बिहार : आज पहली बार आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों को मिला अंडा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 20 सितंबर 2014

बिहार : आज पहली बार आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों को मिला अंडा

  • प्रखंड पर्यवेक्षक एस.मिंज के करकमलों से 29 बच्चों को पोशाक खरीदने के लिए राशि दी गयी 

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दानापुर। संडे हो या मंडे रोज खाएं अंडे। इस तरह का विज्ञापन टी.वी. पर आता है। इस विज्ञापन को बच्चे चाव से देखते हैं। जो सार्मथ्यवान परिवार के बच्चे हैं। उनको तो ब्रेकफास्ट में अंडा मिल जाता है। इसके अलावे बच्चों को टिफिन बाॅक्स में भी अंडा मिल जाता है। तो दूसरी ओर टी.वी.विज्ञापन निम्न परिवार के बच्चों को दर्ददेवा साबित होता है। 

सूबे के शिक्षा मंत्री वृशिण पटेल ने कहा है कि राज्य सरकार ने मिड डे मील में बच्चों को अंडा देने का निश्चय किया है। जो बच्चे शाकाहारी होंगे, उन्हें फल दिया जाएगा। सप्ताह में कितने दिन अंडे मिलेंगे और कब से मिलेंगे,इसे लेकर विचार-विर्मश किया  जा रहा है। इस बीच आज से आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों को अंडा दिया जाने लगा है। इस तरह केन्द्र के बच्चों का अच्छे दिन आए गए।

दानापुर प्रखंड में 226 आंगनबाड़ी केन्द्र है। इन केन्द्रों पर आज से बच्चों को अंडा मिलने लगा। वहीं आज ही प्रखंड पर्यवेक्षक एस.मिंज के करकमलों से 29 बच्चों को पोशाक खरीदने के लिए प्रति बच्चे 250 रू. वितरण किए गए।कौथवां ग्राम पंचायत के अन्तर्गत आंगनबाड़ी केन्द्र, कोड संख्या 44 में बच्चों को उबला अंडा खाने को दिया गया। अपने नन्हें हाथों से बच्चे अंडे पर की परत हटाकर चाव से खाए। यहां की सविता देवी सेविका हैं और सोना देवी सहायिका हैं। 

कौथवां ग्राम पंचायत के मुखिया रामाशीष राय की उपेक्षा के कारण 2006 से केन्द्र का भवन नहीं बन पा रहा है। यहां पर गैरमजरूआ आम भूमि है। यहां पर 40 बच्चे अध्ययनरत हैं। एक लघु कमरा में बच्चे पढ़ने को बाध्य हैं। बतौर 200 रू. किराया दिया जाता है। 8 गर्भवती और 8 दूध पिलाने वाली मां को टेक होम राशन मिलता है। इसके अलावे सात माह पूर्ण करने वाली 40 गर्भवती महिलाओं को 3 साल तक टी.एच.ए. दिया जाता है। 14 से 18 वय की किशोरियों को भी टी.एच.ए.मिलता है। 

इस केन्द्र के अन्तर्गत महादलित मुसहर समुदाय के लोग आते हैं। जो अंधविश्वास के चादर औढ़े हुए हैं। गरीबी काफी है। इन्दिरा आवास योजना से निर्मित मकान ध्वस्त हो गए है। सीएम जीतन राम मांझी के बिरादरी के लोग हैं। इन लोगों प्राथमिकता के तौर पर कल्याण और विकास करने की जरूरत है। ऐसा करने से ही समाज के मुख्यधारा से जुड़ पाएंगे। 




आलोक कुमार
बिहार 

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