नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर के वित्तीय समावेश के लिए 14 अक्टूबर को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 5 अक्टूबर 2014

नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर के वित्तीय समावेश के लिए 14 अक्टूबर को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन

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नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर के समुचित वित्तीय समावेश को लेकर एक्शन कमेटी फॉर फॉर्मल फाइनेंस फॉर नॉन कॉर्पोरेट स्माल बिज़नेस ने आगामी 14 अक्टूबर को नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया है जिसमें इस सेक्टर से जुड़े व्यापारी, ट्रांसपोर्ट, ट्रक ऑपरेटर, लघु उद्योग, हॉकर्स, स्वयं उद्यमी, महिला उद्यमी, किसान और अन्य वर्गों के राष्ट्रीय संगठनों के विभिन्न राज्यों के लगभग 500 नेता भाग लेंगे ! सम्मेलन में नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए वित्तीय ढांचे के स्वरुप और उसकी आवश्यकता पर चर्चा होगी जिसे बाद में एक रिपोर्ट की शक्ल में प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री सहित सभी राज्यों के मुख्य मंत्रियों को दी जाएगी !

केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा इस वर्ष के बजट में नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक वित्तीय ढांचा बनाने की घोषणा की गयी थी जिसके अनुरूप हाल ही में वित्त मंत्रालय ने श्री के.वी.कामथ की अध्यक्षता में एक कमेटी भी गठित  की है जो इस मुद्दे पर तीन महीने में सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी !

एक्शन कमेटी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर श्री प्रवीन खण्डेलवाल ने कहा की यह राष्ट्रीय सम्मिलन इसलिए महत्वपूर्ण है की पहली बार नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर के सभी वर्गों ने  पहली बार एक मंच पर आकर अपने लिए एक वित्तीय ढांचा बनवाने का संक्लप लिया है! उन्होंने ने कहा की अब तक की सरकारों ने सदा नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर की उपेक्षा ही की है जबकि इस सेक्टर ने जीडीपी, रोजगार, निर्यात और मैन्युफैक्चरिंग सभी क्षेत्रों में कॉर्पोरेट सेक्टर से कहीं ज्यादा योगदान दिया है लेकिन इसके बावजूद इस सेक्टर के केवल 4  प्रतिशत लोगों को ही बैंकों से क़र्ज़ मिल पाया है और इस सेक्टर की वित्तीय आवश्कताओं के अब तक अनदेखी ही की गयी है !

छोटे व्यापार के लिए वित्त -अर्थव्यवस्था की प्रगति का मूल के स्लोगन के साथ 14 अक्टूबर को होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन में नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए वित्तीय ढांचे की आवशयकता के विभिन पहलुओं पर विचार होगा जिसमें मुख्य रूप से नॉन कॉर्पोरेट छोटे व्यापार की महत्वत्ता, इस सेक्टर के लिए वित्तीय ढांचे की प्रासंगिकता, नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर की वित्तीय जरूरतों के अनुभव, किस प्रकार का वित्तीय ढांचा बने आदि पर विभिन प्रमुख अर्थ विशेषज्ञ बातचीत करेंगे ! सम्मेलन इस मुद्दे पर एक राष्ट्रीय प्रचार अभियान चलाये जाने का रोडमैप भी तैयार करेगा ! एक्शन कमेटी ने लघु,माध्यम एवं सूक्षम मंत्री श्री कलराज मिश्रा, वाणिज्य राज्य मंत्री श्रीमती निर्मल सीतारमण एवं वरिष्ठ भाजपा नेता तथा आर्थिक चिंतक डॉ. मुरली मनोहर जोशी को सम्मेलन में भाग लेने के आमंत्रित किया है !

नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर को अर्थव्यवस्था की रीड की हड्डी कहा जाता है जो प्रतिवर्ष 6 .28 लाख करोड़ रुपये का वैल्यू एडिशन करता है ! इस सेक्टर में लगभग 5 .77 करोड़ वाणिज्यिक प्रतिष्ठान कार्यरत है जो लगभग 46 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं जिसमें से 24 करोड़ लोग स्वयं उद्यमी हैं ! इस सेक्टर में काम करने वाले लगभग 61 प्रतिशत लोग पिछड़े वर्ग के हैं !

श्री खण्डेलवाल ने कहा की इस सेक्टर के लगभग 90 प्रतिशत लोगों को बैंकों अथवा बैंकिंग संस्थानों से क़र्ज़ ही नहीं मिल पाता है ! बैंक इस सेक्टर को क़र्ज़ देने में बेहद काम रुचि रखते हैं और क़र्ज़ लेने की बैंकिंग प्रक्रिया इतनी जटिल है की आम उद्यमी उसको पूरा कर पाने असमर्थ रहता है ! उन्होंने ने सुझाव दिया है की इस सबको देखते हुए इस सेक्टर के लिए अलग से स्माल बैंकिंग फाइनेंस कंपनी अथवा संस्थान गठित किया जाएँ जो आसान शर्तों और बेहद कम कागज़ी कार्यवाही पर इस सेक्टर के लोगों को क़र्ज़ मुहैय्या कराये !

एक्शन कमेटी इस मुद्दे पर एक श्वेत पत्र तैयार कर रही है जिसे प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, वाणिज्य मंत्री, लघु,माध्यम एवं सूक्षम मंत्री, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री, विभिन राजनैतिक दलों के शीर्ष नेताओं और रिज़र्व बैंक के गवर्नर सहित संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को दिया जाएगा !

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