बालाघाट (मध्यप्रदेश) की खबर (15 जनवरी) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 15 जनवरी 2015

बालाघाट (मध्यप्रदेश) की खबर (15 जनवरी)

कलेक्टर ने किया धान खरीदी केन्द्रों का निरीक्षण, खुरसोड़ी के केन्द्र प्रभारी पर एफ.आई.आर. के निर्देश
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कलेक्टर श्री व्ही. किरण गोपाल ने आज खुरसोड़ी, कलपाथरी एवं बड़गांव के धान खरीदी केन्द्रों का निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान खुरसोड़ी के केन्द्र प्रभारी द्वारा किसान के नाम पर किसी अन्य के धान की खरीदी का मामला सामने आने पर उन्होंने वहां के केन्द्र प्रभारी पर धोखाधड़ी के मामले में थाने में एफ.आई.आर. दर्ज करने के आदेश दिये है। धान खरीदी केन्द्रों के निरीक्षण के दौरान केन्द्रों पर खराब बारदाने भी पाये गये। कलेक्टर ने किसानों से चर्चा कर उन्हें आश्वस्त किया कि केन्द्रों पर अच्छे बारदाने शीघ्र उपलब्ध कराये जायेंगें। केन्द्रों के निरीक्षण के दौरान जिला आपूर्ति अधिकारी सुश्री रश्मि साहू एवं जिला विपणन अधिकारी श्री देवेन्द्र यादव भी मौजूद थे। 

किसान के नाम पर अन्य व्यक्ति की धान खरीदी
कलेक्टर ने आज अचानक खुरसोड़ी, कलपाथरी एवं बड़गांव के धान खरीदी केन्द्र का निरीक्षण किया तो उन्होंने खुरसोड़ी में धान खरीदी के रिकार्ड की भी जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि 15 जनवरी 2015 की तारीख में किसान वासुदेव के नाम पर 20 क्विंटल धान की खरीदी दिखाई गई है। इसके बाद किसान वासुदेव को बुलाकर चर्चा की गई तो उसने बताया कि उसके द्वारा 07 जनवरी 2015 के बाद से धान नहीं बेची गई है। इस प्रकार पाया गया कि धान खरीदी केन्द्र के प्रभारी बसंत सोनी द्वारा किसान के नाम पर किसी बिचोलिया या व्यापारी की धान खरीदी गई है। कलेक्टर ने मौके पर ही धान खरीदी केन्द्र के प्रभारी बसंत सोनी पर धोखाधड़ी के मामले में थाने में एफ.आई.आर. दर्ज करने के आदेश दिये है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिले में कहीं पर भी इस तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जायेगी। 

बोरों पर नहीं थी लाल रंग का मार्किंग
ग्राम कलपाथरी एवं बड़गांव के धान खरीदी केन्द्रों के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि किसानों से खरीदी गई धान के बोरों पर लाल रंग से कोई मार्किंग नहीं की गई है। जबकि सभी केन्द्र प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिये गये है कि समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान के बोरों पर लाल रंग से मार्किंग की जाना है। इन केन्द्रों के बोरों पर नीले रंग का निशान लगा पाया गया। कलेक्टर ने इस स्थिति पर नाराजगी जाहिर की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि जिन बोरों में लाल रंग की मार्किंग नहीं होगी उन बोरों का सहकारी समिति को भुगतान नहीं किया जायेगा।  

16 जनवरी को होने वाली जिला एवं जनपद सदस्य की मतगणना स्थगित
माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा पारित आदेश के परिपालन में म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 16 जनवरी 2015 को होने वाली जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत सदस्य की मतगणना आगामी आदेश तक के लिए स्थगित कर दी है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जिला पंचायत सदस्य की मतगणना पर रोक लगाई गई है। जिला पंचायत सदस्य एवं जनपद पंचायत सदस्य का निर्वाचन एक ही ई.व्ही.एम. मशीन से कराया गया है। दोनों की मतगणना एक साथ ही संभव है। इस कारण से 16 जनवरी को होने वाली जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत सदस्य की मतगणना आगामी आदेश तक के लिए स्थगित कर दी गई है। 

पल्स पोलियो अभियान-2015, सभी बच्चों को दवा पिलाने कलेक्टर ने की सहयोग की अपील
जीवन भर के लिए विकलांग बना देने वाली पोलिया की बीमारी के उन्मूलन के लिए आगामी 18 जनवरी एवं 22 फरवरी 2015 को जिले में भी पांच वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को पोलियो निरोधक दवा की दो बूंद खुराक पिलाई जायेगी। इस अभियान के लिए जिले में सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। कलेक्टर श्री व्ही. किरण गोपाल ने जिले की जनता से अपील की है कि वे पल्स पोलियो अभियान के प्रथम चरण में 18 जनवरी को एवं द्वितीय चरण में 22 फरवरी को पांच वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को पोलियो निरोधक दवा पिलाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा है कि यह केवल स्वास्थ्य विभाग का या शासकीय कार्यक्रम नहीं है। इसमें समाज के सभी वर्गों का योगदान अनिवार्य है। सभी के सहयोग से ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है और देश को पोलियो से मुक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने जिले की जनता से कहा है कि वे 18 जनवरी एवं 22 फरवरी को अपने पास के टीकाकरण केन्द्र पर पास-पड़ोस के सभी बच्चों को दवा पिलाने के लिए लायें। इस बात का इंतजार न करें कि टीकाकरण दल घर पर दवा पिलाने आयेगा। बच्चों को दवा पिलाने के लिए अधिक दूर न जाना पड़े इसके लिए जिले में 1534 टीकाकरण केन्द्र बनाये गये है। 

प्रस्तावित बस स्टेंड के समतलीकरण कार्य का कलेक्टर ने किया निरीक्षण, समतलीकरण का कार्य तेजी से पूर्ण करने के निर्देश
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नगरीय क्षेत्र बालाघाट में जय स्तंभ चौक के पास त्रिपरी सुंदरी मंदिर के पीछे खाली पड़ी भूमि पर बसों को खड़ी रखने के लिए बस स्टेंड का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस प्रस्तावित बस स्टेंड का नगर पालिका, मायल एवं जिला प्रशासन के सहयोग से समतलीकरण कार्य किया जा रहा है। कलेक्टर श्री व्ही. किरण गोपाल ने आज लोक निर्माण विभाग एवं नगर पालिका के अधिकारियों के साथ समतलीकरण कार्य का निरीक्षण किया और इस कार्य को तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिये। बालाघाट नगर के बस स्टेंड में बस मालिकों द्वारा बसों को अधिक समय तक खड़ा रखने से अव्यवस्था होती है और यात्रियों व जन सामान्य को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए पुराने राज्य परिवहन डिपो के स्थान पर बसों को खड़ा रखने के लिए बस स्टेंड का निर्माण किया जा रहा है। इस प्रस्तावित बस स्टेंड में आने के लिए त्रिपुर सुंदरी मंदिर के पास सकरा रास्ता होने के कारण बसों के आने-जाने में परेशानी होती है। इसके लिए प्रस्तावित बस स्टेंड की भूमि का समतलीकरण कर बसों के आने एवं जाने के लिए अलग-अलग रास्ता निर्धारित कर दिया जायेगा।कलेक्टर श्री किरण गोपाल ने बताया कि प्रस्तावित बस स्टेंड की भूमि पर जो भी अतिक्रमण है उसे शीघ्र हटा दिया जायेगा। इस प्रस्तावित बस स्टेंड का समतलीकरण कार्य नगर पालिका, मायल एवं जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है। इस कार्य को शीघ्र पूर्ण कराया जायेगा और बसों का इस स्थल पर खड़ा किया जाना सुनिश्चित किया जायेगा। बस स्टेंड में अपने निर्धारित छूटने के समय से 10 मिनट पहले ही बस इस स्थल से रवाना होगी। बसों को सड़को के किनारे कहीं पर अव्यवस्थित रूप से खड़ा नहीं रहने दिया जायेगा। निरीक्षण के दौरान जिला परिवहन अधिकारी श्री आर.डी. दक्ष, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री सुधीर गुप्ता एवं नगर पालिका अधिकारी श्री बी.एल. लिल्हारे मौजूद थे। 

बैंगलोर प्रदर्शनी में बालाघाट के बुनकरों द्वारा तैयार वस्त्रों को मिल रही है सराहना 
बालाघाट जिले के मेंहदीवाड़ा एवं वारासिवनी के बुनकरों द्वारा तैयार हाथकरघा की साड़ियां एवं अन्य वस्त्र अपनी एक अलग पहचान रखते है। जिले के बुनकरों को बाजार की मांग से परिचित कराने एवं उनके द्वारा तैयार किये गये वस्त्रों के लिए बाजार उपलब्ध कराने के लिए देश के विभिन्न स्थानों पर लगने वाली प्रदर्शनियों में जिले के बुनकरों को भेजा जाता है। इन दिनों जिले के बुनकरों द्वारा तैयार वस्त्र कर्नाटक राज्य के बैंगलोर में लगी प्रदर्शनी में बिकने के लिए पहुंचाये गये है। बैंगलोर की इस प्रदर्शनी में जिले के बुनकरों के वस्त्रों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। सहायक संचालक हाथकरघा श्री आर.के. बासल ने बताया कि हाथकरघा बुनकर क्लस्टर वारासिवनी के दो बुनकरों को 03 से 18 जनवरी 2015 तक कर्नाटक राज्य के बैंगलोर में चलने वाली हाथकरघा प्रदर्शनी में भेजा गया है। बैंगलोर में जिले के बुनकरों द्वारा तैयार की गई साड़िया खूब पसंद की जा रही है। इसी कड़ी में गुरूदेव स्व सहायता समूह के 02 बुनकरों को 03 से 12 जनवरी 2015 तक हाथकरघा प्रदर्शनी ग्वालियर में भेजा गया था। क्लस्टर क्लब के 02 बुनकरों को आगामी 24 जनवरी से 02 फरवरी 2015 तक उज्जैन में आयोजित कालीदास समारोह में हाथकरघा वस्त्र लेकर भेजा जायेगा। श्री बासल ने बताया कि जिले के बुनकरों को प्रदेश के बड़े शहरों के साथ ही अन्य राज्यों में लगने वाली प्रदर्शनी में हाथकरघा वस्त्रों की बिक्री के लिए भेजने के अच्छे परिणाम सामने आ रहे है। बुनकरों को नई डिजाईनों के वस्त्र बनाने की प्रेरणा मिल रही है और उन्हें आर्डर भी मिल रहे है। इससे बुनकरों को रोजगार के साथ अच्छी आय भी हो रही है। 

कोषालय के भृत्य को सात दिनों के भीतर उपस्थित होने के निर्देश
उप कोषालय बैहर में भृत्य के पद पर पदस्थ गणेश प्रसाद धुर्वे के अनाधिकृत रूप से लंबे से कार्यालय से अनुपस्थित रहने पर उसके विरूध्द विभागीय जांच संस्थित की गई है। जिला कोषालय अधिकारी श्री अश्विनी सिंह परिहार ने भृत्य गणेश प्रसाद धुर्वे को सात दिनों के भीतर कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिये है। अन्यथा उसकी सेवा समाप्ति की कार्यवाही की जायेगी। ग्राम पोस्ट सिलगी, तहसील बम्हनी, जिला मंडला का निवासी गणेश प्रसाद धुर्वे 27 मार्च 2014 से अब तक लगातार अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित है। इस पर उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर उपस्थित होने कहा गया था। लेकिन उसके द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही वह कार्यालय में उपस्थित हुआ है। इसके बाद उसके विरूध्द विभागीय जांच शुरू की गई है। भृत्य गणेश प्रसाद धुर्वे को अंतिम अवसर देते हुए सात दिनों के भीतर कार्यालय में उपस्थित होने कहा गया है। अन्यथा उसकी सेवायें समाप्त करने की कार्यवाही की जायेगी। 

चना फसल में इल्ली के नियंत्रण के लिए किसानों को सलाह
चालू रबी सीजन में जिले के किसानों के द्वारा चने की बोनी की जा चुकी है। आसमान में बादलों के छाये रहने से चने की फसल में इल्ली का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है। पिछले कुछ वर्षों से चने की फसल में कीट व्याधियों का प्रकोप अधिक देखा जा रहा है। चने की फसल को कीट व्याधियों के प्रकोप से बचाने के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है। उप संचालक कृषि श्री जें.एस. गुर्जर ने बताया कि चने में पाई जाने वाली इल्ली के शरीर का उपरी पृष्ठ चमकीला, हरा, भूरा या काले रंग का होता है तथा नीचे का भाग भूरा सा चमकदार होता है। इल्ली कुछ अवस्थाओं में 40 मिलीमीटर लंबी एवं काले भूरे, हरे, गुलाबी या हल्के पीले रंग की भी होती है। व्यस्क कीट दिन में पत्तियों में छिपे  रहते हैं और रात में प्रकाश प्रपंच की ओर आकर्षित होते है। श्री गुर्जर ने बताया कि यह कीट बहु फसल भक्षी है। इसका प्रकोप मुख्य रूप से चना, कपास, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबन, तम्बाकू, करडी, लूसर्न, मिर्च एवं टमाटर पर पाया जाता है। इस कीट की इल्ली अवस्था ही फसल को हानि पहुंचाती है। प्रारंभिक अवस्था में यह पत्तियों का हरा पदार्थ खुरचकर खाती है, उसके बाद कोमल पत्तियों एवं टहनियों को खाती है। चने की फसल में जब फूल से घेटी(फल) बनने लगती है, उसी वक्त यह कीट उस घेटी में छेद कर घेटी का दाना खाती है। घेटी का दाना खाते समय इल्ली अपने सिर तथा धड़ को घेटी के भीतर डाल देती है तथा उसका शेष शरीर घेटी के बाहर लटका रहता है। इस कीट के अत्यधिक प्रकोप की सिथति में 25 प्रतिशत तक उत्पादन कम हो जाता है। देरी से बोई गई चने की फसल पर इसका प्रकोप अधिक रहता है।

नियंत्रण के उपाय
उप संचालक श्री गुर्जर ने किसानों को सलाह दी है कि वे चना फसल में ईल्लियों के नियंत्रण के लिए फसल कटने के बाद खेती गहरी जुताई करना चाहिए। इससे इल्लियां एवं शंखी उपर आकर नष्ट हो जाती है। जहां बिजली की सुविधा हो वहां प्रकाश प्रपंच का उपयोग कर व्यस्क कीटों को एकत्रित कर नष्ट कर देना चाहिए।

जैविक उपाय, टी आकार की लकड़ी गाड़ने की सलाह
श्री गुर्जर ने बताया कि आज के समय में रासायनिक कीटनाशक अत्यधिक मंहगे हो गये है। इसके निरंतर प्रयोग से कीटों में प्रतिरोधक क्ष्मता भी उत्पन्न हो रही है। रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग से उनके अवशेष खाद्य पदार्थों में रह जाते है। उनका स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अत: कीटों के नियंत्रण के लिए जैविक उपाय अपनाना चाहिए। खेतों में उपलब्ध जैविक कीट जैसे कैम्पोलोटिस, क्लोरिडी, लेडीबर्ड, बीटल, क्रायसोपा, रेडयूविडबीटल, परभक्षी वास्प एवं परभक्षी मकड़ियों का संरक्षण करना चाहिए। चने के खेत में मित्र पक्षियों जैसे नीलकंड, कांवर, पैगा, काली चिड़िया, गलगलिया, आदि के बैठने के लिए फसल में एक फुट उंची मुड़ी हुई या अंग्रेजी के टी आकार की लकड़ियां 10 से 12 स्थानों पर गाड़ देना चाहिए। जिससे ये मित्र पक्षी इन लकड़ियों पर बैठकर इल्लियों को चुनकर नष्ट कर देते है। प्रारंभिक अवस्था में इल्लियों के नियंत्रण के लिए .03 प्रतिशत नीम का तेल 2.50 लीटर 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

इल्ली नियंत्रण के परीक्षित नुस्खे
उप संचालक श्री गुर्जर ने बताया कि चना फसल में इल्ली के नियंत्रण के लिए कुछ परीक्षित नुस्खों का भी उपयोग किया जा सकता है। गौ मूत्र को बाटल य्या बड़े कांच के बर्तन में भर कर धूप में रखना चाहिए। गौमूत्र जितना अधिक पुराना होगा, उतना ही अधिक लाभकारी होगा। 150 से 200 मिली. गौमूत्र 15 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे पंप से 10 से 12 पंप प्रति एकड़ छिड़काव करने से लाभ मिलता है। नीम की 15 से 20 किलो कोमल पत्तियों को डालियों सहित 200 लीटर पानी में भिगोकर छांव में रखने तथा पानी के पीला होने तक गलने दें। इसे नीम पत्ती का काढ़ा कहते है। इसे छानकर एक एकड़ क्षेत्र में स्प्रे करना चाहिए। नीम की पत्तियों के स्थान पर करंज, बेशरम, सीताफल, आकड़ा की पत्तियों का भी उपयोग किया जा सकता है। आधा किलोग्राम लहसून और आधा किलो हरी मिर्च बारीक पीस कर पानी में घोल बनाकर उसे छानने के बाद 200 लीटर पानी में मिलाकर उसमें 100 ग्राम साबुन पावडर(डिटर्जेंट पावडर) भी मिला दें। इसका एक एकड़ में छिड़काव करने पर सभी प्रकार के कीट नियंत्रित होते है। तम्बाकू अर्क और 20 से 25 दिनों तक सड़े हुए महि के छिड़काव से भी कीट नियंत्रण में मदद मिलती है।

रासायनिक नियंत्रण
चना फसल में कीट व्याधियों के नियंत्रण के लिए प्रोफेनोफास 50 ई.सी., क्यूनालफास 25 ई.सी., ट्रायजोफास 40 ई.सी. मेथोमिल 75 डब्ल्यू.पी., का भी छिड़काव किया जा सकता है। 

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