जम्मु कश्मीर क¨ राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन द्वारा 18 विशेष फ¨कस वाले राज्य¨ं में शामिल किया गया है। वैसे तो राज्य को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में सम्मान भी दिया जा चुका लेकिन ज़मीनी हकीकत को देखकर ऐसा लगता है कि यह सिर्फ कागज़ी कार्रवाई तक ही सीमित है। हमारी सरकार की ओर से चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नई-नई नीतियां बनायी जा रही हैं लेकिन देष के ग्रामीण ओर सरहदी इलाकों में सरकार की कोई भी नीति कारगर साबित नहीं हो पायी है। दूर दराज़ के इलाकों में रह रहे लोगों को आज भी लंबा सफर तय करके इलाज के लिए मजबूरन षहरी क्षेत्रों का रूख करना पड़ता है। 
         
पुंछ हेडक्र्वाटर से तकरीबन दस किलोमीटर की दूरी पर खनेतर गांव स्थित है। इस गांव की आबादी तकरीबन 15 हज़ार है और इस गांव को 26 मार्च 2012 को माॅडल विलेज का दर्जा दिया गया था। बावजूद इसके इस गांव में चिकित्सा सुविधाओं की हालत षर्मसार कर देने वाली है। कई राजनेताओं ने इस गांव का दौरा किया था जिसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  अली मोहम्मद सागर, खेल एवं युवा मंत्री ताज मोहिउद्दीन और लोक निर्माण मंत्री अब्दुल मजीद वानी षामिल हैं। गौरतलब है कि राजनेताओं के यह दौरे और भी ज़ोर पकड़ेंगे क्योंकि भविश्य का वक्त विधानसभा चुनाव का है। हर एक राजनेता ने इस गांव को अपने फंड से नवाज़ा है लेकिन सबसे ज़्यादा दरियादिली ताज मोहिउद्दीन ने की है जिन्होंने खनेतर के लिए तकरीबन 21 या 22करोड़ रूपये का एलान किया था लेकिन यह सिर्फ एक एलान बनकर ही रह गया। इस गांव में तीन पंचायतें हैं और हर एक पंचायत में तकरीबन दस वार्ड है। तहसील हवेली के उम्मीदवार की जीत व हार का दारोमदार काफी हद तक इसी गांव पर निर्भर करता है।  हवेली क्षेत्र के विधायक ने स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत को बेहतर बनाने के लिए इस गांव को एक एम्बुलेंस दी थी। लेकिन इतनी बड़ी आबादी के लिए एक एम्बुलेंस नाकाफी है। यह गांव स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी का षिकार है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल यह है कि इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद भी इस गांव में अभी तक कोई प्राईमरी हेल्थ सेंटर यानी पीएचसी कायम नहीं किया गया है।
          
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पुंछ के सबसे बड़े अस्पताल का उद्घाटन किया था तो उन्होंने षिक्षा से पहले स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की बात कही थी। लेकिन खनेतर गांव में चिकित्सा सुविधाओं की हालत को देखकर उनके इस दावे की हवा निकलती हुई नज़र आती है। यहां के लोगों को इलाज के लिए पुंछ अस्पताल जाना पड़ता है। गांव की एंबुलेंस के ड्राइवर के मुताबिक मार्च के आखिर के पन्द्रह दिनों में 7 मरीज़ों को पुंछ अस्पताल लेकर गया जिनमें गर्भवती महिलाएं भी षमिल थीं, जिनका इलाज पुंछ अस्पताल में हुआ। खनेतर सब सेंटर दिलेरा की आषा के मुताबिक मार्च के पहले दस दिनों में तीन गर्भवती महिलाओं को पुंछ अस्पताल पहुंचाया, जहां इनका इलाज हुआ। इसी तरह दूसरे सब सेंटर में मौजूद आषा ने भी अपनी जि़म्मेदारी निभाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। खनेतर मे चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था न होने की वजह से यहां से मरीज़ को पुंछ अस्पताल के लिए रैफर करना पड़ता है। अगर मरीज़ की हालत गंभीर होती है तो उसकी जान जाने का खतरा भी बना रहता है। 15 हज़ार की आबादी वाले इस गांव को एक लंबे अर्से से इस बात इंतेज़ार है कि कभी तो राजनेताओं की निगाहें उनके गांव पर पड़ेंगी, कभी तो इस गांव को प्राईमरी हेल्थ सेंटर मिलेगा। यहां की जनता सरकार से अपील करते हुए कहती है कि हमारे गांव को माॅडल विलेज का दर्जा देने के साथ साथ एक प्राईमरी हेल्थ सेंटर भी दे दिया होता तो हमें इलाज के लिए गांव से बाहर न जाना पड़ता। यहां की जनता को एक बात का दर्द हमेषा सताए रहता है कि क्या वह लोकतंत्र का हिस्सा नहीं हैं? अगर हैं तो फिर बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्यों हैं? 




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बशारत हुसैन शाह बुखारी
चरखा फीचर

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