- - कांडों में वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी एवं उनके विरूद्व तत्काल अन्वेषण पूर्ण कर साक्ष्यानुसार अंतिम प्रपत्र न्यायालय में समर्पित नहीं करने के कारण अभियुक्तों द्वारा स्वयं को बचाने के लिए साक्षियों एवं परिवादी को आंतकित करने की बात कही जा रही है
- - अन्वेषण तथा पर्यवेक्षण अधिकारी यहां तक कि वरीय पदाधिकारी पर भी वाह्य दबाव डालने का भी प्रयास किये जाने की सूचना है
कुमार गौरव, सहरसा: पुलिस महानिरीक्षक, दरभंगा प्रक्षेत्र की समीक्षा में पाया गया है कि दरभंगा प्रक्षेत्र के सभी जिलों में लंबित विशेष प्रतिवेदित कांडों का त्वरित निष्पादन विधि-व्यवस्था परिरक्षण तथा अपराध ने नियंत्रण की दृष्टि से आवश्यक है। सहस्त्राधिक विशेष प्रतिवेदित कांडों में अभियुक्तों की गिरफ्तारी का आदेश विशेष प्रतिवेदन संख्या 02 द्वारा निर्गत होने के बावजूद उनके विरूद्व गिरफ्तारी वारंट/कुर्की प्राप्त कर निष्पादित नहीं किया गया है। कांडों में वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी एवं उनके विरूद्व तत्काल अन्वेषण पूर्ण कर साक्ष्यानुसार अंतिम प्रपत्र न्यायालय में समर्पित नहीं करने के कारण अभियुक्तों द्वारा स्वयं को बचाने के लिए साक्षियों एवं परिवादी को आंतकित करने की भी संसूचना अधोहस्ताक्षरी को प्राप्त हो रही है एवं अन्वेषण तथा पर्यवेक्षण अधिकारी यहां तक की वरीय पदाधिकारी पर भी वाह्य दबाव डालने का भी प्रयास करने की सूचना है। उपर्युक्त स्थिति में अधोहस्ताक्षरी द्वारा कांड के पीडि़त पक्ष परिवादी एवं साक्षियों तथा अभियोजन के हित में प्राप्त साक्ष्यों के आलोक में अभियुक्तों के विरूद्व गिरफ्तारी/कुर्की वारंट प्राप्त कर निष्पादित करने का आदेश संबंधित पुलिस अधीक्षक के माध्यम से थानाध्यक्ष/अनुसंधानकत्र्ताओं को दिया जा रहा है। इस आदेश का सम्यक् अनुपालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधीक्षक को सौंपी गयी है एवं संबंधित प्रभाग निरीक्षक/पुलिस उपाधीक्षक/थानाध्यक्ष को इन आदेशों के कार्यान्वयन करने का प्रत्यक्ष उत्तरदायित्व भी दिया गया है।
गौरतलब है कि ऐसा प्रत्येक आदेश लिखित रूप में दिया जा रहा है एवं यहां यह स्पष्ट किया जा रहा है कि यदि अधोहस्ताक्षरी द्वारा किसी भी अधीनस्थ पदाधिकारी (पुलिस उपाधीक्षक से थानाध्यक्ष तक) को किसी भी बिन्दु पर मौखिक आदेश दिया जाए (जो कि अब तक नहीं दिया गया है) तो उक्त मौखिक आदेश का अनुपालन करने के पूर्व जिस पदाधिकारी को वह मौखिक आदेश दिया गया है। वह पदाधिकारी उक्त मौखिक आदेश की सम्पुष्टि के लिये अविलंब लिखित पत्राचार अधोहस्ताक्षरी से करेंगे और जब तक उक्त मौखिक आदेश को अधोहस्ताक्षरी द्वारा लिखित आदेश के रूप में संबंधित पदाधिकारी को संसूचित नहीं कर दिया जाए तब तक उसका अनुपालन लंबित रखे जाने की बात आइजी अरविंद पांडेय ने अपने जारी पत्र में कही है। साथ ही कहा गया है कि यदि संबंधित आदेशित पदाधिकारी लोक-हित में या अभियोजन-हित में यह आवश्यक समझे कि उक्त मौखिक आदेश का अनुपालन अविलंब नहीं किये जाने से अभियोजन या अन्वेषण प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकता है तो वे मौखिक आदेश का भी स्वविवेक से अनुपालन कर उसकी लिखित सम्पुष्टि विहित रीति से अधोहस्ताक्षरी से प्राप्त करेंगे। यही प्रक्रिया प्रत्येक वरीय पदाधिकारी द्वारा मौखिक आदेश देने के क्रम में अनुपालित की जाएगी। यदि आदेशित पदाधिकारी द्वारा इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और बाद में यह कहा जाएगा कि वरीय पदाधिकारी के मौखिक आदेश के दरभंगा प्रक्षेत्र स्थायी आदेश संख्या 06 /2014 अनुपालन में अमुक कार्य किया गया तो ऐसे कथन को इस आदेश के निर्गत एवं संसूचित होने की तिथि से मिथ्या माना जाएगा एवं तद्नुसार नियम संगत अनुवर्ती कार्रवाई की जाएगी। इसी प्रकार यदि किसी थानाध्यक्ष द्वारा किसी भी वरीय पदाधिकारी के बारे में (जिनमें प्रभाग निरीक्षक/पुलिस उपाधीक्षक/पुलिस अधीक्षक/पुलिस उप-महानिरीक्षक एवं पुलिस महानिरीक्षक सम्मिलित हैं) किसी भी प्रकार की प्रविष्टि थाना दैनिकी में की जाती है तो इस थाना दैनिकी की प्रविष्टि की सत्यापित प्रति अविलंब संबंधित पदाधिकारी को प्राप्त करायी जाएगी एवं दूरभाष पर भी मौखिक रूप से यह संसूचित किया जाएगा कि ऐसी प्रविष्टि थाना दैनिकी में की गयी है।
अभिलेख में मिथ्या प्रविश्टि के खिलाफ होगी कार्रवाई: अरविंद पांडेय, पुलिस महानिरीक्षक, दरभंगा प्रक्षेत्र, दरभंगा कहते हैं कि थाना दैनिकी में प्रविष्टि के संबंध में यदि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और किसी भी थानाध्यक्ष द्वारा किसी भी वरीय अनुक्रम के पदाधिकारी के संबंध में कोई प्रविष्टि थाना दैनिकी में की गयी तो इस प्रविष्टि को शासकीय अभिलेख में मिथ्या प्रविष्टि मानते हुए संबंधित थानाध्यक्ष के विरूद्व विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

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