आलेख : सम्मान नहीं, अपमान है भारत रत्न - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 14 अगस्त 2014

आलेख : सम्मान नहीं, अपमान है भारत रत्न

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय, नेताजी, आजाद, भगत सिंह जैसे महापुरुषों को इस सम्मान को देना तोे दूर चर्चा करना भी सूरज को दीपक दिखाने जैसा है 

क्रिकेट प्लेयर सचिन तेंदुलकर और न जाने क्या-क्या जैसे नाम तो देश का सर्व प्रतिष्ठित सम्मान भारत रत्न के लिए कुछ हद तक ठीक है, लेकिन इस कड़ी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्र शेखर आजाद, सरदार भगत सिंह जैसे महापुरुषों नाम उछाल कर न सिर्फ उनका अपमान, बल्कि सूरज को दीपक दिखाने जैसा प्रतीत हो रहा है। इन महापुरुषों का भारत रत्न से कई गुना अधिक बहुत ऊँचा सम्मान पहले से ही भारत ही नहीं पूरे विश्व के लोगों में रख-बसा है। 

हालांकि केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कह दिया है कि सरकार के तरफ से अभी किसी का भी नाम भारत रत्न के लिए प्रस्तावित नहीं है। लेकिन सूत्र बताते है कि सरकार ने एक से ज्यादा कई मेडल बनाने के आदेश आरबीआई को दे चुकी है। इसके चलते सम्मान को लेकर न सिर्फ अटकलों का बाजार गरम व बहस तेज है, बल्कि एक लंबी सूची भी जारी कर दी गयी है। इसमें नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, नेेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित चित्रकार राजा रवि वर्मा, हनुमान प्रसाद पोद्दार आदि के नाम बताएं गए है। बात जब भारत सम्मान की चली तो आरएसएस भला क्यों पीछे रहे, उसने भी पंडित मदन मोहन मालवीय, पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम प्रस्तावित कर दिया। कांग्रेस की तरफ से पार्टी संस्थापक एओ ह्यूम के अलावा भगत सिंह, राजगुरु, चंद्रशेषर आजाद, लाला लाजपत राय, ऐनी बेसेंट, गोपाल कृष्ण गोखले आदि के नामों की सूची तैयार कर प्रपोज कर दिया। 

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतिश ने भी समाजवाद के प्रणेता राम मनोहर लोहिया, डॉ. गोपाल दास नीरज, पूर्व मुयमंत्री कर्पूरी ठाकुर व चैधरी चरण सिंह का नाम प्रस्तावित किया है। पीएम को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि भारत छोड़ो आंदोलन 1942 के नायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, क्रांतिधर्मी चिंतक एवं भारतीय राजनीति तथा सामाजिक जीवन को अपनी अप्रतिम मेधा से सम्पन्न बनाने वाले राम मनोहर लोहिया के साथ-साथ भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चैधरी चरण सिंह को अभी तक भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित नहीं किया गया है। इन विभूतियों का योगदान, महत्व और जीवन दर्शन सर्वविदित है। 

माना जा रहा है कि सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक को पांच भारत रत्न मेडल ढालने के लिए कहा है। तभी से ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को क्या देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न मिल सकता है। गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तो बाकायदा पत्र भेजकर सरकार से पेशकश भी कर दी है। कहा गया कि सरकार ने खुद मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने की राष्ट्रपति से सिफारिश की है। मेजर ध्यान चंद को यह सम्मान देने के वास्ते ही पिछली सरकार ने खिलाडि़यों को भारत रत्न देने के लिए नियमों में बदलाव किए थे। यह बात दीगर है कि राजनीतिक षडयंत्र में यह सम्मान उन्हें न मिलकर सचिन तेंदुलकर को उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के दिन ही उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा कर दी गई थी। जबकि उस समय ध्यानचंद का नाम भारत रत्न के लिए सवरेपरि था। तत्कालीन खेल मंत्री ने मेजर ध्यानचंद के नाम की गृह मंत्रालय को भारत रत्न के लिए सिफारिश की थी लेकिन सरकार ने वाहवाही लूटने की कोशिश में सचिन को भारत रत्न बना दिया था। खेल जगत में इसकी कड़ी आलोचना की गयी थी। हालांकि उस वक्त कहा गया था कि अब जब खिलाडि़यों को भारत देेने का मामला साफ हो गया है तो अगली बार ध्यान चंद को यह सम्मान दिया जा सकता है। इस उहापोह के बीच मेजर ध्यान चंद के पुत्र अशोक ने कड़ी आपत्ति जाहिर किया है कि सरकार को जो करना है, स्पष्ट करें सिर्फ घोषणा कर उनकी किरकिरी न कराएं, अन्यथा उनका नाम इस तरह उछाल कर हाॅकी के दुनिया के इस जांबाज खिलाड़ी का अपमान ना करें। 

फिरहाल केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री द्वारा बयान दिया जाना कि सरकार ने किसी के नाम का प्रस्ताव नहीं भेजा है और न ही कोई ऐसी तैयारी है। सरकार के इस बयान पर भले ही यह बहस कुछ समय के लिए टल जाएं लेकिन यह प्रकरण लोगों को अंदर ही अंदर सालता रहेगा कि 15 अगस्त से ठीक पहले एक से ज्यादा भारत रत्न तैयार करनेे संबंधित खबर और उसके साथ अटल जी व नेताजी का नाम जोड़कर क्या कोई व्यक्ति संस्था यह टटोलना चाहता था कि इस पर लोगों का रियेक्शन क्या होता है। ऐेसी अटकले यूंही यूंही नहीं लगाई जा रही, क्योंकि जब इसकी खबरें मीडिया में आई तो किसी ने पलटकर खंडन नहीं किया। यह बात दिगर है कि नेताजी व ध्यान चंद के परिजनों का एतराज जरुर आ गया। तृणमूल कांग्रेस की तरफ से चुने गए सांसद सुगतों बोस, जिन्होंने हिट मलेस्टी अपोनेंट पुस्तक में लिखा है कि नेताजी जैसे लोगों को भारत रत्न देने या नहीं देने जेसी चर्चाओं में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। महान स्वाधिनता सेनानियों के नाम भारत रत्न जैसे सम्मान के साथ उछालकर उनका अपमान नहीं करना चाहिए। नेताजी व पंडित मदनमोहन मालवीय सरीके कद्दावर लोग खुद अपने आप में भारतवासियों के मन में तर्कलोक से ज्यादा उनके भावलोक में प्रतिष्ठित है। आज का कोई सम्मान चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो उससे उन्हें देने की कोशिश कुछ वैसा ही प्रयास माना जायेगा, जैसे कोई सूरज को दिया दिखा रहा हो।  

अब तो अपना दल के अनुप्रिया पटेल ने भी पत्र भेजकर शाहूजी महराज व ज्योतिबा फूले को भी भारत रत्न देने की गुहार लगाई है। मतलब साफ है कि भारत रत्न जैसे सम्मान का अब राजनीतिककरण हो चला है, जो किसी भी देशभक्त को खिन्नित करने के लिए काफी है। सही बात तो यह है  िकइस सम्मान का राजनीतिकरण पर तत्काल ब्रेक लगना चाहिए। भारत रत्न के लिए विशेषज्ञों की टीम गठित करनी चाहिए और यह सम्मान वोट बैंक को ध्यान में रखकर देने के बजाए वर्तमान भारत निर्माण में योगदान देने वालों को दिया जाएं तो अच्छा होगा। मेरा मानना है कि इस सर्वोच्च सम्मान के साथ ऐसे ही खिलवाड़ कर ध्यान चंद व सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाडि़यों के बीच विवाद बनाने के बजाए विज्ञान-तकनीक, अर्थव्यवस्था, समाजसेवा आदि जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में राष्ट निर्माण में जुटे बुद्धजीवियों को दिया जाना चाहिए, जिससे इसकी गरिमा व सार्थकता बरकरार रहे। 





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(सुरेश गांधी)

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