स्कॉटलैंड ब्रिटेन में बना रहेगा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 19 सितंबर 2014

स्कॉटलैंड ब्रिटेन में बना रहेगा

स्कॉटलैड वासियों ने ब्रिटेन के साथ अपना 307 साल पुराना रिश्ता बरकरार रखने का आज ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आजादी की मुहिम को धराशायी करने के साथ ही ब्रिटेन की अखंडता को लेकर चिंतित लोगों और प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को बड़ी राहत पहुंचायी।  ब्रिटेन के साथ रहने या उससे अलग एक आजाद मुल्क के रूप में अस्तित्व में आने को लेकर गुरुवार को स्कॉटलैंड में कराए गए जनमत संग्रह के नतीजे ब्रिटेन के साथ रहने के हक में गए। इसके पक्ष में 55 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 45 प्रतिशत वोड पड़े। हालांकि मतो के प्रतिशत के हिसाब से आजादी के समर्थकों और विरोधियों के बीच का अतंर कोई बहुत ज्यादा नहीं रहा। 
        
प्रधानमंत्री कैमरन ने नतीजों पर खुशी जाहिर करते हुए स्कॉटलैंड वासियों और ब्रिटेन की एकता बनाए रखने के लिए जीजान से कोशिश करने वाले नेताओं को धन्यवाद दिया। ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री निक कलेग ने नतीजों को बेहद उत्साहजनक बताया। दूसरी ओर आजादी का अभियान चलाने वाले स्कॉटिश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता एलेकस सालमंड ने जनमत संग्रह में मिली पराजय को शालीनता के साथ स्वीकार करते हुए कहा कि स्कॉटलैंड की जनता ने ब्रिटेन के साथ रहने का फैसला सुनाया है।

 मैंने उनके इस फैसले का सम्मान करता हूं लेकिन सरकार को भी इसका सम्मान करते हुए स्कॉटलैंड को ज्यादा से ज्यादा स्वायत्ता देने पर गंभीरता से विचा करना चाहिए। हालांकि पार्टी के उपनेजा निकोला स्टजियोन ने नतीजों पर निराशा जताते हुए कहा कि लगता है 'हमारे अभियान में कहीं कोई कमी रह गयी'। जनमत संग्रह के परिणाम आते ही स्कॉटलैंड के कई शहरों में ब्रिटेन का समर्थन करने वाले लोग जश्न मनाते हुए सड़कों पर उतर आए।

यूरोपियन रिसर्च सेंटर के मुताबिक ब्रिटेन पूरे यूरोपियन यूनियन का 75 फीसदी तेल का उत्पादन करता है। इसमें से 90 फीसदी स्कॉटलैंड से ही आता है। 2012 के आंकड़े बताते हैं कि स्कॉटिश तेल का ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में करीब 40 अरब डॉलर यानी 24 खरब से भी कहीं ज्यादा का योगदान है। यही नहीं स्कॉटलैंड हर साल करीब 100 अरब पाउंड यानि 99 खरब से ज्यादा का निर्यात करता है। इसमें 11 अरब पाउंड की वित्तीय सेवाएं और 9 अरब पाउंड का खाने पीने का सामान निर्यात होता है। जाहिर है अगर करीब 42 लाख लोगों ने स्कॉटलैंड की आजादी के समर्थन में वोट दिया तो इसका बड़ा खामियाजा ब्रिटेन को उठाना होगा।

जनमत संग्रह में शामिल स्कॉटलैंड के 42 लाख लोगों में से कई ये मानते हैं कि इंग्लैंड के साथ 300 से भी ज्यादा पुरानी राजनीतिक यूनियन का अंत होना चाहिए और स्कॉटलैंड को ब्रिटेन से आजाद हो जाना चाहिए। इन लोगों की दलील है कि अगर स्कॉटलैंड को और ज्यादा स्वायत्तता मिली होती तो आज हालात एकदम अलग होते। ना सिर्फ स्कॉटलैंड की अर्थव्यवस्था बेहतर होती, बल्कि सामाजिक नीतियों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलता।

हालांकि स्कॉटलैंड में बहुमत इन दलीलों से सहमत नहीं है उसका मानना है कि यूके में रहकर स्कॉटलैंड ज्यादा सुरक्षित है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो स्कॉटलैंड की संसद को और ज्यादा वित्तीय और कानूनी शक्तियां देने की बात कर रहे हैं। ब्रिटेन का हिस्सा होने के बावजूद स्कॉटलैंड की अपनी संसद है। स्कॉटिश संसद के सदस्य शिक्षा, स्वास्थ्य, और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर कानून बना सकते हैं। लेकिन रक्षा, विदेश नीति, रोजगार, व्यापार और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। स्कॉटिश की संसद में इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर पैसा आज भी यूके सरकार की तरफ से दिया जाता है।

वोटिंग में शामिल कई लोग स्कॉटलैंड की मौजूदा हालत से खुश नहीं हैं। उन्हें लगता है कि वो ब्रिटेन की राजनीति से जानबूझकर दूर रखे जाते हैं। स्कॉटलैंड के बंदरगाहों पर परमाणु हथियार रखने के यूके सरकार के फैसले पर भी लोग सवाल उठाते रहे हैं।

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