राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं नीतीश - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 17 मई 2014

राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं नीतीश


dynamic leader nitish kumar
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राजनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। उन्होंने न केवल राज्य में मुख्यमंत्री के रूप में दो पारी खेली है, बल्कि केंद्रीय मंत्री के रूप में भी वह सफलतापूर्वक कार्य कर चुके हैं। बिहार के नालंदा जिले के कल्याण बिगहा के रहने वाले नीतीश बिहार अभियांत्रिक महाविद्यालय से विद्युत अभियंत्रिकी (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) की पढ़ाई की थी। वर्ष 1974 में जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति के जरिए राजनीति का ककहारा सीखने वाले नीतीश बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और अपने जमाने के धाकड़ नेता सत्येंद्र नारायण सिंह के भी काफी करीबी रहे हैं। 

वर्ष 1985 में नीतीश पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य बने और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 1987 में वह युवा लोकदल के अध्यक्ष बने और 1989 में जनता दल के सचिव बनाए गए। वर्ष 1989 में पहली बार वह बाढ़ संसदीय क्षेत्र क्षेत्र से सांसद बने। उन्हें केंद्र में कृषि राज्यमंत्री का दायित्व सौंपा गया था। वर्ष 1998 से 1999 के बीच कुछ समय के लिए नीतीश ने केंद्रीय भूतल और रेल मंत्री का दायित्व संभाला। इसके बाद वर्ष 2001 से 2004 के बीच केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेलमंत्री रहते हुए उन्होंने बिहार के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए। 

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से गठबंधन टूटने के 11 महीने बाद भी नीतीश ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं किया है। कहा जाता है कि पार्टी में बगावत न हो, इसलिए वह यथास्थिति बनाए हुए हैं। पिछले दिनों कई विधायक पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी करने के आरोप में पार्टी से निकाले जा चुके हैं। 

बिहार में जद (यू) और भाजपा गठबंधन इतनी मजबूती के साथ उभरा कि इसने 15 वर्ष पुरानी लालू-राबड़ी सरकार को उखाड़ फेंका। वर्ष 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में इस गठबंधन को बहुमत मिला और नीतीश बिहार के मुख्यमंत्री बने। 'न्याय के साथ विकास' उनका मूलमंत्र था। बिहार की सड़कें सुधर गईं, बिजली की आपूर्ति पहले से ज्यादा होने लगी, पटना में कई पुल और फ्लाईओवर बने। बिहार में विकास दिखने लगा। वर्ष 2010 में एक बार फिर जद (यू) भाजपा गठबंधन को जनादेश मिला, परंतु पिछले वर्ष भाजपा से गठबंधन टूट गया। नीतीश जद (यू) को धर्मनिरपेक्ष पार्टी कहलाने लायक बनाने में जुटे रहे।

लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के एक दिन बाद शनिवार को पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी विधायक दल की बैठक रविवार को बुलाई है। 

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