वाराणसी (सुरेश गांधी )। नकली नोटों का कारोबार धर्म की नगरी काशी समेत पूरे पूर्वांचल में छाया हुआ है। सिगरा के पास से उत्तर प्रदेश एटीएस पुलिस टीम ने दो संदिग्ध युवकों के पास से नकली नोट बरामद किया है। दोनों के पास पुलिस ने 1 लाख 95 हजार नगद बरामद किया है। एटीएस टीम के मुताबिक दोनों काफी दिनों से नकली नोट का कारोबार कर रहे है। ये लोग नेपाल से नकली नोट लाकर बनारस में खपाते है।पकड़े गए तस्करों ने पूछताछ में बताया है कि पाकिस्तान से आए नकली नोटों को मालदा में एक स्थान पर रखा जाता है। यहां से वह 380 रुपये प्रति हजार के हिसाब से नोट खरीदकर लाते थे। हर नकली नोट तस्करों को चोखा मुनाफा देता है। 380 रुपये में खरीदने के बाद हजार रुपये की नोट को तस्कर 490 रुपये में बेचते थे। अगला खरीदार भी ऐसे ही मुनाफा रखकर इन नोटों को बेच देता है और अंत में यह बाजार में आ जाते हैं। वाराणसी, जौनपुर और आजमगढ़ में नकली नोटों की खेप पहुंचाते थे। हर महीने पांच लाख रुपये तक के नकली नोट यहां बेचे जाते हैं। नोटों की तस्करी के दौरान रेलगाड़ी के जनरल डिब्बे या प्राइवेट बसें और जीप तस्करों का साधन होते हैं। एटीएस के मुताबिक नकली नोटों के नेटवर्क के पीछे एटीएस की टीम तकरीबन डेढ़ महीने से लगी हुई है। सटीक सूचना पर शुक्रवार की भोर में टीम ने रोडवेज के समीप प्राइवेट बस अड्डे पर घेराबंदी कर ली। रांची से आ रही भोलेशंकर बस सविस की बस से उतरे दो युवकों को दबोच लिया गया।
पकड़ा गया सत्तार अंसारी रांची के जगन्नाथपुरी थाने के गुरांग गांव और दानिश अंसारी हिंदूपुरी थानाक्षेत्र के निजामनगर इलाके का रहने वाला है। सत्तार के बैग से 1000 रुपये के 127 और दानिश के बैग से 500 रुपये के 136 नकली नोट बरामद हुए। बेहद साधारण से दिखने वाले दोनों युवकों ने खुद को व्यवसायी बताया तो एटीएस भी गड़बड़ा गई। हालांकि कड़ाई से पूछताछ हुई तो सच सामने आ गया। एएसपी एटीएस ने बताया कि दोनों युवक लंबे समय से नकली नोटों की तस्करी में लिप्त हैं। पकड़े गए दानिश का पिता भी नकली नोटों का बड़ा तस्कर है और वष-2009 में हजारीबाग में नकली नोट की बड़ी खेप के साथ गिफ्तार हुआ था। उसका चाचा तीन दिन पहले कोलकाता से इसी मामले में छूटा है। एटीएस की टीम ने इससे पहले पटना रेलवे स्टेशन से 7.5 लाख रुपये के नकली नोटों के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया था।

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