किसानों को मिलेंगा साॅयल हेल्थ कार्ड: रावत
- मुख्यमंत्री ने किया किसान भवन का लोकार्पण
देहरादून,14 अक्टूवर,(निस)। प्रत्येक किसान को साॅयल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराये जायेंगे। प्रदेश में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए खेती पर फोकस किया जाना जरूरी है, इसके लिए नये क्षेत्र चिन्हित किये जाय। रूद्रपुर में टर्मिनल मार्केट विकसित किया जायेगा। बेमौसमी सब्जी के क्षेत्र में और अधिक विस्तार करने की आवश्यकता है। प्रदेश में जड़ी बूटी के कलस्टर तैयार किये जायेंगे। यह बात मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को रिंग रोड़ मसूरी बाईपास जोगीवाला में वीर शिरोमणि माधो सिंह भण्डारी ‘‘किसान भवन’’ के लोकार्पण कार्यक्रम के अवसर पर कही। इससे पहले मुख्यमंत्री श्री रावत ने 12 करोड़ रुपये की लागत से बने किसान भवन का विधिवत लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि हमें परंपरागत खेती को बचाना होगा। आज हमारे सामने खेती को बचाना एक चुनौती है। खेती से ही किसानों का अस्तित्व बना हुआ है। किसानों को हर संभव सुविधा उपलब्ध हो, इसके लिए सरकार वचनबद्ध है। किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार किसान के द्वार पर जायेगी। पर्वतीय खेती को बचाये रखना ज्यादा जरूरी है। आज तकनीक तेजी से विकसित हो रही है। ऐसी तकनीक से हम अपने यहां उपलब्ध संसाधनों का कैसे बेहतर उपयोग कर सकते है, इस पर भी हमे मंथन करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक किसान को साॅयल हेल्थ कार्ड उपलब्ध करा दिये जाय। आवश्यकता हुई तो मोबाइल साॅयल टेस्ट भी शुरू की जायेगी। कृषि विभाग के ढांचे को मजबूत किया जायेगा, कर्मचारियों के कैडर संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि मंडी को और अधिक मजबूत किया जायेगा। अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जायेगा। ताकि किसानों को अपने उत्पाद की बिक्री में अधिक से अधिक सुविधा मिल सके। रूद्रपुर में टर्मिनल मार्केट बनाया जायेगा। प्रदेश में चकबंदी व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा। इसके लिए इसे एक माॅडल के रूप में विकसित किया जाना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान भवन का नामकरण वीर शिरोमणि माधो सिंह भण्डारी के नाम पर किया गया है, जोकि सराहनीय है। उन्होंने कहा कि वीर माधो सिंह जी हमें आज भी प्रेरणा देते है। हमे उनसे प्रेरणा लेते हुए जल संरक्षण के क्षेत्र में भी कार्य करना होगा। राज्य सरकार ने हमारा पेड़ हमारा धन योजना शुरू की है, जिसके तहत चारा पत्ती वाले पेड़ लगाने पर बोनस देने का निर्णय लिया गया है। इसी प्रकार यदि कोई जल संरक्षण की दिशा में काम करता है, तो उसके लिए भी बोनस देने पर विचार किया जा सकता है। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कृषि मंत्री डाॅ. हरक सिंह रावत ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक क्षण है। किसान भवन बनने से किसानों को एक ही छत के नीचे विभिन्न सुविधाएं मिल सकेगी। किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जायेगा, साथ ही 100 किसानों के रहने की व्यवस्था भी इस भवन में की गई है। हमारा उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकना और युवाओं को रोजगार देना है। खेती को मजबूत करना है, ताकि उत्तराखण्ड की अर्थ व्यवस्था मजबूत हो। किसानों की सुविधा के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की गई है। इसके साथ ही सरकार द्वारा सरकार किसान के द्वार महोत्सव शुरू करने जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि न्याय पंचायत स्तर पर किसानों को हर प्रकार की सुविधा मिल सके, इसके लिए आउटसोर्स पर कार्मिकों की तैनाती की जायेगी। कार्यक्रम में सीड सर्टिफिकेशन के अध्यक्ष तिलक राज बेहड़, विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, संजय चोपड़ा सहित विभिन्न जनपदों से कृषक उपस्थित थे।
खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे ताईवान व उŸाराखण्ड
देहरादून,14 अक्टूवर,(निस)। ताईवान व उŸाराखण्ड खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। साथ ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कल्चरल व एजुकेशनल एक्सचेंज भी किया जाएगा। सचिवालय में ताईपे इकोनाॅमिक एंड कल्चर सेंटर के प्रतिनिधिमण्डल ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से भेंट की। सीएम ने प्रतिनिधिमण्डल के साथ विस्तृत विचार विमर्श करते हुए राज्य सरकार के विजन को साझा किया। तय किया गया कि उŸाराखण्ड के कुमायूं विश्वविद्यालय व ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय के साथ ताईवान द्वारा उच्च शिक्षा में सम्मिलित रूप से काम किया जाएगा और एक दूसरे के अनुभवों का लाभ उठाया जाएगा। इसके तहत दोनों तरफ के छात्र-छात्राएं एक दूसरे के यहां जाकर लाभान्वित हो सकेगे। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमण्डल का उŸाराखण्ड आने पर स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश के विकास के लिए तकनीकी व पूंजीगत निवेश आवश्यक है। प्रतिनिधिमण्डल की अध्यक्षता कर रहे ताईवान के राजदूत चुंग-क्वांग तिएन ने कहा कि ताईवान व उŸाराखण्ड के बीच बिजनेस रिलेशनशिप विकसित किए जाने की बहुत सम्भावनाएं हैं। विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण में काम किया जा सकता है। ताईवान उŸाराखण्ड में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास में तकनीकी सहायता प्रदान कर सकता है। साथ ही यहां के राॅ मेटेरियल का उपयोग ताईवान के फूड प्रोसेसिंग इकाईयों में किया जा सकता है। इलेक्ट्रोनिक्स में भी ताईवान व उŸाराखण्ड द्वारा सम्मिलित रूप से काम किया जा सकता है। श्री तिएन ने मुख्यमंत्री को ताईवान आने के लिए भी आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उपर्युक्त क्षेत्रों के अलावा किन-किन क्षेत्रों में काम किया जा सकता है, इसका भी अध्ययन किया जाएगा। इस अवसर पर प्रमुख सचिव ओमप्रकाश व प्रतिनिधिमण्डल के सदस्य के तौर पर ईसाबेल लो, जेम्स चांग, यिता चेन, डेरेक वू के अलावा ग्राफीक ऐरा विवि के वाईस चांसलर प्रो.वीके तिवारी, प्रो.वाईपी कुमार व प्रदीप नागरथ उपस्थित थे।
स्थानीय उद्यमियों को दें मिनी हाईड्रो पावर के विकास में प्राथमिकता: सीएम
देहरादून,14 अक्टूवर,(निस)। माइक्रो व मिनी हाईड्रो पावर के विकास में ग्राम पंचायतों व स्थानीय उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी। मंगलवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में माइक्रो व मिनी हाईड्रो पावर के विकास के लिए नीति पर विस्तार से विचार विमर्श किया गया। बैठक में राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ ही ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठानों, सीआईआई, पीएचडी चेम्बर व उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व अनुभवों को साझा किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय ग्राम पंचायतों की सहभागिता व पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। जलविद्युत के साथ ही पाईन निडल से ऊर्जा व सौर ऊर्जा को भी इस नीति में शामिल किया जाएगा। इस तरह का मेकेनिज्म तैयार किया जाएगा कि इस क्षेत्र में निवेशकों को अपनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए जगह-जगह ना जाना पड़े और अनावश्यक विलम्ब से बचा जा सके। सिंगल विंडो सिस्टम या आॅन लाईन प्रोसेसिंग को लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बिजली उत्पादन के साथ ही ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाना भी है। अभी एक खाका सामने रखा जा रहा है। इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के साथ विचार विमर्श के बाद नीति को अंतिम रूप से लागू किया जाएगा। पाॅलिसी मेकिंग के साथ ही इम्प्लीमेंटेसन के पार्ट पर भी पूरा ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए निवेशकों की स्टेंडिंग कमेटी, शासन स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाईपावर कमेटी व स्वयं मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में माॅनिटरिंग कमेटी गठित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित नीति के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 2 मेगावाट तक की माइक्रो हाईडिल परियोजनाएं स्थानीय ग्राम पंचायतों के लिए आरक्षित की जाएंगी। प्राथमिकता उस ग्राम पंचायत को दी जाएगी जिसके क्षेत्र में परियोजना प्रस्तावित है। केंद्र सरकार 100किवा क्षमता तक की परियोजनाओं के निर्माण के लिए 1.25 लाख रू. प्रति कि.वा की दर से जबकि 100किवा से अधिक क्षमता की परियोजना के लिए 0.75 लाख रू. प्रति किवा की राशि उपलब्ध करवाई जा रही है। राज्य सरकार भी 100किवा से 2 मे.वा. क्षमता तक की परियोजनाओं के निर्माण के लिए अनुपूरक अनुदान के रूप में सहायता उपलब्ध की जाएगी। अवशेष धनराशि स्थानीय विकासकर्ता द्वारा चयनित ग्राम पंचायत के साथ स्पेशल परपज व्हिकल कम्पनी बनाकर वहन की जाएगी। 2 मे.वा. क्षमता तक की परियोजनाओं पर राज्य सरकार कोई राॅयल्टी, वाटर यूजर चार्जेज नहीं लेगी। इन परियोजनाओं को उद्योग का दर्जा प्राप्त होगा।
दूसरी श्रेणी में 2 मे.वा. से 5 मे.वा. व तीसरी श्रेणी में 5 मे.वा. से 25 मे.वा. तक की परियोजनाएं शामिल होंगी। इनमें भी उत्तराखण्ड के मूल निवासियों या पंजीकृत फर्मों को प्राथमिकता दी जाएगी। केप्टिव ऊर्जा उत्पादक को प्रीमियम में 20 प्रतिशत छूट दी जाएगी। केप्टिव ऊर्जा की खपत पहाड़ी क्षेत्र में लगे उद्योगों में होने पर प्रीमियम में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा सकती है। सचिव डा.उमाकांत पंवार ने प्रस्तावित नीति के संबंध में पावर पाॅइन्ट पे्रजेंटेशन दिया। बैठक में उपस्थित उद्यमियों ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित नीति की सराहना करते हुए कहा कि इससे ग्राम पंचायतों को लाभ मिलेगा और पारदर्शिता की व्यवस्था भी की गई है। उद्यमी अरूण शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार नीति बनाने से पहले सभी से रायमशविरा कर रही है। इसका लाभ प्रदेश को अवश्य मिलेगा। उन्होंने प्रक्रियाओं का टाईमफे्रम तय करने का भी सुझाव दिया। राकेश अग्रवाल ने एपे्राच रोड़, प्रवीण गुप्ता ने सिंगल विंडो सिस्टम, विनोद कुमार अरोड़ा ने प्रोजेक्ट के आवंटन, आशुतोष पाठक ने ट्रांसमिशन काॅस्ट को कम करने का सुझाव दिया। बहुत से उद्यमियों की पर्यावरण संबंधी आशंकाएं थीं जिसके बारे में विभागीय अधिकारियों द्वारा स्थिति स्पष्ट की गई। बैठक में पूर्व सांसद अमर सिंह, विधायक नवप्रभात, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव ओमप्रकाश, सचिव मोहम्मद शाहिद, शैलेश बगोली सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
नेता प्रतिपक्ष ने बीएड टीईटी प्रशिक्षुओं पर लाठीचार्ज की निंदा की
देहरादून,14 अक्टूवर,(निस)। नेता प्रतिपक्ष उत्तराखण्ड विधानसभा अजय भट्ट ने गत दिवस पुलिस द्वारा बी0एड0 टी0ई0टी0 प्रशिुक्षुओं पर किये गये लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार बी0एड0 टी0ई0टी0 प्रशिक्षुओं को नियुक्ति नहीं दे रही है और दूसरी ओर उनके द्वारा शांतिपूर्वक किये जा रहे प्रदर्शन पर पुलिस द्वारा जिस तरह उन्हें जानवरों की तरह पीटा गयी वह अत्यधिक निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। श्री भट्ट ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए धरना-प्रदर्शन करना भी अपराध हो गया है। उन्होंने कहा कि आखिर बी0एड0 प्रशिक्षुओं का अपराध क्या था ? जो कि उन्हें इस तरह सरकार के इशारे पर पुलिस द्वारा दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री आये दिन खुद को जमीनी नेता कहते नहीं थकते हैं और दूसरी ओर जमीनी लोग जब अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं तो उन पर सरकार के इशारे पर जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया जा रहा है जो अत्यधिक निंदनीय हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह से अंग्रेजों के जमाने की याद तरोताजा कर रही है और उसके बाद भी प्रदेश के मुखिया का यह बयान कि मैं आन्दोलनों से नहीं घबराता हूं बहुत खेदजनक है। श्री भट्ट ने कहा कि अच्छा होता बी0एड0 प्रशिक्षुओं द्वारा किये जा रहे प्रदर्शन के सामने सरकार आती और उनकी मांगों को सुनकर त्वरित कार्यवाही करती क्योंकि इन बेरोजगार नवयुवकों जब रोजगार के नहीं मिलेगा तो वे धरना प्रदर्शन नहीं तो क्या करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पुलिस ने आज बी0एड0 प्रशिक्षुओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा और कई बेरोजगारों को घायल किया यह बहुत ही दुःखद स्थिति है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पूरी तरह से अंग्रेजों वाला शासनकाल नजर आ रहा हैं,चारों ओर लूट, डकैती, चैन स्नेचिंग, हत्याये ंतो ऐसे हो रही हैं जैसे कि यहां सरकार नाम की कोई चीज ही नहीं होगी। श्री भट्ट ने कहा कि प्रदेश में लगातार अपराधों की संख्या बढ़ रही है और इस ओर कानून व्यवस्था पूरी तरह से चैपट है किन्तु बेरोजगारों की आवाज दबाने व उन पर लाठीचार्ज करने के लिए पुलिस इतनी सक्रिय नजर आती है कि यहां अपनी मांगों के लिए लड़ना उससे भी बड़ा अपराध हो गया हो। उन्होंने कहा कि अच्छा होता सरकार इतनी सक्रियता प्रदेश के कानून व्यवस्था को बहाल करने और अन्य विकास कार्यों में लगाती। श्री भट्ट ने कहा कि एक ओर प्रदेश में आपदा पीडि़त आये दिन एक के बाद एक आत्महत्या कर रहे हैं और दूसरी ओर प्रदेश की कांग्रेस सरकार अपने चंद छूटे हुए चहेतों को लालबत्ती से नवाजने के लिए दिल्ली दरबार के चक्कर काटने में मशगूल है। उन्होंने कहा कि देश में यह पहला राज्य होगा जहां कि सबसे अधिक कैबिनेट मंत्री होंगे क्योंकि यहां सत्ता पक्ष का हर व्यक्ति कैबिनेट मंत्री स्तर का होने जा रहा है, जो चंद छूटे हैं उनके लिए भी सरकार ने अपने दिल्ली दरबार से परमिशन ले ली है।

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