उत्तराखंड की विस्तृत खबर (22 मई) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 22 मई 2014

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (22 मई)

अभी भी मोदी लहर के कहर से नहीं उबरे मुख्यमंत्री,डोईवाला की बजाय धारचूला से लड़ने की तैयारी

देहरादून,22 मई। उत्तराखंड के राजनीतिक जगत में मोदी लहर का ऐसा असर होगा किसी ने सोचा ना था। मोदी लहर के कहर में सत्ताधारी कांग्रेस के पांचो उम्मीदवार ऐसे उड़े जैसे ताश के पत्ते। पांचों कांग्रेसी उम्मीदवार कम से कम अपने राजनीतिक जीवन में इस हार को याद रखेंगे। मोदी लहर की दहशत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी एक मुख्यमंत्री के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ना है और वे बजाय भाजपा विधायकों की खाली सीट पर चुनाव लड़ने की सुरक्षित सीट तलाशते घूम रहे हंै। मुख्यमंत्री पिथौरागढ़ जिले की धारचूला विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। जल्द ही वहां के कांग्रेस विधायक हरीश धामी त्यागपत्र देकर सीएम के लिए सीट खाली कर सकते हैं। जबकि इससे पहले उनकी कपकोट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चर्चायें आम हो गयी थी। लेकिन ऐन मौके पर इस सीट को छोड़ धारचूला से लड़ने के पीछे उनकी मंशा साफ है  िकवे इस वक्त किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते। उल्लेखनीय है भाजपा के दो विधायक बीते चुनाव में सांसद निर्वाचित हुए है और उनकी सीटें क्रमशः डोईवाला और सोमेश्वर खाली हो गई है। देहरादून के डोईवाला से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक विधायक थे जबकि अल्मोड़ा की सोमेश्वर सुरक्षित से बीजेपी के अजय टम्टा विधायक थे। दोनो अब लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंच चुके हैं। इस बात की पूरी उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री हरीश रावत डोईवाला सीट पर ही चुनाव लड़ेंगे क्योंकि हरीश रावत 2009 में हरिद्वार संसदीय सीट से सांसद रहे और यह सीट हरिद्वार लोकसभा का हिस्सा है। लेकिन चुनाव परिणामो ने मुख्यमंत्री की नींद उड़ा दी है। कांग्रेस प्रदेश की कुल 70 में से 63 सीटों पर भाजपा से बहुत पीछे रही है। इसे देखते हुए  मुख्यमंत्री ने यहां से चुनाव लड़ने का अपना इरादा बदल दिया। मुख्यमंत्री ने अब कांग्रेस विधायक हरीश धामी की सीट धारचूला से लड़ने का मन बनाया है। अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा सीट का हिस्सा इस सीट पर इस बार के चुनाव में मोदी लहर का असर नहीं देखा गया और कांग्रेस को बढ़त मिली। दूसरा अल्मोड़ा सीट पर तीन बार सांसद रहे सीएम हरीश रावत को लगता है कि इस सीट पर उनकी विजय सुनिश्चित है। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से जहां भाजपा उत्साहित है वहीं कांग्रेस में सीएम विरोधी खेमा इस पर मुख्यमंत्री को घेरने की रणनीति बना रहा है। मुख्यमंत्री की रणनीति है कि वे धारचूला सीट पर खुद लड़े और सोमेश्वर सीट पर अपने करीबी और हाल ही में लोकसभा चुनावों में हारे प्रदीप टम्टा को लड़ाया जाए। सीएम का पूरा जोर विधानसभा में कांग्रेस की संख्या को बढ़ाने पर केन्द्रित है। वर्तमान में जो आकड़ा है उसके अनुसार 70 विधानसभा वाले सदन में कांग्रेस के पास 33,बीजेपी के पास 30,बीएसपी के पास 03,यूकेडी के पास01 और 03 निर्दलीय विधायक है। बीजेपी के दो विधायको के सांसद बनने से दो सीटे खाली हो गई है। सीएम ने अपने मंत्रिमंडल में तीनों निर्दलीयों को कैबिनेट मंत्री बना रखा है जबकि बीएसपी के एक और यूकेडी के एक विधायक को भी कैबिनेट में शामिल किया है। इस तरह सदन में उनकी सरकार बैशाखी पर सवार है। सीएम की रणनीति है कि डोईवाला और सोमेश्वर को जीत कर कांग्रेस की संख्या को 33 से 35 पर पहुंचा दिया जाए जिससे सदन में उनकी सरकार की निर्भरता अन्य विधायको पर कम हो जाए और उसके बाद वे अपने अंदाज में राज्य की सरकार चलाए। हालांकि जिस तरह का माहौल राज्य में अभी बना हुआ है यह कहना मुश्किल है कि वे दोनो सीटो पर अपने प्रत्याशी जिता ही लेंगे। क्यों कि डोईवाला सीट से बीजेपी के पूर्व मंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत चुनाव लड़ सकते है जिनकी उस क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। वे 2012 में मात्र कुछ सौ मतो से ही चुनाव हार गए थे। इससे पहले 2007 में त्रिवेन्द्र डोईवाला से ही विधायक थे। इस सीट पर सांसद डा. रमेश पोखरियाल निशंक अपनी पुत्री आरूषी निशंक को भी लड़ाने के इच्छुक है। दोनो की नाम कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ा करने वाले है। मुख्यमंत्री धारचूला को अपने लिए मुफीद तो मान रहे है लेकिन भाजपा इस सीट पर सीएम को हराने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाएगी। सदन में नेताप्रतिपक्ष अजय भट्ट चूंकी अल्मोड़ा संसदीय सीट से आते है इसलिए यहां भाजपा को जिताना उनके लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न है। यदि इस चुनाव में मुख्यमंत्री हार गए तो उनकी सरकार का भी गिरना तय है। सीएम के यहां हारने की गुंजाईश इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि उन्हें इस चुनाव में सिर्फ भाजपा ही नहीं बल्कि अपनी पार्टी के बिरोधी गुटो से भी लड़ना होगा जो किसी चुनौती से कम नहीं है। बहरहाल भविष्य का तो पता नहीं  लेकिन इतना तो तय है कि सीएम हरीश रावत धारचूला से चुनाव लड़ने जा रहे है। भले ही उनकी तरफ से इसकी औपचारिक घोषणा होनी बाकी हो लेकिन जिस तरह से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव वहां के दुर्गम इलाको का सघन दौरा कर रहे है वहां के लोग भी यह समझ चुके है इस बार उन्हें यहां से मुख्यमंत्री का चुनाव करना है। 

हरीश रावत भी चर्चित अधिकारियों की गिरफ्त में लगातार फंसते जा रहे हैं

देहरादून, 22 मई (निस)। मुख्यमंत्री हरीश रावत भी चर्चित अधिकारियों की गिरफ्त में लगातार फंसते जा रहे हैं यही कारण है कि ऐसे अधिकारियों को एक नहीं कई मलाईदार विभागों से नवाजा जा रहा है जबकि स्वच्छ छवि के अधिकारियों को ऐसे विभाग दिये जा रहे हैं जिन्हें ऐसे लोग देखना तक पसन्द नहीं करते गुरूवार को मुख्यमंत्री द्वारा विभागों का कार्य बंटवारा तो कम से कम इसी ओ इशारा करता है। एमडीडीए में अपने कारनामों के लिए चर्चित रहे  अपर सचिव नगर विकास तथा उपाध्यक्ष एमडीडीए आर. मीनाक्षी सुन्दरम को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव राजीव गांधी शहरी आवास विभाग, अपर सचिव पर्यटन, नागरिक उड्डयन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर्यटन विकास परिषद, परियोजना निदेशक पीआईय,यूपीईए,एडीबी तथा अपर मुख्य अधिकारी यूकैड बना दिया गया है। जबकि सचिव कुर्वे को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव तीर्थाटन प्रबन्धक एवं धार्मिक मेला विभाग, अपर सचिव विद्यालयी शिक्षा एवं राज्य परियोजना, निदेशक सर्व शिक्षा अभिमान, उच्च शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा तथा राज्य परियोजना निदेशक राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा)  श्रीमती राधिका झा को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव छात्र कल्याण विभाग, अपर सचिव राजस्व, विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा निबन्धक, सहकारिता विजय कुमार ढौंडियाल को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव पर्वतीय ग्रामों में चकबन्दी विभाग, अपर सचिव ग्राम्य विकास, पंचायती राज तथा निदेशक पंचायती राज श्रीमती ज्योति नीरज खरवाल को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव पिछड़ा क्षेत्र विकास विभाग, अपर सचिव वन एवं पर्यावरण मनोज चन्द्रन को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव पर्यावरण एवं ठोस अपशिष्ट निवारण विभाग का अतिरिक्त दायित्व दिया गया है। अपर सचिव कार्मिक रमेश चन्द्र लोहनी ने बताया कि अपर सचिव नियोजन एवं ग्राम्य विकास इन्दुधर बौड़ाई को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव ग्राम्य तालाब विकास विभाग, अपर सचिव दुग्ध एवं दुग्ध विकास तथा पशुपालन श्रीमती दमयंती दौहरे को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव भेड़ एवं बकरी पालन विभाग तथा चारा एवं चारागाह विकास विभाग, अपर सचिव ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, आयुष, मत्स्य पालन तथा निदेशक आयुष जीबी ओली को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव ग्रामीण सड़कें एवं ड्रेनेज विभाग, अपर सचिव पेयजल एवं वित्त अर्जुन सिंह को वर्तमान पदभार के साथ-साथ अपर सचिव वर्षा जल संग्रहण विभाग की जिम्मेदारी दी गयी हैै। 

वोट बहिष्कार करने वाले ग्रामीणों ने धारचूला में किया जोरदार प्रदर्शन, सरकार की उपेक्षा पर उगली आग
भाकपा (माले) ने किया नेतृत्व

uttrakhand news
धारचूला/देहरादून 22 मई(निस)। भाकपा (माले) के नेतृत्व में आपदाग्रस्त सुमदुम, पांगा, गम, उमचिया, कर्तो, तीजम के ग्रामीणों ने आज अपनी उपेक्षा के खिलाफ धारचूला में जुलूस निकाल कर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्हांेने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे के दूसरे दिन आपदा प्रभावितों का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि 11 माह बाद भी आपदाग्रस्त इलाकों के हालात नहीं बदले हैं। मुख्यमंत्री को भेजे गये ज्ञापन में 10 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। सरकार और विधायक के साथ ही  मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गयी। पीडब्ल्यूडी के डाॅक बंगले में जमा हुये आपदा प्रभावितों ने भाकपा (माले) के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन करते हुए एसडीएम कार्यालय के आगे तीन घण्टे तक धरना दिया। आपदा प्रभावितों ने मुख्यमंत्री शर्म करो के नारे लगाकर कल मुख्यमंत्री द्वारा किये गये दावों की पोल खोल दी। इस मौके पर हुई सभा में आपदा प्रभावित गोविन्द सिंह दानू ने कहा कि इन गांवों में अभी तक पट्टी पटवारी तक नहीं आया। नुकसान का मुआवजा तक नहीं मिला और बाढ़ सुरक्षा कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है। सैकड़ों उद्यान आपदा की भेंट चढ़ गये। इसका मुआवजा भी लोगों को नहीं मिला। भाकपा (माले) के जिला सचिव जगत मर्तोलिया ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत को धारचूला विधानसभा केवल चुनाव के लिए चाहिए। आपदा के 11 माह बाद भी सरकार की कमियों के कारण अकाल मौतें हो रही हैं। अभी भी पैदल मार्ग और मोटर मार्ग नहीं खुले हैं। लोगों के आसुँओं और लाशों की ढेरों पर मुख्यमंत्री चुनाव लड़ने के लिए आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह बताना होगा कि उनके दूसरे दौरे के बाद भी आपदा प्रभावितों के दुःखदर्द दूर क्यों नहीं हुये। आपदा प्रभावित आज भी इन समस्याओं से जूझ रहे हैं। सैकड़ों प्रभावितों को मुआवजा तक नहीं मिल पाया है। नदी किनारे बसे गांवों में अभी तक सुरक्षा दिवार नहीं बने हैं। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को 25 लाख के ठेके देकर उपकृत्य किया गया है। जबकि नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित इस बात को जानते हैं कि विधानसभा में 30 विधायकों की संख्या वाले भाजपा ने सड़क और सदन दोनों जगह आपदा प्रभावितों की आवाज नहीं उठायी। भाजपा की इस बेरूखी का जवाब भी मुख्यमंत्री के झूठ के साथ ही देने के लिए आपदा प्रभावित तैयार बैठे हैं। भाकपा (माले) मुनस्यारी ब्लाॅक सचिव सुरेन्द्र बृजवाल ने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्र की जनता जितनी भी सुविधायें हासिल कर पायी है, वह माले के साथ संघर्ष से ही हो पायी है। इस मौके पर शेर सिंह दानू, प्रेम दानू, किसान महासभा के तीजम इकाई के अध्यक्ष जीवन दरियाल, सुमदुम किसान सभा के अध्यक्ष उपेन्द्र दानू, रमेश दानू, नारायण सिंह दानू, गजेन्द्र सिंह, राजेश्वरी दानू, मानमती दानू, बबीता दानू, गोविन्दी दानू, सरस्वती, कौशल्या, संगीता, उर्मिला दीपा, सुन्दर सिंह गणेश सिंह, पुष्कर सिंह, नेत्र सिंह दानू, कल्याण सिंह, जीवन सिंह, धन सिंह, राज विरेन्द्र दानू, कविन्द्र दानू ने विचार व्यक्त किये। इस मौके पर उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार ने कहा कि राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग की टीम शीघ्र ही इलाके का दौरा करेगी और वे स्वयं भी इस इलाके में जायेंगे। निःशुल्क राशन का पैकेज दिये जाने के मामले में जांच कर आपदा प्रभावितों को 40 किलो का पैक दिलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए तहसील प्रशासन जांच करने के बाद ही कार्यवाही करेगा। 

पेयजलनिगम के कार्यों का मंत्री ने किया निरीक्षण 

देहरादून 22 मई,(निस)  धर्मपुर विधान सभा क्षेत्र. के अन्तर्गत टर्नर रोड एवं कैन्ट क्षेत्र में पेयजल निगम द्वारा कराये जा रहे ड्रेनेज कार्यो का वन एवं वन्य जीव, विधि एवं न्याय एवं खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल द्वारा सम्बन्धित अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण कर कार्यदायी संस्था को गुणवत्ता के साथ कार्य करने के निर्देश दिये। इस अवसर पर उन्होने पेयजल निगम के अधिशासी अभियन्ता श्री पंत को निर्देश दिये है कि ड्रेनेज का कार्य सही ढंग से किया जाना चाहिए तथा कार्य की गुणवत्ता में किसी प्रकार से कोई समझौता नही किया जायेगा। उन्होने निर्देश दिये है कि अन्डर ग्राउड जो पाईप बिछाये जा रहे है उन्हे ठीक तरह से बिछाया जाय तथा उनके नीचे से सीमेन्ट व कंकरीट के साथ पाईप लाईन डाली जाय ताकि बाद में लाईन को कोई नुकसान न होने पाय। उन्होने कहा कि पाईप लाईन को ठीक तरह से मिटटी से भर दे तथा आर.बी.एम. डाल कर सडक को ठीक तरह से बनाया जाय तथा पानी की निकासी के लिए दोनो ओर से नाली बनाई जाय। उन्होने कहा कि इस कार्य हेतु 6 करोड 55 लाख रूपय स्वीकृत किये गये है। उन्होने कहा कि बरसात के समय क्षेत्र में जल भराव की स्थिति काफी जटिल हो जाती है जिसके लिए क्षेत्र वासियों को जल भराव की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए सिचाई विभाग द्वारा टर्नर रोड लेन नम्बर 1 से तथा ग्राफिक ऐरा से दो बडे नालों का निर्माण कराया जा रहा है जो कैन्ट क्षेत्र के झील के पास अवरूध हो रहे है। जिससे पानी का दबाव पिछे की ओर हो जाता है। उन्होने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए झील के पास की पुलिया का पुनर्निमाण किया जाना आवश्यक है, जिससे पानी अवरूध न होकर सीधे आगे की ओर जायेगा तथा क्षेत्र में जल भराव की समस्या से निजात मिल पायेगी। निरीक्षण के दौरान पेयजल निगम के अधिशासी अभियन्ता, श्री पंत, के अलावा स्थानीय प्रतिनिधि राजेश परमार, सुनील कुमार, सुनील कुमार बिन्ना, दिलशाद, तासिन, मौहम्मद अली, मंसूर अनुराग यासीन, काका, श्रीमती चन्द्रमाया, बबली, रमेश कुमार, मंगू आदि मौजूद थे।

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