डीजल अनुदान के लिए किसान कहाँ से लाएँ फर्जी वाउचर सरकारी नीति गलत
नरकटियागंज(पच) सरकार की कृषि नीति और उसे लागू कराने वाले अधिकारियों की अदूरदर्शिता के कारण वास्तव में किसान परेशान होते दिख रहे है। उसकी एक एक बानगी यह कि नरकटियागंज प्रखण्ड के बिनवलिया निवासी किसान ललन सिंह का आवेदन है। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के नाम का आवेदन स्पष्ट करता है कि वैसे किसान जिन्होंेने पम्पसेट भाड़ा पर लेकर खेत में पानी पटाया तो वे पेट्राॅल पम्प से डीजल के खरीद का वाउचर (बिल) कहाँ से लाएँगे। ललन सिंह बताते है कि डीजल अनुदान के लिए मांगे गये आवेदन में किसानों से खरीदे गये डीजल का बिल संलग्न करना है। उन्हांेने अधिकारी से पूछा है कि ऐसे में वे रसीद कहाँ से लाए, क्योंकि वे फर्जी वाउचर लगाकर नहीं देना चाहते है। उन्होंने आवदेन में स्पष्ट किया है कि सात खाता खेसरा के अन्तर्गत करीब 5 एकड़ 9 डिस्मील भूमि पर खेती किये हुए है। ललन सिंह ने अपने आवेदन में लिखा है कि गन्ना की खेती की पैमाईश पुस्तिका न्यू स्वदेशी सुगर मिल्स नरकटियागंज के पास उपलब्ध है। अधिकारी खेती सम्बन्धित मेरे दिये गये आंकड़ों की जाँच करा कर मुझे डीजल अनुदान की राशि उपलब्ध कराए।
बिहार व केन्द्र सरकार कर्मचारी विरोधी, कर्मचारी हितों की न करे अनदेखीः दिलीप
नरकटियागंज (अवधेश कुमार शर्मा) बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ त्रिपाठी गुट के प्रांतीय अधिवेशन से लौट कर संयुक्त सचिव दिलीप कुमार ने एक वार्ता के दौरान बताया कि महासंघ का 17 वाँ दो दिवसीय प्रदेश अधिवेशन गया में विगत दिनो सम्पन्न हुआ। जिसमें बिहार व झारखण्ड के संयुक्त महासंघ के संस्थापक महामंत्री गोपाल प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकारे कर्मचारियों की हितैषि नहीं है। श्री कुमार ने कहा कि संस्थापक महामंत्री के अनुसार एक बार के लिए विधायक बनने वाले जनप्रतिनिधियों को आजीवन पेंशन व भत्ता मिलता है, भले ही वे एक दिन भी काम नहीं करे। केन्द्र के कर्मियांे को 2004 से एवं राज्यकर्मियों को पहली सितम्बर 2005 से पेंशन लाभ से वंचित कर दिया गया है जबकि वे पूरी नौकरी समाप्त कर उसके हकदार बनते है। उल्लेखनीय है कि महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत से अधिक होने पर मूल वेतन में जोड़ कर पेंशन व अन्य लाभ दिये जाने का प्रावधान है किन्तुं केन्द्र की मोदी सरकार ने जुलाई 2014 के प्रभाव से मात्र सात प्रतिशत महंगाई भत्ता की स्वीकृति प्रदान की है जो अब कुल 107 प्रतिशत हो गया। बावजूद इसके मूल वेतन में उसे नहीं जोड़ा गया जिससे केन्द्र व राज्य के कर्मियों को आर्थिक क्षति हो रही है। गया के प्रदेश अधिवेशन में प्रस्ताव पारति कर महासंघ ने जो मांग किया है उनमें मुख्य रूप से 2004-05 के प्रभाव से सरकार द्वारा लागू पंेशन योजना को समाप्त करने, 50 प्रतिशत महंगाई भत्ता को मूल वेतन में जोड़ने, सातवे वेतन आयोग के प्रतिवेदन प्राप्ति तक 5000 रूपये प्रतिमाह अंतरीम सहायता देने, संविदा पर नियुक्ति को बंद करने, नियुंक्त कर्मियों को नियमित करने, सरकारी कर्मियों की सेवानिवृति की आयु 65 वर्ष करने, संघ व महासंघ के पदधारको के स्थानान्तरण पर रोक लगाने और चतुर्वर्गीय कर्मियों को तृतीय वर्ग मंे प्रोन्नती के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना है।

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