आलेख : बीमा क्षेत्र में FDI बढ़ाना देश के लिये घातक - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 14 अगस्त 2014

आलेख : बीमा क्षेत्र में FDI बढ़ाना देश के लिये घातक

जिन मुद्दों पर भाजपा विपक्ष में होने पर संसद में छाती पीट-पीट कर विरोध करती थी उन्हीं मुद्दों पर अब वह संसद में विल लाकर उद्योगपतियों के हितों का संवर्धन करने जा रही है।

चुनाव के समय श्री मोदी के लिए विज्ञापन करने वाले देशी-विदेशी पूंजीपतियों को ईनाम के लिए जन विरोधी फैसले मोदी सरकार कर रही है। सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढाने का निर्णय, रेलवे मे एफडीआई, भूमि अधिग्रहण कानून मे सहमति 80% के बजाय 50% करने पर विचार, गेहुं मे बोनस समाप्त करने का निर्णय, मनरेगा को समेटने की जुगत, बुलेट ट्रेन चलाने का निर्णय, किसानो तथा गरीबो को मिलने वाली छूट (सबसिडी) मे कटौती पर विचार को कैसे देश हित में कहा जा सकता है?

प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने विदेशी पूंजी निवेश लगभग हर क्षेत्र में खोल दिया है। ऐसा ही एक बिल संसद में रखने की कैविनेट ने मंजूरी दी है जिसमें बीमा क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश की सीमा 26% से बढ़ाकर 49% करने का प्रस्ताव है। तर्क यह दिया जा रहा है कि इससे 60 हजार करोड़ रूपये का निवेश होगा और मूलभूत जरूरतों के लिये पूंजी की उपलब्धता बढ़ेगी लेकिन अगर सन् 2000 से लेकर 2013 तक के बीमा क्षेत्र में 26% विदेशी निवेश की सीमा के तहत लाई गई विदेशी पूंजी पर नजर डालें तो इसकी कलई खुल जाती है।

इस दौरान महज 7250 करोड़ रूपये का निवेश किया गया वह भी निजी कम्पनियों के दफ्तर और उनके विकास पर यह राशि खर्च की गई और एक-दो कम्पनियों को छोंड़कर सभी घाटे में हैं और ग्राहकों का धन वापस करने की हालत में नहीं हैं।

वाजपेयी जी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने वर्ष 1999 में आईआरडीए(बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम) विल पास कर बीमा क्षेत्र में निजीकरण की अनुमति दी थी। बहुराष्ट्रीय बीमा कम्पनियों की नजर सरकारी नियंत्रण बाली एलआईसी(भरतीय जीवन बीमा निगम) के 15 लाख हजार करोड़ की परिसम्पत्ति पर है जिसे कमजोर कर वो इसे हड़पना चाहती है।

इसीलिये 23 निजी कम्पनियों को मजबूत किया जा रहा है और एलआईसी से आये दिन शेयर बाजार की हालत सुधारने के लिये हजारों करोड़ रूपये प्रतिमाह उसमें निवेश कराया जा रहा है। जहां एक ओर एल0आई0सी0 में कर्मचारियों की भर्ती पर अघोषित प्रतिबन्ध है जिससे कार्य बोझ बढ़ते जाने से एवं वेतन पुर्ननिर्धारण दो वर्ष से लंबित होने से एल0आई0सी0 में हताशा का माहौल है। वहीं आई0आर0डी0ए0 ने एल0आई0सी0 के नये प्लानों पर रोंक लगा रखी है जिससे एल0आई0सी0 का व्यवसाय भी प्रभावित है। सरकारी बीमा कम्पनी एल0आई0सी0 को मजबूत बनानें और बीमा क्षेत्र में एफ0डी0आई0 न बढ़ाना ही उचित है।

जहां एल0आई0सी0 प्रत्येक पंचवर्षीय योजनाओं मे हजारों करोड़ रूपये सड़क, बिजली, पानी जैसे विकास के कार्यों में धन लगाती हैं वहीं निजी बीमा कम्पनियां विदेशी साझेदारों के साथ देश को लूटने की तैयारी में हैं और मोदी सरकार बीमा क्षेत्र मे एफ0डी0आई0 लाकर निजी देशी, विदेशी कम्पनियो को देश हित के विरूद्व उनका साथ दे रही है। नरेन्द्र मोदी सरकार देश को जान बूझ कर उसी रास्ते पर ले जाना चाह रही है, जिस पर चलकर आम जन, त्राहि-त्राहि करे और जिंदगी में आशा की किरन तलासे।




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उमेश तिवारी
जिला-सीधी
मध्यप्रदेश
मो0 09630650750

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