नरकटियागंज (बिहार) की खबर (15 अक्टूबर) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 16 अक्टूबर 2014

नरकटियागंज (बिहार) की खबर (15 अक्टूबर)

हुद हुद की चपेट में पेड़ गिरा, मुख्य पथ पर गिरा पेंड़ और परेशान हाल यात्री

narkatiaganj news
नरकटियागंज(पच) हुद हुद की चपेट में आया नरकटियागंज अनुमण्डल, तेज हवा से नरकटियागंजं-बेतिया मुख्य पथ गिरा वृक्ष बाल बाल बचे यात्री। मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार की अपराहन् हुद-हुद के कारण चल रही तेज हवा की चपेट में सड़क के किनारे लगा युकेलिप्टस का पेंड़ अचानक सड़क पर आ गिरा। जिससे रूक्मिनी देवी नामक 65 वर्षीया महिला बाल-बाल बची गयी। जबकि उनके पीछे सहोदरा के लालमन राम, नरकटियागंज के राहुल कुमार समेत अन्य अचानक रूक गये। उपर्युक्त महिला को तेज वर्षा और हवा के बावजूद लोगों ने उठा कर गिरे हुए पेड़ के पार कराया। तत्पश्चात नरकटियागंज अनुमण्डल पदाधिकारी कौशल कुमार को सूचना दी गयी। पेड़ के रास्ता पर गिरे होने के कारण उक्त पथ पर आवागमन की समस्या घंटो बनी रही। रास्ते से आने वाले वाहन अपने रूट बदल कर चले। एक तेज वर्षा उसपर तूफानी हवा और सड़क पर गिरा पेड़ यात्रीयों को सिहरन देने को पर्याप्त रहा। 

कुपोषण मुक्त बिहार के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं ने निकाली रैली

नरकटियागंज(पच) कुपोषण मुक्त बिहार के लिए नरकटियागंज प्रखण्ड अन्तर्गत की आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा अपने-अपने पोषक क्षेत्र में एक रैली निकाली गयी। जिसमें पोषक क्षेत्र के लोगो को स्वच्छता, सफाई और नियमित संतुलित आहार लेकर जीवन को सुरक्षित करने संबंधीत जानकारी दी गयी। कुपोषण के रोकथाम और उससे बचाव की जानकारी सेविकाओं ने क्षेत्र के लोगों को दिया। आंगनबाड़ी सेविकाओं ने बताया कि कुपोषण से बचाव के लिए माँ का दूध सर्वोत्तम है। इसलिए कम से कम छव माह तक बच्चों को माँ का दूध पिलाएँ और आंगनबाड़ी केन्द्र पर लाकर उन्हें सुरक्षित करने के लिए नियमित टीकाकरण कराएँ। बच्चो को स्वच्छ जल पिलाने और बाजार से स्वच्छ वस्तुओं की खरीद कर देने से स्वच्छ बिहार के साथ स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण संभव है। इस कार्यक्रम के दौरान शिवगंज दक्षिण भाग केन्द्र संख्या 175, कोड़ार केन्द्र संख्या 171 और उत्तरी देवी स्थान केन्द्र संख्या 169 की सेविका-सहायिका और पोषक क्षेत्र की किशोरी व लाभुक नजर आए।

डीजल अनुदान के लिए किसान कहाँ से लाएँ फर्जी वाउचर सरकारी नीति गलत 

नरकटियागंज(पच) सरकार की कृषि नीति और उसे लागू कराने वाले अधिकारियों की अदूरदर्शिता के कारण वास्तव में किसान परेशान होते दिख रहे है। उसकी एक एक बानगी यह कि नरकटियागंज प्रखण्ड के बिनवलिया निवासी किसान ललन सिंह का आवेदन है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के नाम का आवेदन स्पष्ट करता है कि वैसे किसान जिन्होंेने पम्पसेट भाड़ा पर लेकर खेत में पानी पटाया तो वे पेट्राॅल पम्प से डीजल के खरीद का वाउचर (बिल) कहाँ से लाएँगे। ललन सिंह बताते है कि डीजल अनुदान के लिए मांगे गये आवेदन में किसानों से खरीदे गये डीजल का बिल संलग्न करना है। उन्हांेने अधिकारी से पूछा है कि ऐसे में वे रसीद कहाँ से लाए, क्योंकि वे फर्जी वाउचर लगाकर नहीं देना चाहते है। उन्होंने आवदेन में स्पष्ट किया है कि सात खाता खेसरा के अन्तर्गत करीब 5 एकड़ 9 डिस्मील भूमि पर खेती  किये हुए है। ललन सिंह ने अपने आवेदन में लिखा है कि गन्ना की खेती की पैमाईश पुस्तिका न्यू स्वदेशी सुगर मिल्स नरकटियागंज के पास उपलब्ध है। अधिकारी खेती सम्बन्धित मेरे दिये गये आंकड़ों की जाँच करा कर मुझे डीजल अनुदान की राशि उपलब्ध कराए।

बिहार व केन्द्र सरकार कर्मचारी विरोधी, कर्मचारी हितों की न करे अनदेखीः दिलीप 

नरकटियागंज (अवधेश कुमार शर्मा) बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ त्रिपाठी गुट के प्रांतीय अधिवेशन से लौट कर संयुक्त सचिव दिलीप कुमार ने एक वार्ता के दौरान बताया कि महासंघ का 17 वाँ दो दिवसीय प्रदेश अधिवेशन गया में विगत दिनो सम्पन्न हुआ। जिसमें बिहार व झारखण्ड के संयुक्त महासंघ के संस्थापक महामंत्री गोपाल प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकारे कर्मचारियों की हितैषि नहीं है। श्री कुमार ने कहा कि संस्थापक महामंत्री के अनुसार एक बार के लिए विधायक बनने वाले जनप्रतिनिधियों को आजीवन पेंशन व भत्ता मिलता है, भले ही वे एक दिन भी काम नहीं करे। केन्द्र के कर्मियांे को 2004 से एवं राज्यकर्मियों को पहली सितम्बर 2005 से पेंशन लाभ से वंचित कर दिया गया है जबकि वे पूरी नौकरी समाप्त कर उसके हकदार बनते है। उल्लेखनीय है कि महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत से अधिक होने पर मूल वेतन में जोड़ कर पेंशन व अन्य लाभ दिये जाने का प्रावधान है किन्तुं केन्द्र की मोदी सरकार ने जुलाई 2014 के प्रभाव से मात्र सात प्रतिशत महंगाई भत्ता की स्वीकृति प्रदान की है जो अब कुल 107 प्रतिशत हो गया। बावजूद इसके मूल वेतन में उसे नहीं जोड़ा गया जिससे केन्द्र व राज्य के कर्मियों को आर्थिक क्षति हो रही है। गया के प्रदेश अधिवेशन में प्रस्ताव पारति कर महासंघ ने जो मांग किया है उनमें मुख्य रूप से 2004-05 के प्रभाव से सरकार द्वारा लागू पंेशन योजना को समाप्त करने, 50 प्रतिशत महंगाई भत्ता को मूल वेतन में जोड़ने, सातवे वेतन आयोग के प्रतिवेदन प्राप्ति तक 5000 रूपये प्रतिमाह अंतरीम सहायता देने, संविदा पर नियुक्ति को बंद करने, नियुंक्त कर्मियों को नियमित करने, सरकारी कर्मियों की सेवानिवृति की आयु 65 वर्ष करने, संघ व महासंघ के पदधारको के स्थानान्तरण पर रोक लगाने और चतुर्वर्गीय कर्मियों को तृतीय वर्ग मंे प्रोन्नती के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना है।

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