किसी देश के प्रधान को अमेरिका भी आने से नही रोक सकता. आखिर नरेन्द्र मोदी पर से भी अमेरिका को पाबंदी हटानी ही पड़ी. मैं इनदिनों अमेरिका में ही हूँ और यहाँ एवं भारत दोनों जगहों के समाचारों से अवगत हूँ.नरेन्द्र मोदी की ५ दिनों का दौरा के दौरान और बाद में भी जिस तरह से मिडिया ने उनके इस दौरे का मार्केटिंग किया है और उसे लोकप्रिय बनाया यह छुपा नहीं है यह मोदी के कुशल प्रबंधन की क्षमता को दर्शाता है. प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी प्रबंधन क्षमता में निपुण तो हैं ही साथ ही मार्केटिंग में भी कुशल हैं, जो उनके ५ दिनों के अमेरिकी दौरा के दौरान देखने को मिला.
भारतीय मिडिया ने मोदी भक्तों से पैसे मिल गए थे, ताकि मोदी के विरोध वाले समाचार, कार्यक्रमों के दूसरे पहलु को न दिखाई जाए. मोदी के आने से पहले जनता में उत्साह की कहानियां भी पहले से ही तय थीं. और विरोध करने वालों के साक्षात्कार को मिडिया ने यह कहकर नहीं लिया कि वह उनकी कहानी में फिट नहीं बैठता.
न्यू यॉर्क में काफी भारतीय रहते हैं. मोदी ने तीन दिनों तक अपने कार्यों का लेखा जोखा देकर अपने कार्यों की जमकर मार्केटिंग की. अमेरिकी सरकार के साथ अच्छे सम्बन्ध की नींव जो पूर्व प्रधानमंत्री ने डाली थी उसका भरपूर लाभ उठाया. बड़े बड़े व्यापारियों ने मोदी के स्वागत में जमकर खर्च किए. मैडिसन स्क्वायर के कार्यक्रम की व्यवस्था भारतीय मूल के व्यापारियों ने की थी समाचार मिला मैडिसन स्क्वायर के सारे टिकट बिक गए पर टिकट किन लोगों ने ली थी? जाहिर है आम आदमी ने टिकट तो लिया होगा नहीं. अब यह मोदी के मार्केटिंग का असर कहें या कुशल प्रबंधन का.
हाँ मोदी के आने से कुछ प्रबुद्ध वर्ग के लोग इसलिए खुश हैं कि भारतीय वैज्ञानिकों के कुछ प्रोजेक्ट को मोदी की मंजूरी मिल गई है और उन प्रोजेकटों में भारतीय वैज्ञानिकों की भी भागीदारी होगी.
न्यूयॉर्क अमेरिका से
सुश्री कुसुम ठाकुर
प्रधान सम्पादक
आर्यावर्त
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