प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कार्यक्रम के तहत चार योजनाएं लॉन्च कीं। इन योजनाओं का मकसद देश में कार्यकुशल युवाओं की नई पीढ़ी तैयार करना है, जो सरकार के 'मेक इन इंडिया' के सपने को साकार कर सके। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री ने श्रम सुविधा पोर्टल, कंपनियों के लिए यूनिफाइड लेबर इन्सपेक्शन स्कीम और भविष्य निधि (पीएफ) जमा करने वाले कर्मचारियों के लिए एक समान अकाउंट (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) योजना की शुरुआत की।
इन योजनाओं की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जितनी ताकत सत्यमेव जयते की है, उतनी ही ताकत श्रमेव जयते की है। उन्होंने कहा, 'गरीबों के पास 27 हजार करोड़ रुपये पीएफ में पड़े हैं। यह गरीब कर्मचारियों की मेहनत का पैसा है और मुझे इसे उन्हें वापस लौटाना है।' छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें फॉर्म के झंझट से मुक्ति मिलेगी, अब 16 की जगह एक फॉर्म भरने होंगे और यह काम ऑनलाइन किया जा सकेगा। पीएम ने कहा, ' 2020 तक दुनिया में करोड़ों कामगारों की जरूरत होगी। हमें श्रम को देखने का नजरिया बदलना चाहिए। आईटीआई वालों को हीन भावना से देखा जाता है,यह सही नहीं है।'
पहली स्कीम के तहत देश के साढ़े ग्यारह हजार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आइटीआई) में ट्रेनिंग ले रहे लगभग सोलह लाख छात्रों को पीएम की ओर से एसएमएस भेजकर उनका उत्साह बढ़ाया गया। एसएमएस में प्रधानमंत्री इन छात्रों को विशिष्ट बताते हुए उन्हें स्किल डिवलेपमेंट का ब्रैंड ऐंबैसडर बनने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पिछले सालों में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने वाले आईटीआई से पास चुनिंदा व्यक्तियों की उपलब्धियों से संबंधित पुस्तिका का विमोचन किया।
दूसरी योजना भविष्य निधि ग्राहकों के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) लॉन्च किए जाने की है। यूएएन के जरिए प्रत्येक ग्राहक अपने पीएफ खाते की ऑनलाइन जानकारी प्राप्त करने के साथ ही साथ पीएफ निकालने के लिए आनलाइन आवेदन भी कर सकेगा। उन्हें अपने एंप्लॉयर से आवेदन फॉरवर्ड कराने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। नौकरी बदलने के बाद भी कर्मचारी का यूएएन नंबर वही रहेगा। उसे केवल नए एंप्लॉयर के पास अपना यूएएन दर्ज कराना होगा। ईपीएफओ अब तक लगभग 4.17 करोड़ ईपीएफ ग्राहकों के यूएएन तैयार कर चुका है, जो 15 अक्टूबर से ऑपरेशनल हो गए।
तीसरी स्कीम का संबंध श्रम सुधारों से है। इसके तहत श्रम मंत्रालय द्वारा तैयार एकीकृत श्रम पोर्टल और यूनिफाइड लेबर इन्सपेक्शन स्कीम की शुरुआत हुई। आगे चल कर यूनिक लेबर आइडेंटिफिकेशन नंबर (एलआईएन) के जरिए प्रत्येक औद्योगिक इकाई का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन संभव होगा। वे आसानी से अपना एकल रिटर्न दाखिल कर सकेंगी। लेबर इंस्पेक्टर भी इस पर अपनी निरीक्षण रिपोर्ट अपलोड कर शिकायतों का त्वरित समाधान कर सकेंगे। जल्द ही 6-7 लाख इकाइयों को एलआइएन जारी किए जाने की संभावना है।
चौथी और अंतिम स्कीम स्किल डिवलेपमेंट अप्रेंटिसशिप से ताल्लुक रखती है। इस समय देश में उद्यमिता प्रशिक्षण के लिए 4.9 लाख सीटें उपलब्ध हैं। इसके बावजूद महज 2.82 लाख अप्रेंटिस ही प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है। इसके लिए अप्रेंटिस प्रोत्साहन योजना शुरू की गई है। योजना के तहत प्रशिक्षुओं का स्टाइपेंड (मानदेय) बढ़ाने के साथ-साथ सिलेबस में भी बदलाव होगा। इससे मार्च, 2017 तक एक लाख प्रशिक्षुओं को फायदा मिलने की उम्मीद है। अगले कुछ वर्षो में प्रशिक्षु सीटों की संख्या बढ़कर 20 लाख होने की संभावना है।

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