मंत्रिमंडल के सहयोगी भी मेरी नहीं सुनते : मांझी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 5 जनवरी 2015

मंत्रिमंडल के सहयोगी भी मेरी नहीं सुनते : मांझी

बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने सरकार चलाने में अपनी बेबसी आज एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर जाहिर करते हुए कहा कि राज्य को बेहतर बनाने के उनके लक्ष्य को हासिल करने में तो कई बार उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी ही उनकी बात नहीं सुनते। मांझी ने यहां मुंगेर जिले के तारापुर अनुमंडल मुख्यालय में एक जनसभा में कहा कि उनकी सरकार राज्य से उग्रवाद की समस्या को खत्म करना चाहती है और इसके लिए विधानसभा में विधेयक लाकर राज्य के भटके हुए लोगों को पचास लाख की सरकारी विकास योजनाओं में ठेका प्राप्त करने के लिए आरक्षण का प्रावधान करना चाहती है।

माओवादी गतिविधियों में प्राय: बेहद गरीब तबके के लोग शामिल हैं जो किसी कारणवश सही रास्ते से भटक गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर सरकार सरकारी ठेका में उनलोगों के लिए पचास लाख रुपये तक के ठेके के आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित कर देती हैं। तो समाज की मुख्य धारा से भटके लोगों के हाथों में काम होगा और बिहार से उग्रवादी गतिविधियां हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगी। मांझी ने कहा कि विधानसभा में इस विधेयक को पारित कराने में ही अपने मंत्रिमंडल के कुछ सहयोगियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं उनके सहयोग से विधेयक को विधानसभा में पारित कराने में सफल होऊंगा। उन्होंने कहा कि उनका यह फैसला मंत्रिमंडल के सहयोगियों को नहीं पच रहा।

मुख्यमंत्री ने अपने ख़ास अंदाज में कहा कि बात नहीं पच रही तो क्या हम पचा देंगें। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुझे टेस्ट तो कुछ वन डे खेलने की बात कर रहे हैं, लेकिन हम तो 20-20 खेल रहे हैं। जो काम कह देंगे उसे करना होगा। मांझी ने राज्य के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ी जाति, पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यकों को गोलबंद होकर एक मजबूत ताकत बनाने का आह्नान किया। उन्होंने कहा कि अगर आप लोग एकजुट नहीं होते हैं। तो आप अपना अधिकार प्राप्त नहीं कर सकेंगें और आपकी तकदीर कभी भी नहीं सुधर सकेगी।

मुख्यमंत्री के बयान पर जदयू के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजधानी पटना में मीडियाकर्मियों द्वारा सवाल किए जाने पर साफ किया कि उन्हें इस विषय की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी विषय की जानकारी नहीं हो तो उस पर प्रतिक्रिया कैसे दी जा सकती है। वहीं बीजेपी ने कहा कि सच्चाई कभी न कभी बाहर आ ही जाती है। सरकार का रिमोर्ट मुख्यमंत्री के बजाए नीतीश कुमार के पास है और वे जैसा चाहते हैं वैसा ही होता है।

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