विशेष आलेख : आधुनिकता से लैस होगा कारपेट इंडस्ट्री - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

विशेष आलेख : आधुनिकता से लैस होगा कारपेट इंडस्ट्री

  • प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर इंडस्ट्री में चार चांद लगाने की तैयारी शुरु 
  • वाराणसी में आयोजित चार दिवसीय इंडिया कारपेट एक्स्पो मेले में वस्त्र मंत्रलय (भारत सरकार) के सचिव डा. संजय कुमार पाण्डा ने दिए संकेत 
  • शीघ्र ही वाराणसी में ट्रेड फैसिलिटी सेंटर खुलेगा, मेले में 56 देशों के विदेशी ग्राहकों ने की शिरकत 
  • सीईपीसी ने की तकरीबन 400 करोड़ के कारोबार होने का दावा 

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका कारपेट इंडस्ट्री को अब दुनिया के हर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने की तैयारी है। यह सब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत होगा। प्रधानमंत्री के ही पहल पर इसे अंतिम रुप दिया जा रहा है। इसके संकेत वस्त्र मंत्रलय (भारत सरकार) के सचिव डा. संजय कुमार पाण्डा ने वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय प्रांगण में कालीन निर्यात संवर्धन परिषद की ओर से चार दिवसीय आयोजित मेला ‘इंडिया कार्पेट एक्सपो-2014’ के उद्घाटनोंपरांत दी। कहा, कारपेट इंडस्ट्री को स्पीड, स्कील और स्केल (थ्री एस) की तर्ज पर विकसित करने की पहल शुरु हो गयी है। शीघ्र ही इसे अमली-जामा पहनाया जायेगा। इसके लिए नेशनल मैन्युफैक्चरिंग काउंसिन बनाई गयी है, जो इंडस्ट्री को नयी-नयी आधुनिक तकनीकी से जोड़ने के साथ ही अधिक से अधिक उत्पादन और इक्सपोर्ट वृद्धि का काम करेगी। यह काउंसिल निर्यातक व बुनकरों के बीच मौजूद होकर उनकी हर जरुरत व खामियों को समझ कर न सिर्फ दूर होगी करेगी बल्कि उसी के तहत इंडस्ट्री का विकास भी करेगी। 

मेले में मौजूद कालीन निर्यातकों-निर्माताओं व विदेशी खरीदारों के बीच श्री पांडा ने कहा कि कालीन निर्यात बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खास जोर है। वाराणसी में लगा कालीन का यह महामेला लगातार 10 साल से इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। वाराणसी में ट्रेड फैसिलिटी सेंटर खोलने की काफी अर्से से मांग की जा रही है। इस बाबत जमीन की तलाश की जा रही है, उम्मीद है कि जल्द ही बनारस को ट्रेड सेंटर मिल जाएगा। इसके अलावा बुनकरों के लिए पांच हजार से अधिक ट्रेनिंग सेंटर खोले जायेंगे, ताकि उनका स्कील डेवलपमेंट हो सके। इसके बाद इस इंडस्ट्री को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जायेगा, जिससे उत्पादन में वृद्धि की जा सके। और जब उत्पादन बढ़ेगा तो निर्यात की भी संभावना बढ़ेगी, इसके लिए बड़े पैमाने पर न सिर्फ बाॅयर-निर्यातक मीट आयोजन के लिए बढ़ावा दिया जायेगा बल्कि कस्टमर की जरुरत और उनके हिसाब से सुविधाएं भी मुहैया कराया जायेगा। निर्यातकों की समस्याओं को दूर करने के साथ इक्सपोर्ट पाॅलिसी में बदलाव कर न सिर्फ लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया जायेगा बल्कि ड्रा बैक ड्यूटी को भी बढ़ाने के साथ ही कर संबंधित संकटों को भी दूर जायेगा। इंडस्ट्री में ऐसी नीति बनेगा कि बुनकरों का उत्पीड़न किसी भी दशा में न हो पाएं और उन्हें वाजिब मेहनताना भी मिल सकेगा। इसके अलावा निर्यातकों को ई-मार्केटिंग की सुविधा भी बढ़ाई जायेगी। कालीन निर्यात से मिलने वाले यूएस डॉलर में हर वर्ष वृद्धि हो रही है। आंकड़े बताते है कि वर्ष 2012-13 में जहां 1.08 मिलियन यूएस डॉलर की प्राप्ति हुई, वहीं वर्ष 2013-14 में 1.17 मिलियन यूएस डॉलर जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 1.26 मिलियन यूएस डॉलर पाने का लक्ष्य रखा गया है। 

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वैसे भी 283 से अधिक निर्यातकों के लगे स्टालों पर कालीन की खूबसूरती देख 157 देशों के 400 से अधिक विदेशी ग्राहकों व उनके प्रतिनिधि निहाल हो गए, उनकी आंखें चमक उठी। सीईपीसी का दावा है कि इस चार दिवसीय मेले में तकरीबन 400 करोड़ के कारोबार होना पक्का है। कालीनों के बारे में पूछताछ के अलावा टैबलेट, मोबाइल आदि की सुविधा हो जाने से आयातक या उनके प्रतिनिधि स्टाॅल से ही कालीनों की फोटो भेजकर पसंद ना पसंद करा रहे है और आर्डर भी तत्काल बुकिंग कर रहे है। डा. संजय कुमार पाण्डा ने फेयर डायरेक्ट्री का विमोचन करने के बाद विभिन्न स्टालों पर प्रदर्शित कालीनों को देखा, और मीडिया से भी मुखातिब हुए। मेले में जहां महंगी, सस्ती, परंपरागत व आधुनिक डिजाइनर कालीनों के स्टाल पर देशी-विदेशी क्रेताओं की भीड़ रही वहीं रंगों के कोड स्टाल पर भी लोग जमे रहे। कार्पेट एक्सपो में नई दिल्ली के स्टाल पर सिल्कॉन सिल्क की तीस लाख कीमत वाली कालीन आकर्षण का केंद्र रही। इसमें बीस रंगों का प्रयोग है। इसकी डिमांड अमेरिका, जर्मनी आदि में ज्यादा है। 18 बाइ 20 फीट साइज की इस कालीन को दो कारीगरो ने चार साल में पूरा किया। इसका ताना-बाना दोनों में सिल्क का प्रयोग किया गया है। एक इंच में 676 गांठे हैं। विदेशी ग्राहकों व उनके प्रतिनिधियों की कालीन संबंधी पूछताछ से कालीन निर्माताओं व निर्यातकों के चेहरे खिले हुए थे। इस मौके पर वित्त मंत्रलय (भारत सरकार) ड्राबैक कमेटी के चेयरमैन डा. सुमित्रो चैधरी, कमेटी के सदस्य जीके पिल्लई, परिषद के चेयरमैन कुलदीप राज वाटल, पूर्व चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिवकुमार गुप्त, लगातार छठी बार सदस्य चुने गए उमेश कुमार गुप्ता मुन्ना, वीके सिन्हा,  इस्तियाक खान, भरत मौर्या, ओंकारनाथ मिश्र बच्चा आदि मौजूद थे। 





(सुरेश गांधी)

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