भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बिहार इकाई के दो वरिष्ठ नेताओं ने रविवार को यहां स्वीकार किया कि प्रदेश में सत्तारूढ़ जनता दल (युनाइटेड), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस की नई तिकड़ी ने पार्टी के लिए बड़ी चुनौती पेश की है। पटना साहेब से लोकसभा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, "भाजपा को जद(यू), राजद और कांग्रेस की तिकड़ी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है।"
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सी.पी.ठाकुर ने भी कहा कि जद(यू), राजद और कांग्रेस का हाथ मिला लेना पार्टी के लिए चिंता की बात है। उन्होंने कहा, "हमें इस नई तिकड़ी से सावधान रहना होगा।" सिन्हा और ठाकुर ने कहा कि राजनीति में विरोधियों को कमजोर नहीं आंकना चाहिए और इस नए तालमेल को लेकर पार्टी को अपनी रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए।
दोनों ही नेताओं ने कहा कि पार्टी को बिहार में 2015 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक व्यक्ति पर भरोसा करने की जगह सामूहिक नेतृत्व के साथ आगे आना चाहिए। यह पहला मौका है जब भाजपा के नेताओं ने नए तालमेल की चुनौती को सार्वजनिक रूप से स्वीकारा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा की प्रदेश इकाई के अंदर की तकरार 10 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजे से सामने आई है। उपचुनाव में जद(यू), राजद और कांग्रेस ने मिलकर छह सीटें जीती थीं।

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