ग्रीष्म ऋतु हेतु पेयजल समीक्षा
जिले के अन्तर्गत नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नगरिको को ग्रीष्म ऋतु में किसी भी प्रकार से पेयजल संकट व्याप्त न हो इस संबंध में कलेक्टर सीहोर श्री कवीन्द्र कियावत द्वारा पेयजल की समीक्षा की गई, बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में लो.स्वा.यां. विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही पेयजल व्यवस्था की जानकारी श्री एम.सी.अहिरवार कार्यपालन यंत्री द्वारा दी गई, उनके साथ जिले में पदस्थ समस्त सहायक यंत्री एवं उपयंत्री बैठक में उपस्थित थे, बैठक में कलेक्टर द्वारा निर्देश दिये गये की जल स्तर से प्रभावित हैण्डपम्पों में आवश्यकता अनुसार तत्काल राईजर पाईप बढाकर चालू किये जाये। तथा आवश्यकता अनुसार जहाँ पर पानी का जलस्तर अत्यधिक नीचे चला गया हो वहां पर सिंगल फेस पम्प डालकर मौके पर पेयजल ग्राम वासियों को उपलब्ध कराया जावे। जिन हैण्डपम्पों में हाइड्रोफेक्चरिंग की आवश्यकता हो वहां पर हाइड्रोफेक्चरिंग का कार्य तत्काल प्रारम्भ किये जाये। स्त्रोत के अभाव में में जो नलजल योजनाएँ बन्द है, उनमें तत्काल स्त्रोत उपलब्ध कराने की कार्यवाही करते हुये नलजल योजनाऐ/मुख्यमंत्री पेयजल योजनाऐं के माध्यम से ग्राम वासियों को पेयजल उपलब्ध कराया जावे। कार्यपालन यंत्री द्वारा अवगत कराया गया कि ग्रीष्म ऋतु में ग्रामीण क्षेत्रों में किसी प्रकार का पेयजल संकट उत्पन्न न हो इस संबंध में विभाग द्वारा कार्य योजना तैयार की गई है। तथा आगामी पेयजल संकट के निराकरण हेतु राईजर पाईप हैण्डपम्प संधारण के लिये स्पेयर पार्टस इत्यादि सामग्री पर्याप्त रूप से उपलब्ध है, तथा जिले में एवं उपखण्ड स्तर पर कन्ट्रोल रूम की स्थापना कर दी गई है। उनके द्वारा आगे बताया गया की पिछले 03 वर्षो में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल परिवहन की आवश्यकता नही हुई है। ओर न ही आगामी ग्रीष्मकाल में पेयजल परिवहन की संभावना है। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चत करने के लिये जिले के मुख्य नगर पालिका अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थें। उनको कलेक्टर श्री कियावत द्वारा निर्देश दिये गये नगरीय क्षेत्र में जितने भी हैण्डपम्प जल स्तर नीचे चले जाने से प्रभावित है। उनको तत्काल राईजर पाईप बढाकर चालू किये जाये तथा जहां हाइड्रोफेक्चरिंग की आवश्यकता हो वहा संबंधित क्षेत्र के सहायक यंत्री लो.स्वा. यां. विभाग से सम्पर्क कर तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करना सुनिश्चित करे। नगरीय क्षेत्र में जहां पर योजना के पेयजल स्त्रोत सुख गये हो वहां तत्काल वेेैकल्पिक स्त्रोत तैयार करना सुनिश्चत करे। मुख्य नगरपालिका अधिकारी नसरूल्लागंज/बुदनी/रेहटी/शाहंगज द्वारा अवगत कराया गया कि नगरीय क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था प्रतिदिन की जा रही हैं तथा ग्रीष्मऋतु में पेयजल परिवहन की आवश्यकता नही होगी। इसी प्रकार आष्टा, इछावर, सीहोर, जावर, कोठरी के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों द्वारा भी अस्वस्थ्त किया गया कि ग्रीष्मकाल में पेयजल संकट उत्पन्न न हो इस संबंध में निकाये द्वारा समुचित तैयारियां सुनिश्चित कर ली गयी हैं एवं ग्रीष्म ऋतु में नगर में पेयजल परिवहन की संभावना न हो ऐसे प्रयास किये जा रहे है।
लू से बचने के लिये छाता या टोपी या सिर पर कपड़ा लपेटकर ही निकलें
अमूमन हर साल अप्रैल के अंतिम सप्ताह से जून तक तापमान 40 डिग्री से. के ऊपर पहुंच जाता है। तेज गर्मी में चलने वाली हवाएं शरीर को झुलसा कर रख देती है। गर्मी में अधिक देर तक बाहर धूप में रहने पर बहुत सारे लोग ’’लू’’ का षिकार हो जाते है। हर साल सैकड़ों लोग ’’लू’’ के कारण मौत का षिकार हो जाते है। गर्मी में थोड़ी सी सावधानी और आहार-विहार पर ध्यान देने से ’’लू’’ तथा संक्रामक रोगों से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस बारे में एडवायजरी जारी की गई है।
लू से कैसे बचें
गर्मी के दिनों में कुछ उपाय करने से ’’लू’’ से आसानी से बच सकते है- तेज धूप में बाहर नही निकलना चाहिए। यदि निकले तो छाता या टोपी लगाकर, सिर पर कपड़ा लपेट कर निकलना चाहिए। एयर कंडीषनर या कूलर की हवा के बाद बाहर आने के पूर्व शरीर के तापमान को बाहरी तापमान के समान हो जाने देना चाहिए।
लू लगने पर रोगी व्यक्ति के हाथ-पांव के तलवों व पंजो पर पानी की पट्टियां रखे या प्याज पीसकर मले। इसके साथ ही कच्चे आम की कैरी को भूनकर बनाए गए पानी या शर्बत, नीबू की षिकंजी पिलाया जाना चाहिए। आमतौर पर गर्मी के मौसम में ’’लू’’ से बचने के लिए हमेषा घर से निकलने के पहले पर्याप्त पानी जरूर पी लेना चाहिए। दिन में एक-दो बार नमक मिला पानी भी पियें।
’’लू’’ लगने पर उपचार
’’लू’’ लगने पर रोगी को निम्न प्राथमिक उपचार देना चाहिए - रोगी व्यक्ति को शीतल जगह में अथवा कमरे में लिटा देना चाहिए। उसके सारे कपड़ों को ढ़ीला कर देना चाहिए व जूते आदि उतार देना चाहिए। रोगी का ज्वर बढ़ रहा हो तो स्पंजिंग करना चाहिए या बर्फ के टुकड़े कर कपड़े में लपेटकर या बर्फ वाली रबर की थैली को सिर गर्दन तथा शरीर पर रखना चाहिए। रोगी के रक्त प्रवाह को ठीक रखने के लिए उसके अंगों को मलना भी चाहिए और उसे ठंड़ा पेय पीने को देना चाहिए। इसके बाद अन्य उपचार डाॅक्टर की देखरेख में किया जाना चाहिए।

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