उपाध्याय पुष्कर मुनि की 105 वीं जन्म जयन्ती पर हुई गुणानुवाद सभा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 12 अक्टूबर 2014

उपाध्याय पुष्कर मुनि की 105 वीं जन्म जयन्ती पर हुई गुणानुवाद सभा

  • नवकार मंत्र के आराधक थे पुष्कर मुनि: सौभाग्य मुनि

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उदयपुर 12 अक्टूबर। साधना के शिखर पुरूष उपाध्याय पुष्कर मुनि को आज भी नवकार मंत्र के आराधक तथा निर्मल,शुद्ध एवं वात्सल्य भावों से ओत-प्रोत साधक के रूप में याद किया जाता है। उनके जीवन की गहराई को नापना मुश्किल कार्य है। उन्होंने अपने जीवन में कहीं अग्रता एवं उत्ताप को स्थान नहीं दिया और यहीं कारण है कि वे आज भी मानवता के मसीहा के रूप में याद किये जाते हैं। उक्त विचार श्री वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ द्वारा पंचायती नोहरे में श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि,महाश्रमण प्रवर्तक मदन मुनि महाराज आदि ठाणा तथा महासती के सानिध्य में उपाध्याय पुष्कर मुनि की 105 वीं जयन्ती के अवसर पर आयोजित जप,तप,गुणानुवाद सभा में ऊभर कर सामने आयें। सौभाग्य मुनि महाराज ने कहा कि पुष्कर मुनि का जीवन समुद्र की भंाति था। गहरे सरोवर में डूबकी लगाने पर ही जिस प्रकार मोती मिलते है ठीक उसी प्रकार पुष्करमुनि के जीवन में डूबकी लगाकर ज्ञान रूपी मोती प्राप्त कर सकते है। संतो का जीवन सागर की तरह गहरा एंव गंभीर होता है। उनसे मिलने वाले मोती से अपने जीवन का श्रृंगार कर सकते है। उन्होंने कहा कि अनेक व्यक्ति अर्थ, भोग एवं यश परक तो बुद्धिजन व्यक्ति धर्मपरक होते है। धर्मपरक व्यक्तियों के व्यवहार में व्यावहारिकता दिखाई देती है। अध्यात्म परक व्यक्ति की वाणी से फूल खिलते है। इस अवसर पर महाश्रमण प्रवर्तक मदन मुनि महाराज ने कहा कि पुष्कर मुनि ज्योतिपुंज के समान  थे। उनके आचरण को यदि हम अपने जीवन में उतारेंगे तो उनकी जयन्ती मनाना सार्थक होगा। इस अवसर पर उपस्थित जिला प्रमुख मधु मेहता ने कहा कि उपाध्याय पुष्कर मुनि प्रत्येक मानव जीवन के ह्दय में विराजमान थे। अंहिसा, सत्य व मैत्री के पूजक थे। उदयपुर नगर निगम महापौर रजनी डांगी ने कहा कि संतो का जीवन करने से गुणगान करने से जीवन में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। संतो की सच्ची साधना की प्रवृत्ति से हम लाभान्वित होते है और उन्हीं के आशीर्वाद से जैनत्व गुणों का प्रभाव दिखाई देता है।     

इन्होनें भी सभा को किया संबोधित - 
पुष्करवाणी गु्रप ने बताया कि गुणानुवाद सभा को महासती विनयप्रभा आदि ठाणा, संघ के अध्यक्ष वीरेन्द्र डंागी, मानसिंह रांका, ओंकारसिंह सिरोया, कन्हैयालाल मेहता, शंकरलाल डांगी, संजय भण्डारी, रमेश खोखावत, नरेन्द्र सेठिया, अंबालाल नवलखा, श्यामलाल झगड़ावत, नरेन्द्र डांगी,हिम्मत कोठीफोड़ा, दिनेश सेठिया, हिम्मतसिंह बड़ाला, ममता रांका, सुनन्दा बापना ने भी संबोधित किया। 

पुष्कर पावन धाम पर हुआ महाजाप -
उपाध्याय पुष्कर मुनि के स्मृति स्थल श्री तारक गुरु जैन ग्रन्थालय परिसर स्थित ‘‘गुरु पुष्कर पावन धाम’’ पर रात्रि को महाजाप श्रद्वालुजनों द्वारा सामूहिक रुप से नवकार महामंत्र स्तृति द्वारा संपन्न किया गया।

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