विशेष : राजेश खन्ना पर किताब "कुछ तो लोग कहेंगे" से ...... - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 8 जनवरी 2015

विशेष : राजेश खन्ना पर किताब "कुछ तो लोग कहेंगे" से ......

गतांक से आगे ......


liveaaryaavart dotcom
अपनी बीमारी से पहले दिल्ली में राजेश खन्ना और उनके ज्योतिषी दोस्त भरत उपमन्यु के बीच एक टेलीविजन सीरियल के निर्माण को लेकर कई बार बातचीत हुई थी। इस सीरियल का विषय भगवान कृष्ण के जीवन पर आधारित था। फिर राजेश खन्ना बीमार हो गए और मुंबई चले गए जहां उऩका इलाज चल रहा था। इस दौरान भी जब भरत उनसे मिलने मुंबई जाते थे तो राजेश खन्ना के साथ इस कहानी पर बातचीत होती रहती थी। ऐसी ही एक बातचीत के दौरान राजेश खन्ना सोच में डूब गए और फिर भरत से बोले, ‘भरत इस कहानी का युग बदल देते हैं। ये आज के युग के कृष्ण की कहानी होगी। एक ऐसा किरदार जिसे एक मां ने जन्म दिया, फिर दूसरी मां ने बड़े प्यार से पाला। उसमें टैलेंट और शक्ति कूट-कूटकर भरी है, मगर अब कलयुग है और जीवन में उसे बड़े-बड़े संघर्षों से टकराना है। कैसे वो इन सबको पछाड़ कर जीत हासिल करता है। उसका जो जीवनयुद्ध हैं, वो कैसे जीतता है। ऐसा सीरियल बनाते हैं।’

शायद जाने से पहले ये वो आख़िरी कहानी जिसे राजेश खन्ना दुनिया को सुनाना चाहते थे। ये कहानी शायद उनके दिल के बेहद क़रीब थी...जैसे उनके अंदर छुपी हुई...लेकिन जो राजेश खन्ना की ज़िदगी की अलग अलग घटनाओं के दौरान कहीं ना कहीं बाहर झांकती नज़र आती रही। इस कहानी को समझने के लिए हमें वक़्त के पन्ने पलट कर 69 साल पीछे जाना होगा...वो दिन जब एक बच्चे जतिन खन्ना का जन्म हुआ था। 

राजेश खन्ना की ख़राब होती हालत की ख़बरें अब भी लगातार आ रही थीं। वो अब भी मुंबई के लीलावती अस्पताल में एडमिट थे और उनका पूरा परिवार उनके साथ था। भरत उपमन्यु याद करते हैं, ‘जब लीलीवती में थे एडमिट, मैं मिलने गया था। उन्होंने सबको कमरे से बाहर जाने को कह दिया। हम इन दिनों आध्यात्मिकता और ज्योतिष पर बात करते थे। उस दिन हमने भगवद गीता पर बहुत चर्चा की। फिर मैंने उनसे पूछा, ‘ काकाजी डर लग रहा है क्या?’ वो कुछ पल के लिए चुप हो गए, जैसे कुछ सोच रहे हों। फिर बोले, ‘नहीं यार डर-वर नहीं लग रहा, लेकिन कुछ अच्छे काम मैं और करना चाहता था। वक्त अच्छा आ रहा था, फाइनेंशियली अच्छा टाइम आ गया था, मैं कुछ और फिल्में बनाना चाहता था। लेकिन...क्या करें?...जाना पड़ेगा...’ भरत बताते हैं कि ये बात कहते कहते राजेश खन्ना के चेहरे पर एक अजीब सा दर्द उभर आया। ये तकलीफ़ बीमारी की नहीं थी, बल्कि शायद स अधूरी ख्वाहिश की थी। ख़्वाहिश... कि जाने से पहले अपने किसी रोल के ज़रिए, बस एक बार वो फिर सबके दिलों में बस जाएं। चाहे एक बार ही सही, उनके फैन्स फिर लौटकर आएं। 

कहीं ना कहीं उनके दिल से निकलती ये दुआ शायद सुनी जा रही थी।

कोई टिप्पणी नहीं: