नेता प्रतिपक्ष पर सरकार ही कुछ कर सकती है : सुमित्रा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शनिवार, 23 अगस्त 2014

नेता प्रतिपक्ष पर सरकार ही कुछ कर सकती है : सुमित्रा


sumitra mahajan
लोकसभा में विपक्ष के नेता को लेकर चल रही बहस के बीच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उठाए गए सवाल ने इस मामले को नई गर्माहट दे दी है। इस बीच लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने यह कहते हुए गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी है कि उन्होंने अध्यक्ष के नाते जो निर्णय लिया है, वह 'डायरेक्टिव ऑफ स्पीकर' के नियमानुसार ही लिया है। यदि कुछ करना है तो सरकार को करना है, अध्यक्ष को नहीं। एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने इंदौर पहुंची महाजन ने कहा कि इससे पहले भी 1980 और 1984 में सदन में विपक्ष का नेता नहीं था, उस समय की फाइलें निकालकर उन्होंने निर्णय लेने से पहले देखा है। उसमें भी डायरेक्टिव ऑफ स्पीकर के नियमों का जिक्र है। जब से यह नियमावली निर्देश बना है उसमें विपक्ष के नेता के चयन को लेकर दिए गए नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, नियम में साफ लिखा है कि सदन में विपक्ष का नेता उसी दल से बनेगा जिसकी संख्या एक बटा 10 से अधिक होगी। 

महाजन ने कहा कि गठजोड़ (एलायंस) करके भी यदि सदन में विपक्ष का नेता बनाया जाए तो भी उसके नियम साफ हैं। गठजोड़ वाले दलों का चुनावी घोषणा पत्र एक होना चाहिए, मुझे गठजोड़ के दलों की तरफ से जो पत्र सौंपे गए थे, उसमें सदन में उनके पार्टी का नेता कौन होगा उसके बारे में बताया गया था, वैसे भी गठजोड़ सीटों को लेकर बना था, चुनाव के समय उनके घोषणा-पत्र अलग-अलग थे।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने जो कहा है उसका जवाब लोकसभा अध्यक्ष को नहीं सरकार को देना है, सरकार जवाब देगी। रही बात सदन में विपक्ष के नेता की तो यह सरकार का काम है कि वह इसके लिए बनी नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव लाए। सारा प्रश्न सदन में विपक्ष की पार्टी के मान्यता को लेकर है, प्रजातंत्र में तो विपक्ष होता है और है। 

कोई टिप्पणी नहीं: