विशेष आलेख : मदर्स डे की मोहताज नहीं मां की शख्सियत - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 20 मई 2014

विशेष आलेख : मदर्स डे की मोहताज नहीं मां की शख्सियत

मदर्स डे हर साल पूरे संसार में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देष्य समस्त माओं को सम्मान देना और और षिषु के लालन-पालन में उसकी अहम भूमिका को सलाम करना है। मां का स्थान  हर संस्कृति में सबसे उंचा है। मदर्स डे के मौके पर मैं संसार की तमाम माआंे को सलाम करते हुए मां के महत्व को आपसे साझा करना चाहती हंू। मां वह हस्ती है जिसके गर्भ में मैने अपनी जिंदगी के नौ महीने गुज़ारे हैं। भगवान ने मेरी धड़कन को जिस दिल से जोड़े रखा वह मां है। दुनिया में आने से पहले जिसकी आंखों के ज़रिए मैंने इस दुनिया को देखा, मेरे आने का जिसने एक एक पल बेसब्री से इंतेज़ार किया, वह मां है। दुनिया में आने के बाद जिसकी गोद में मैंने जिंदगी की पहली सांस ली, खुलती बंद होती सहमी आंखों ने जिसे सबसे पहले देखा, नरम हाथों ने जिसकी उंगलियों को सबसे पहले छुआ, कानों ने जिसकी आवाज़ को सबसे पहले महसूस किया, अपनी गोद में पाकर जिसकी आंखों से खुषी के मोती झूलने लगे, वही तो है मां, मेरी तुम्हारी और हम सब की मां।
         
मां, जिसकी उंगली थामकर हमने अपनी जिंदगी का पहला कदम बढ़ाया, जिसके हर एक इषारे को हमने सबसे पहले समझा, दुनिया की इस भीड़ में जिस चेहरे को हमने सबसे पहले पहचाना, ढ़ेर सारी षरारतें करने के बावजूद जिसने अपने आंचल में हमें छुपा लिया, मां का वह प्यार भरा आंचल, जिस आंचल ने हमें दुनिया की हर तकलीफ, हर परेषानी से दूर रखा, जिसकी ठंडी छाओं तले हमने अपना बचपन खेलते हुए गुज़ार दिया, वही है मां। मां, जिसकी आवाज़ में आवाज़ मिलाकर हमने अपनी आवाज़ को एक नई पहचान दी, इस पूरे ब्रह्मांड को बनाने वाले के नाम को बखूबी पुकारना जिसने हमें सिखाया, दुनिया की हर छोटी बड़ी, सही व गलत चीज़ों से जिसने हमें परिचित कराया वह मां है, जो हमें अच्छे और बुरे का अंतर समझाती है, सच्चाई और इमानदारी का सबक सिखाती है, जो अपने तमाम बच्चों में किसी तरह का कोई अंतर नहीं करती, जिसकी नज़र में उसकी संतान इस दुनिया की सबसे बेहतरीन संतान है, जो अपनी पूरी जिंदगी अपने बच्चों की सेवा में गुज़ार देती है, लेकिन बदले में हमसे कुछ नहीं मांगती। और तो और भगवान से हर समय अपने बच्चों की सलामती की प्रार्थना करती है, जिंदगी के हर मोड़ पर अपने बच्चों को कामयाब देखना चाहती है, जिसकी दुआएं हमेषा हमारी हिफाज़त करती हैं, जिसकी गोद में सर रखकर इंसान जिंदगी की तमाम परेषानियों को भूल जाता है। वह मां ही है जो कुछ कहे बगैर ही अपने बच्चों के दिल की बात जान जाती है, इसकी मुस्कुराहट के पीछे छुपी हुई परेषानियों को पहचान लेती है, बच्चों की खुषी की खातिर दुनिया से लड़ जाती है और संतान की  एक मुस्कुराहट के लिए अपनी तमाम खुषियां हस्ते -हस्ते कुर्बान कर देती है। अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्रहाम लिंकन के अनुसार जिस भी किसी व्यक्ति के पास एक पुण्यआत्मा मां है वह कभी गरीब नहीं ह¨ सकता।
        
मां ही होती है जो अपनी संतान के सारे बुरे राज़ों को अपने सीने में दफन कर लेती है और अपनी प्रार्थनाअ¨ं की ताकत से उसे बुरे रास्ते पर जाने से रोक लेती है। कहते हैं कि मां के चरण¨ं में स्वर्ग ह¨ता है। कहते हैं कि मां धरती पर ईश्वर का भेजा सबसे अनम¨ल उपहार है।, एक ऐसा उपहार जिसकी कीमत कोई अपनी पूरी जिंदगी में हर वक्त हर क्षण  उसकी खिदमत करके भी नहीं चुका सकता। दौड़ती भागती जिंदगी में घर और बाहर की जि़म्मेदारी के साथ भले ही आज मां के किरदार में कुछ बदलाव आया हो लेकिन आज भी अपने बच्चों के लिए इसकी मोहब्बत और फिर में किसी तरह का कोई बदलाव नज़र नहीं आता है। इसलिए मां के अपने बच्चों के साथ एहसान, खिदमत , मोहब्बत और कुर्बानियों को सिर्फ मदर्स डे के मौके पर ही याद किया जाना ज़रूरी नहीं है बल्कि महीने, साल और पूरी जिंदगी में इसे याद किए जाने की ज़रूरत है। इसका एक पक्ष यह भी है कि मदर्स डे के नाम पर तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने उत्पाद¨ं क¨ बेचने के लिए इस दिन का इस्तेमाल करती हैं। ज¨ कि एक तरह से मां के प्रति बच्चे के प्यार क¨ भुनाने की क¨शिश ह¨ती है। इस तरह से मां अ©र बच्चे के बीच के सबसे नाजुक अ©र मासूम रिश्ते क¨ मुनाफा कमाने का जरिया बना देना निश्चित ही शर्मनाक है। 

हर किसी को इस बात का यकीन अपनी मां को दिलाने की कोषिष करते रहना चाहिए कि तुम्हारे बिना हमारी जिदंगी अधूरी है। जिसके कदमों में खुदा ने डाल दी जन्नत , जिसकी खिदमत से मिलेगी हमें सच्ची राहत बेषक वह और कोई नहीं, कोई भी नहीं, मां ही है, जिसकी कुर्बानियों से मिली है, हमें जिंदगी की इमारत  





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निकहत परवीन
(चरखा फीचर्स)

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