उत्तराखंड की विस्तृत खबर (23 मई) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 23 मई 2014

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (23 मई)

मुख्यमंत्री में दम है तो डोईवाला से लड़कर दिखायें चुनावः त्रिवेन्द्र सिंह रावत

trivendra singh rawat
देेहरादून, 23 मई (राजेन्द्र जोशी)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें दम है तो वे डोईवाला विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर दिखायें। उन्होने कहा आखिर वे डोईवाला से चुनाव लड़ने के बजाय धारचूला क्यों जाना चाहते हैं जबकि डोईवाला विधानसभा क्षेत्र उनकी हरिद्वार संसदीय सीट का ही एक हिस्सा है। शुक्रवार को यहां भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड की जनता ने हमेशा राष्ट्रवादी ताकतों का साथ दिया है और देश क्या चाहता है इसमें उत्तराखण्ड ने दिशा दी है। उन्होने लोकसभा चुनाव में भाजपा को भारी सफलता देने पर राज्यवासियों का जहां धन्यवाद किया वहीं पार्टी के कार्यकर्ताओं का भी आभार प्रकट किया। उन्होने कहा इस बार चुनाव की यह खासियत रही कि तात्कालिक घटनाओं पर देश की जनता का ध्यान विरोधी दल बंटा नहीं पाये और देश की जनता ने तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों को एक सिरे से नकार दिया। उन्होने कहा आजादी के बाद जनसंघ से लेकर भाजपा तक के सफर के दौरान इस बार देश की जनता ने भाजपा व एनडीए को बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी है। उन्होने कहा मोदी ने साफ कहा है कि अब उनकी जिम्मेदारी है कि विकास की राजनीति तुष्टीकरण से हटकर होगी। उन्होने कहा यह लोकसभा चुनाव उत्तराखण्ड में हरीश रावत व मोदी के बीच था जबकि हरीश रावत बार-बार यह नकार रहे थे कि उत्तराखण्ड में मोदी की नहीं बल्कि हरदा की लहर है। उन्होने कहा चुनाव परिणामों ने हरदा का हारदा बना डाला इसके बाद भी वे नैतिकता के आधार पर इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। उन्होने कहा लोकसभा चुनाव के बाद निशंक के लोकसभा में चले जाने के बाद डोईवाला विणानसभा सीट उनके शपथ लेते ही खाली हो जायेगी लिहाजा मुख्यमंत्री को अब डोईवाला से उपचुनाव लड़ना चाहिए लेकिन वे धारचूला से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होने कहा यदि उनमें जरा भी दम है तो उनको डोईवाला से चुनाव लड़ना चाहिये क्योंकि यह सीट हरिद्वार लोकसभा का हिस्सा है। उन्होने कहा जब उन्होने अपने संसदीय कार्यकाल में क्षेत्र का विकास नहीं किया ता आखिर वे कैसे वहां से चुनाव लड़ेंगे। उन्होने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आपदा के दौरान मिले राहत राशि व उसके बंटवारे पर राज्य सरकार को श्वेतपत्र जारी करना चाहिए वहीं उन्होने कहा मुख्यमंत्री अभी संासदों ने शपथ भी नहीं ली है अभी से केन्द्र से चार हजार करोड़ की मांग करने लगे हैं उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता को बतायें कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने राज्य को जो 8हजार करोड़ रूपये दिये थे उसमें से कितना पैसा केन्द्र से आया और राज्य सरकार ने कितने रूपयों की डीपीआर केन्द्र को बनाकर भेजी। उन्होने कहा आपदा के दौरान मिले पैसों में अनियमितता हुई है लिहाजा इसकी किसी तीसरी जांच एजेंसी से जांच की जानी चाहिए। साथ ही उन्होने कहा कि राज्य सरकार जहां एक ओर विधान का अपमान कर रही है तो वहीं विधायी परम्पराओं को भी नजर अंदाज कर रही है। उन्होने कहा जहां विधानसभा अध्यक्ष प्रोटोकाल में मुख्यमंत्री से उपर है वहीं सरकार ने गैरसैण प्राधिकरण का दायित्व देकर उनको मुख्यमंत्री के नीचे ला खड़ा कर दिया है। उन्होने कहा राज्य सरकार जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे का दुरपयोग सरकार बचाने में कर रही है। उनका कहना है कि राज्य सरकार में 30 विधायकों को कैबिनेट मंत्री का दायित्व देना फिजूलखर्ची नहीं तो और क्या है।  

प्रदेश की बंद पड़ी जलविद्युत योजनाएं शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में राज्य की ओर से  पैरवी

देेहरादून, 23 मई।  सूबे की कांग्रेस सरकार ने तय किया है कि प्रदेश की बंद पड़ी जलविद्युत योजनाएं शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में राज्य की ओर से  पैरवी की जाएगी ताकि निर्माणाधीन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद प्रदेश में बिजली का संकट न रहे और राज्य अधिक बिजली उत्पादन कर बिजली की आड़े वक्त के लिए अन्य प्रदेशों में बैंकिंग कर सके। वहीं इको सेंसिटिव जोन में 25 मेगावाट तक लघु जलविद्युत परियोजनाओं को शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा। जबकि एक अन्य फैसले के तहत राज्य मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री राहत कोष से अब महकमों को भी विकास कार्यो के लिए अग्रिम धन देने की सुविधा को भी अंतिम रूप दे दिया है। इसके तहत राज्य मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री राहत कोष नियमावली में संशोधन को हरी झंडी दी। यही नहीं पेयजल निगम और जल संस्थान के एकीकरण और राजकीयकरण पर सैद्धांतिक सहमति जता दी गयी है। इस बारे में विभिन्न पहलुओं से अध्ययन को उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए अब अलग.अलग आयोग होंगे। वहीं अन्य महत्वपूर्ण फैसले में प्रदेश में विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों की भर्ती के लिए राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के लिए अध्यादेश लाने को मंजूरी दी गई। सरकार ने वहीं नगर पंचायत के लिए 10 हजार की आबादी और 75 फीसदी गैर कृषि आबादी के मानकों को शिथिल करते हुए 50 फीसदी करने पर मुहर लगा दी गई। पांच ब्लाकों चकराता, मोरी, जोशीमठ धारचूला और मुनस्यारी को सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया गया है। वहां सांस्कृतिक संवर्धन को संस्कृति महकमे कदम उठाएगा। बीते वर्ष आपदा के दौरान मलबे में छह माह से दबे वाहनों के स्वामियों को 25 हजार रुपये, चालकों व परिचालकों को 5.5 हजार रुपये, एक साल से दबे वाहनों के लिए वाहन स्वामियों को 50 हजार रुपये, चालकों व परिचालकों को 10.10 हजार रुपये दिए जाएंगे। 

परिवहन स्वामियों ने एक जून से अनिश्चितकालीन हडताल पर जाने का किया ऐलान

ऋषिकेश, 23 मई (निस)। चारों धामों की यात्रा को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है इसका उदाहरण पिछले कई दिनों से ऋषिकेश बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित जोशीमठ निजी परिवहन कंपिनयों की 166 व्हील बेस बसों को रोके जाने को लेकर परिवहन व्यवसायियों में प्रशासन के विरूद्ध तीव्र रोष उत्पन्न हो गया हैं। जिन्होने श्रीनगर मार्ग लोकल रोटेशन व्यवस्था समिति के बैनर तले  सांकेतिक हड़ताल और एक जून से अनिश्चितकालीन हडताल पर जाने का ऐलान किया है । हड़ताल की स्थिति में लोकल रूटों पर हजारो सवारियों की परेशानी बढ़ जाएगी लोकल रोटेशन अध्यक्ष मनोज ध्यानी ने बताया कि  परिवहन कंपनियों के पदाधिकारियों की बैठक मंे चारधाम यात्रा पर संचालित होने वाली बसांे को चमोली जिला प्रशासन द्वारा जोशीमठ मे रोके जाने पर विस्तृत चर्चा की गई। आरोप है कि प्रशासन निजी परिवहन कंपनियों के 30 और 42 सीटर वाहनों को रोक रहा है। जबकि जीएमवीएन और दिल्ली आदि प्रांतो से आने वाली 166 व्हील बेस बसों और 90 कुंतल लोडेड ट्रकों को जाने की अनुमति दे रहा है। उन्होने चेताया कि शासन प्रशासन ने निजी परिवहन कंपनियों से भेदभाव नहीं छोड़ा और बसों को अनुमति नहीं दी गई तो इसके विरोध में सोमवार केा बसो की सांकेतिक हड़ताल की जाएगी ओर इसके बाद वाहनों के चक्के जाम कर दिए जाएंगे।

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