उत्तराखंड की विस्तृत खबर 06 जनवरी) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 6 जनवरी 2015

उत्तराखंड की विस्तृत खबर 06 जनवरी)

बुधवार से भारी मशीनों को पहुंचाया जायेगा धाम, मषीनों के पहुंचने से पुनर्निर्माण कार्य में आएगी तेजी 

देहरादून, 6 जनवरी। मंगलवार को वायु सेना के सबसे बड़े मालवाहक हैलीकाॅप्टर एमआई-26 ने केदारनाथ में बनाये गये हैलीपैड में सुरक्षित ट्रालय लैंडिंग की। साथ ही एमआई-26 के पायलटों ने केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों में प्रयोग होने वाली मशीनों को ढोने के लिये हरी झंडी दे दी है। अब बुधवार से एमआई-26 गौचर हवाई पटटी से केदारनाथ के लिये मशीनें ले जायेगी जायेंगी। 11660 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस हैलीपैड को बनाने में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान(निम) के कर्मचारियों व मजदूरों को विपरीत परिस्थितियों के बीच काफी मषक्कत करनी पड़ी है। उल्लेखनीय है कि सोमवार को एमआई 26 ने चंडीगढ़ से गौचर के लिए उड़ान भरी थी। दोपहर तक वायु सेना का एमआई 26 गौचर में लैंडिंग कर चुका था। मंगलवार प्रातः आठ बजे एमआई 26 ने केदारनाथ के उड़ान भरी और केदारनाथ में सुरक्षित लैंडिंग की। वायु सेना के अधिकारियों ने हैलीपैड में दो बार एमआई 26 को लैंडिंग करवाई। इस बीच वायु सेना के अधिकारियों ने हैलीपेड का जायजा भी लिया। इससे पूर्व दो अधिकारी सोमवार को हैलीपेड का जायजा भी ले चुके थे। करीब तीन सप्ताह तक एमआई 26 हेलीकाप्टर गौचर में ही रहेगा और लगभग दो सौ टन सामग्री को केदारनाथ पहुंचाएगा। गौचर हवाई पटटी पर पोकलैंड, जेसीबी, डंपर आदि मशीनों के अलग-अलग पार्ट कर दिये गये हैं। क्रेन के जरिये सामग्री को एमआई 26 में डाला जाएगा और दिन में एक बार ही एमआई 26 हेलीकाॅप्टर केदारनाथ की उड़ान भरेगा और एक बार में लगभग आठ टन सामग्री ही वह केदारनाथ पहुंचाएगा। एमआई 26 से पहुंचाई जाने वाली भारी मशीनों से निम के मजदूरों को पुनर्निर्माण के कार्यों में आसानी होगी। बर्फवारी को हटाने और क्षतिग्रस्त भवनों को तोड़ने में मजदूरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। जेसीबी, डम्पर और पौकलैंड मशीनों के धाम में पहुंच जाने के बाद मजदूरों को अब कार्य करने में दिक्कतें नहीं होंगी। वायु सेना के विंग कमांडर जीएस तुंग ने बताया कि बुधवार से एमआई 26 से भारी मशीनों को पहुंचाया जायेगा। उन्होंने कहा कि मौसम की परिस्थिति को देखते हुए कार्य किया जायेगा।

जनता के साथ खिलावाड़ कर रही कांग्रेस सरकारः अजय भट्ट

देहरादून,6 जनवरी (निस)। नेता प्रतिपक्ष उत्तराखण्ड विधानसभा अजय भट्ट ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार अपनो को खुश करने के अलावा कुछ भी प्रदेश हित में नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि पूरे भारत भर में पूर्ववर्ती भाजपा सरकार प्रदेश में ऐसी सरकार थी जिसने सर्वप्रथम प्रदेश में 108 की सुविधा मुहैया कर पूरे प्रदेशवासियों को राहत देकर इस सेवा से पूरे भारत भर में इतिहास कायम किया था। श्री भट्ट ने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने इसके बाद खुशियों की सवारी को जमीन में उतारकर जच्चा-बच्चा को निःशुल्क घर तक छोड़ने की योजना को अंजाम दिया था किन्तु वर्तमान कांग्रेस सरकार अपनों को शराब, जमीन और खनन के कारोबार में एडजस्ट करने में इतनी व्यस्त हो गयी है कि उसे यही पता नहीं कि 108 जैसी इतनी महत्वपूर्ण सेवा के बजट रिलीज न होने के कारण पूरे प्रदेशभर में 108 सेवा के पहिए जाम नहीं हुए बल्कि प्रदेशवासियों की सांसें जाम होने लगी है, जिस कारण  डंडासली गाॅव में 108 नहीं पहुंॅचने से सुरजा देवी की मृत्यु हो गयी। उन्होंने कहा कि यदि 108 सेवा पहुॅच गयी होती तो उसकी जान बच गयी होती क्योंकि उसमे समय से अस्पताल पहुॅचाने के साथ ही रास्ते में आवश्यक दवायें भी मुहैया करायी जाती हैं। श्री भट्ट ने कहा कि सरकार को अपनों को खुश करने में यह भी ध्यान नहीं रहा है कि प्रदेश में 108 जैसी सेवा के लिए समय से बजट रिलीज न होने पर आज पूरी तरह से पूरे प्रदेश में इसे सेवा ने दम तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की गलत नीतियों और आपसी कलह के कारण लगातार प्रदेश का भारी नुकसान हो रहा है। श्री भट्ट ने कहा कि सरकार के विधायक जब भी सरकार को धमकी देते हैं तो आनन-फानन में चंद घण्टों में ही उन्हें तमाम प्रकार की सुख-सुविधायें दिलाये जाने हेतु बजट से लेकर अन्य सभी प्रकार की व्यवस्थायें कर ली जाती हैं किन्तु प्रदेष में 108 सेवा पिछले 1 माह से दम तोड़ने जा रही है उसकी ओर अभी तक सरकार का ध्यान न जाना अत्यधिक दुर्भाग्यपूर्ण है। श्री भट्ट ने कहा कि सरकार की सह पर प्रदेश में लगातार खनन माफियाओं के पैर मजबूत होते जा रहे हैं आज प्रदेश में कोई भी अधिकारी जो खनन माफियाओं, भू-माफियाओं और शराब माफियाओं के खिलाफ चैकिंग करता हो वह सुरक्षित नहीं रह गये हैं। हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र में लेखपाल तेलूराम जब खनन माफियाओं के खिलाफ चैकिंग अभियान चला रहे थे उल्टा उनके साथ मारपीट कर खनन माफिया अपने मसूंबों पर पूरी तरह से कामयाब हो गये। उन्होंने कहा कि पूरी सरकार इन माफियाओं के साथ संलिप्त है और ये खनन माफिया पूर्ण तरह से सरकार में षामिल लोग हैं जो बेखौफ होकर एक के बाद एक घटना को अंजाम देते आ रहे हैं क्योंकि इससे पूर्व जब डोईवाला के ग्रामीणों ने खनन के खिलाफ आवाजा उठायी थी तो उल्टा उन पर हमला कर दिया था तथा विकासनगर में एसडीएम को कुचलने का प्रयास किया गया था और इसके बाद हरिद्वार में ही एएसपी पर फायरिंग की गयी थी।

नए राज्यपाल कृष्णकांत पाॅल आज पहुंचेगे दून

देहरादून,6 जनवरी (निस)। उत्तराखण्ड के नए राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पाॅल का 7 जनवरी को अपरान्ह लगभग 4 बजे राजभवन देहरादून पहुँचेंगे। उनका दिल्ली से हवाई मार्ग द्वारा अपरान्ह 3.20 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुँचने का कार्यक्रम प्रस्तावित है, एयरपोर्ट पर उन्हंे पी.ए.सी के जवानों तथा राजभवन पहुँचने पर सेना द्वारा गार्ड आॅफ आॅनर दिया जायेगा। निर्धारित कार्यक्रमानुसार डा0 पाॅल 8 जनवरी को दोपहर 12.00 बजे उत्तराखण्ड के छठे राज्यपाल के रूप में राजभवन के प्रांगण में शपथ ग्रहण करेंगे। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.एम. जोसफ उन्हें राज्यपाल पद की शपथ दिलायेंगे। वहीं, डा. अजीज कुरैशी जो मिजोरम के नये राज्यपाल पद के लिए मनोनीत किए गए हैं, 7 जनवरी को सांय 5 बजे देहरादून से दिल्ली होते हुए मिजोरम के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल की देहरादून से नई दिल्ली तक की यात्रा रेलमार्ग से होगी। वे सात जनवरी को रात्रि विश्राम उत्तराखण्ड निवास नई दिल्ली मंे करेंगे। 08 जनवरी, 2015 की प्रातः 09.20 बजे जेट एयरवेज द्वारा पालम एयरपोर्ट नई दिल्ली से कलकत्ता के लिए प्रस्थान करेंगे। कलकत्ता से अपरान्ह में जेट एयरवेज की दूसरी फ्लाइट से सायंकाल मिजोरम मुख्यालय आइजोल पहुँचेंगे। प्रस्तावित कार्यक्रमानुसार वे 09 जनवरी को मिजोरम के राज्यपाल पद की शपथ लेंगे। सायंकाल 4.00 बजे राजभवन देहरादून से विदाई से पूर्व राज्यपाल को राजभवन में सेना तथा देहरादून रेलवे स्टेशन पहुँचने पर पी.ए.सी. की बटालियन द्वारा गार्ड आॅफ आॅनर दिया जायेगा। देहरादून रेलवे स्टेशन से विदाई के समय अनेक वरिष्ठ राजनेता, राज्य सरकार के अनेक वरिष्ठ अधिकारी व अन्य प्रतिष्ठित महानुभाव भी उपस्थित रहेंगे।

बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त, तो कहीं बिजली से जगमगा रहे हैं गांव

देहरादून, 6 जनवरी (निस)। उत्तराखण्ड के सीमांत जिलों में शीतकाल की दूसरी बर्फवारी से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। उत्तरकाषी ,चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में अभी 16 दिसंबर को हुई बर्फबारी के बाद गांवों में हालात सामान्य हो भी नहीं पाए और ऊंचाई वाले क्षेत्रों के गांवों में दोबारा बर्फबारी हो गई। ऐसे में विद्युत व पानी समेत अन्य व्यवस्थाएं चरमराने लगी है। दो सौ से अधिक गांवों में मिट्टी तेल की भी आपूर्ति न होने से संकट और गहरा गया है। विभागीय अधिकारी भी खराब मौसम का हवाला देकर अपने कत्र्तव्यों से मुंह मोड़ रहे हैं। चमोली जिले में 16 दिसंबर 2014 को हुई बर्फबारी से जिले के पांच सौ से अधिक गांवों में विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी। इसमें से 40 गांवों में ऊर्जा निगम विद्युत आपूर्ति सुचारु नहीं कर पाया है। अब दो जनवरी 2015 को भी जमकर हिमपात हुआ जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और बिगड़ गए हैं। बर्फबारी प्रभावित 200 से अधिक गांवों में केरोसीन नहीं पहुंचा है। इसके अलावा पाणा, ईराणी, दुर्मी, डुमक, कलगोंठ समेत 60 से अधिक गांवों में बर्फबारी के बाद रास्ते क्षतिग्रस्त व बंद होने से इन गांवों में राशन की किल्लत भी सामने आ सकती है। हालांकि इन गांवों के लोगों ने बर्फबारी के मद्देनजर पहले से एक माह का राशन एकत्रित की हुई है। कई गांवों में बर्फबारी के बाद पेयजल लाइनें टूटने से यहां पानी का संकट भी गहरा गया है। पिलंग वार्ड की जिला पंचायत सदस्य उषा रावत का कहना है कि दशोली ब्लाक के सरतोली क्षेत्र में बर्फबारी के बाद पेयजल लाइन टूटने से पांच से अधिक गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। हालांकि ऊर्जा निगम का दावा है कि क्षतिग्रस्त लाइनों को सुधारने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य चल रहा है, मगर लगातार मौसम खराब होने से कार्य में रुकावटें पैदा हो रही है। 

तीन गांवो के लिए बिजली सर्दियां में वरदान से कम नहीं
   
देहरादून, 6 जनवरी (निस)। उत्तरकाशी जनपद के सीमांत क्षेत्र उपला टकनौर में बर्फबारी के बावजूद तीन गांवों की बिजली गुल नहीं हुई है। रात को इन तीन गांवों में बिजली की रोशनी काफी राहत दे रही है। हर्षिल जल विद्युत परियोजना इन तीन गांवों के लिए सर्दियों में वरदान साबित हो रही है। हर्षिल से डेढ़ किमी की दूरी पर कछोरागाड पर बनी लघु जल विद्युत परियोजना जिले के सबसे पुरानी पनबिजली परियोजनाओं में से एक है। वर्ष 1976 में बनकर तैयार हुई 200 किलोवाट की यह परियोजना हर्षिल, मुखबा व धराली गांव के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। परियोजना में सौ-सौ किलोवाट की दो टरबाइनें लगी हैं। इसका निर्माण उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम ने कराया था। उत्तराखंड राज्य बनने पर यह परियोजना उत्तराखंड जल विद्युत निगम के अधिकार में आ गई। लगातार बिजली उत्पादन कर रही इस परियोजना को वर्ष 2013 तक जल विद्युत निगम ने संचालित किया। उसके बाद यह परियोजना उरेडा को हस्तांतरित कर दी गई। इन दिनों बर्फबारी के कारण जिले के ऊंचाई वाले गांवों में ग्रिड की बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है, लेकिन उपला टकनौर क्षेत्र के इन गांवों में सर्द रातें भी जगमगाती रहती हैं। इसी क्षेत्र के छोलमी, जसपुर, झाला, सुक्की व पुराली गांवों में ग्रिड की बिजली आपूर्ति दम तोड़ जाती है। यही स्थिति जिले के गीठ, पर्वत व बंगाण क्षेत्र में भी पैदा होती है। ऐसे में हर्षिल जल विद्युत परियोजना वरदान साबित हो रही है।

शीतकाल में पहली बार केदारनाथ में पुलिस तैनात

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देहरादून, 6 जनवरी (निस)।  विश्व प्रसिद्ध धाम केदारनाथ मंदिर का भूगोल ही नहीं बल्कि इतिहास भी बदल गया। त्रासदी के कारण जहां मंदिर के पीछे एक बड़ी शिला आ गई वहीं पहली बार यहां शीतकाल में भी पुलिस तैनात है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि कपाट बंद होने के बाद भी पुलिस के जवान मंदिर की सुरक्षा में तैनात हैं। जवान कड़ाके की ठंड में केदारनाथ धाम में डयूटी दे रहे हैं।  इससे पहले केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद पुलिस के जवान भी गौरीेकुंड चैकी आ जाते थे। पुलिस यहीं से 14 किलोमीटर दूर केदारनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था देखती थी। छह माह तक भोले बाबा अकेले सुनसान केदारपुरी में रहते थे। इस बार केदारनाथ में परिस्थितियां उलट हैं। वर्ष 2013 में जून माह में आई त्रासदी ने केदारनाथ की तस्वीर ही नहीं बदली, बल्कि इतिहास भी बदल डाला। शीतकाल में पूरे छह माह केदारनाथ गुलजार है। पुलिस के 16 जवान यहां तैनात हैं, जोकि चार फुट बर्फ में भी सुबह शाम मंदिर की सुरक्षा में जुटे हैं। मंदिर की सुरक्षा के लिए पांच जवान हर समय तैनात रहते हैं। एक जवान मुख्य गेट पर तैनात रहकर सुरक्षा का जिम्मा संभालता है, जबकि अन्य मंदिर के आगे पीछे रहते हैं। पुलिस ने अपने लिए बेस कैंप में ही बसेरा बनाया हुआ है। यहीं से पांच जवान प्रतिदिन बारी-बारी से डयूटी पर आते हैं। इनके लिए राशन और अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति नेहरु पर्वतारोहण संस्थान कर रहा है। मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार इन पुलिस वालों के लिए हेलीकॉप्टर या पैदल मार्ग से राशन और जरूरी सामान उनके कैंप तक नेहरु पर्वतारोहण संस्थान के मजदूर पहुंचाते हैं।

बुनकरों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर दिया जोर
  • -नेशनल हैंडलूम एक्सपो में बुनकर गोष्ठी आयोजित


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देहरादून,6 जनवरी (निस)। विकास आयुक्त (हथकरघा) भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय एवं उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद (यूएचएचडीसी) के संयुक्त तत्वावधान में परेड मैदान में चल रहे ‘नेशनल हैंडलूम एक्सपो‘ में मंगलवार को बुनकर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में उत्तराखण्ड के पर्ववीय जिलों मोरी, नौ गांव, पुरोला, उत्तरकाषी, छिनका, धारचूला, मुनस्यारी, बागेश्वर, टिहरी तथा अन्य जिलों से भी बनुकरों ने प्रतिभाग किया। इसके साथ ही जम्मू एंड कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड, उडी़सा, पशिचम बंगाल, असम, कर्नाटक, दिल्ली के सौ से अधिक बुनकरों ने भी गोष्ठी में भाग लिया। गोष्ठी में वक्ताओं ने बुनकरों तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया। गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए उद्योग मित्र परिशद के उपाध्यक्ष विवेकानंद खंडूरी ने कहा कि बुनकरों की विभिन्न जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाई जाएं। इन योजनाओं का लाभ प्रदेश के दूरस्थ इलाकों के बुनकरों तक पहुंचे इसके लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र के सर्वेक्षण में उत्तराखण्ड में 29 हजार बुनकर हैं, यदि इसमें परम्परागत बुनकरों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 90 हजार तक पहुंच जाएगी। यही वजह है कि केंद्र से पुनर्सर्वेक्षण की मांग की जा रही है। ऐसा किए जाने से दूरस्थ बैठे बुनकरों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सकेगा। प्रदेश के उत्पादों की डिजाइन, रंग, तकनीक, विपणन एवं निर्यात की ओर ध्यान दिए जाने पर बल दिया गया। उन्होंने कहा कि वीवर क्रेडिट कार्ड, बैंक ऋण एवं विपणन के लिए निरंतर नए मेले का आयोजन किया जाना चाहिए। अपर निदेशक उद्योग एससी नौटियाल ने कहा कि हथकरघा उत्पादों की देश व विदेश में मांग बढ़ रही है। शुद्ध हथकरघा उत्पादों को आधुनिक डिजाइन व नवीन तकनीक से तैयार करना बुनकरों की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने बुनकरों को डिजाइन और बाजार के बदलते ट्रेंड की जानकारी देने के लिए एनआईडी अहमदाबाद के साथ समझौता किया है। गोष्ठी में नाबार्ड के उप महाप्रबंधक एसके धूमल, एलआईसी के सहायक प्रबंधक तेज राम, जीसी पांडे महाप्रबंधक उत्तरकाशी महावीर सिंह सजवाण, वूमेन डेवलपमेंट सोसायटी की सचिव डा. केके शर्मा ने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद संयुक्त निदेशक उद्योग कौशल्या बंधू तथा संचालन सहायक निदेशक उद्योग शैली डबराल ने किया। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक उद्योग यूके जोशी, सहायक निदेशक उद्योग मनमोहन सिंह, राजेंद्र कुमार, अनुपम द्विवेदी, महाप्रबंधक चमोली शिखर सक्सेना, मृत्यंजय सिंह, मेलाधिकारी केसी चमोली, जेएम बहुगुणा, माधो सिंह रावत, एचआर नौटियाल, एससी हटवाल आदि उपस्थित रहे।

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