लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद मायावती कार्यकर्ताओं और नेताओं को मानसिक रूप से मजबूत करने में जुट गई हैं। सार्वजनिक तौर पर ब्राह्मणों को हार के लिए जिम्मेदार ठहराने के बाद एक बार फिर ब्राह्मण नेताओं को अहम जिम्मेदारी देने की तैयारी है। बसपा सुप्रीमो ने उत्तर प्रदेश के लिए लक्ष्य 2017 का खाका तैयार कर एक बार फिर 2007 का प्रदर्शन दोहराने के लिए अभी से सभी को जुट जाने को कहा है।
चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद मंगलवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी की सभी समितियों को भंग करने के बाद बुधवार को प्रदेश के सभी पदाधिकारियों, विधायकों और सांसदों के साथ बैठक की। इस दौरान नेताओं को बूथ स्तर तक मजबूत इकाई बनाकर लोगों को पार्टी से जोड़ने के टिप्स दिए गए। पार्टी सूत्रों को मुताबिक अब हर जिले में एक दलित के साथ ही एक ब्राह्मण नेता को अहम पद दिया जाएगा।
बैठक में 2017 का खाका तैयार
लोकसभा में सूपड़ा साफ होने के बाद बसपा प्रमुख अभी से ही अगले चुनावों की तैयारियों में जुट गई हैं। उप्र के लिए लक्ष्य 2017 का खाका तैयार कर उन्होंने बुधवार की मीटिंग में सभी को इससे अवगत कराया। 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में एक बार फिर 2007 का प्रदर्शन दोहराने के लिए अभी से सभी को जुट जाने को कहा। बैठक में प्रदेशभर के जिला, विधानसभा और लोकसभा स्तर के नेता शामिल हुए।
मायावती ने बैठक में नेताओं को आम लोगों और कार्यकर्ताओं से दूर होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने होटल कल्चर वाले नेताओं को स्पष्ट चेतावनी दी कि जो नेता लोगों से संपर्क बनाकर पार्टी को मजबूत नहीं कर सकते, उन्हें हटा दिया जाएगा। इसके साथ ही जातीय समीकरण का भी ध्यान रखा गया।
सूत्रों की मानें तो मायावती सभी जोनल कोऑर्डिनेटरों पर हार की गाज गिराने के बाद पुराने सिपहसालारों को एक बार फिर बेहतर काम करने के लिए जिम्मेदारी देने वाली हैं। यानी, एक बार फिर ब्राह्मण नेताओं को अहम जिम्मेदारी देने की तैयारी है। इन नेताओं पर ब्राह्मणों को पार्टी से जोड़ने की जिम्मेदारी रहेगी। अब देखना यह है कि मायावती के इस जातीय समीकरण का पार्टी की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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