नासा के मार्स ऐटमस्फिर एंड वालटिल इवोल्यूशन (मैवेन) मिशन ने 10 माह में 44.2 करोड़ मील की दूरी तय कर आखिरकार मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश कर लिया है। यह जानकारी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (नासा) ने दी। नासा की ओर से रविवार रात कहा गया कि 33 मिनट की इंजन फायरिंग के बाद मिशन नियंत्रकों ने रात करीब 10.25 बजे पुष्टि की कि मैवेन ने मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश कर लिया है। मैवेन, मंगल ग्रह के ऊपरी वातावरण और इस ग्रह के इतिहास व जलवायु से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों की पड़ताल के लिए समर्पित पहला अंतरिक्ष यान है। ये निरीक्षण वैज्ञानिकों को यह तय करने में मदद करेंगे कि मंगल के अस्तित्व में आने से अब तक मंगल के वायुमंडल से कितनी गैस का नुकसान हुआ है और वह नुकसान किन प्रक्रियाओं से हुआ है। यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो इन बोल्डर में मैवेन के प्रमुख अन्वेक्षक ब्रूस जैकोस्की ने कहा, "हम पहला मिशन हैं जो मंगल की ऊपरी सतह की पड़ताल और यह सूर्य व सौर वायु के साथ कैसे सूचनाएं आदान-प्रदान करता है, को समर्पित है।" मैवेन को 18 नवंबर, 2013 को फ्लोरिडा के केप केनवरल से तीन साधन संकुल ले जाने के लिए लांच किया गया था।
मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश करने की प्रक्रिया के दौरान भारत का अंतरिक्ष यान-मंगलयान सोमवार को इसके गुरुत्व प्रभाव में आ गया। अंतरिक्ष यान बुधवार तड़के सूर्य की कक्षा से मंगल की कक्षा में प्रवेश कर जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "हमारे संचालकों की गणना के अनुसार हमारे मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) ने मंगल के गुरुत्व प्रभाव में सोमवार सुबह करीब नौ बजे प्रवेश कर लिया है।" इस 475 किलोग्राम भार वाले अंतरित्र यान की मदद से मंगल को लेकर पांच परीक्षण किए जाएंगे। इसे मंगल की कक्षा में प्रवेश कराने के लिए निर्धारित मार्ग में चौथा बदलाव किया गया है, जो आज दोपहर 2.30 बजे संचालित हो जाएगा। यह बदलाव इस यान को 24 सितम्बर को सूर्य की कक्षा से मंगल की कक्षा में बिना किसी बाधा के पहुंचाने के लिए किया गया है। इसरो के वैज्ञानिक सचिव वी.कोटेश्वर राव ने कहा, "हम अंतरिक्ष यान के नीचे लगे द्रवित ईंधन संचालित मुख्य इंजन को चार सेकेंड के लिए चालू करेंगे, जिससे कि यह फिर से सक्रिय हो जाएगा। यह इंजन यान के प्रक्षेपण के तुरंत बाद बंद हो गया था।"

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