नेताजी के सहयोगी कैप्टन अब्बास अली का निधन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

नेताजी के सहयोगी कैप्टन अब्बास अली का निधन

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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के सहयोगी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कैप्टन अब्बास अली का आज दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैप्टन अली के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अली ने समाजवादी विचारधारा को भी मजबूत करने के लिये महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

अली के परिवार के सूत्रों के मुताबिक सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज (आईएनए) के जंगजू रहे इस वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी ने अलीगढ़ के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली। उनके परिवार में उनके बेटे पत्रकार कुरबान अली और दो बेटियां हैं। अली को किला रोड स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके अली वर्ष 1939 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भर्ती हुए थे। लेकिन, जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सशस्त्र क्रांति का बिगुल फूंका तो वह अंग्रेजी सेना की नौकरी छोड़कर आईएनए में शामिल हो गए। अंग्रेजी शासन में अली को मौत की सजा सुनायी गई थी। लेकिन, उस पर अमल से पहले ही मुल्क आजाद हो गया और उन्हें रिहा कर दिया गया। अली राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेन्द्र देव और जय प्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं से प्रभावित होकर राजनीति में आ गए थे। वर्ष 1966 में उन्हें संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का राज्य महासचिव भी बनाया गया था।

देश में आपातकाल के दौरान इसका विरोध करने पर अली को जेल में भी डाल दिया गया था। बाद में वह राज्य विधान परिषद के सदस्य और जनता पार्टी के प्रान्तीय अध्यक्ष भी बने। अली ने गत 15 अगस्त को अपने आखिरी सार्वजनिक कार्यक्रम में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवित होने या नहीं होने को लेकर बने रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाने की टीस जाहिर की थी।

इस बीच, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अली के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि इस स्वतंत्रता सेनानी ने आजाद हिन्द फौज के माध्यम से देश को स्वतंत्र कराने के लिए जो संघर्ष किया उसे भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि समाजवाद के प्रतीक राम मनोहर लोहिया के करीबी रहे कैप्टन अब्बास अली ने समाजवादी विचारधारा को मजबूत बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

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