दुनिया भर के निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सब्सिडी को तर्कसंगत बनाने, कराधान ढांचे की विश्वसनीयता बहाल करने तथा जरूरत पड़ने पर बीमा संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद का संयुक्त अधिवेशन बुलाने के संकेत दिये। अपने पहले पूर्ण बजट को पेश करने की तैयारी में लगे वित्त मंत्री जेटली ने यहां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के सामने अपनी राजकोषीय योजना की एक रूपरेखा पेश करते हुए कहा कि सब्सिडी को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाएगा बल्कि उसे तर्कसंगत बनाया जाएगा ताकि सरकारी खर्चों में कमी की जा सके।
दावोस पहुंचने के दूसरे दिन एक के बाद एक दो कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए जेटली ने विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने सरकार के समक्ष आ रही चुनौतियों का जिक्र किया तथा देश में कारोबार में सुगमता की जरूरत भी बताई। उन्होंने अमेरिका व रूस के साथ भारत के रिश्तों पर भी बात की। जेटली ने कहा, जहां तक सब्सिडी में सुधार का सवाल है तो पहला सुधार इसी माह से शुरू हो चुका है। पहली जनवरी से रसोईं गैस पर सब्सिडी सीधे ग्राहक के बैंक खाते में डाली जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘अगले चरण में हमें उन परिवारों को निकालना है जो इसके पात्र नहीं हैं। जिन इलाकों में बिजली नहीं है वहां मिट्टी के तेल का इस्तेमाल ईंधन व रोशनी दोनों काम में होता है। पर कई क्षेत्रों में केरोसिन का दुरुपयोग हो रहा है। ऐसे में सब्सिडी सुधार का अगला क्षेत्र जो हमें देखना है वह केरोसिन है।’
वित्त मंत्री जेटली सीआईआई व बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप द्वारा आयोजित ब्रेकफास्ट बैठक तथा डब्ल्यूईएफ में भारत से संबंधित एक सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘भारत जैसे देश में, जहां एक-तिहाई आबादी गरीबी में जीवन बिता रही है, सब्सिडी को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है और न ही वांछनीय। लेकिन हमें सब्सिडी को सुसंगत बनाना होगा।’
सरकार के समक्ष कई अध्यादेशों को कानून में बदलने के लिए काफी कम समय बचा है। जेटली ने उम्मीद जताई कि बीमा विधेयक राज्यसभा में पारित हो जाएगा, क्योंकि कांग्रेस भी इसके पक्ष में है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है और इसमें छह माह से अधिक का विलंब होता है तो हम संसद का संयुक्त सत्र बुलाएंगे जहां हमारे पास बहुमत है।
जेटली ने कहा कि ऐसा भी कानून है जिसमें यदि कोई अध्यादेश के दौरान निवेश करता है, तो उसमें परिवर्तन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, ‘ऐसे में हम चाहते हैं कि निवेशक सीधे आएं। जो 31 मार्च से पहले आएंगे उन्हें स्थायी प्रवेश मिलेगा।’ पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के पिछली तारीख से कर के विवादास्पद फैसले की ओर इशारा करते हुए जेटली ने कहा कि एक प्रमुख चुनौती भारतीय कराधान ढांचे पर विश्वसनीयता फिर कायम करने की है।
वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऊंची कर दरों के खिलाफ हैं। ‘हम ऊंची कर वाली सरकार नहीं हैं। हम उपभोक्ता के हाथ में अधिक पैसा रखने में विश्वास करते हैं, जिससे वे अधिक खर्च कर सकें।’ इस सवाल कि क्या विनिर्माण को प्रोत्साहन के लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) कम किया जाएगा या समाप्त किया जाएगा, जेटली ने कहा कि वह ऐसा तब तक नहीं कर सकते जब तक कि विनिर्माण में तेजी नहीं आती या उन्हें अधिक राजस्व नहीं मिलता। जेटली ने कहा कि सरकार के पास अगले दो वित्त वर्षों में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के तीन प्रतिशत पर लाने की रूपरेखा है। इस साल का लक्ष्य 4.1 प्रतिशत का है।
भारत-अमेरिका संबंधों के बारे में जेटली ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते पिछले करीब डेढ़ दशक से स्थिर हैं। उन्होंने कहा, ‘पिछली राजग सरकार के अमेरिका के साथ बेहतरीन संबंध थे। संप्रग सरकार ने भी इसे आगे बढ़ाया। हम सहयोग के क्षेत्र बढ़ा रहे हैं और मतभेदों को कम कर रहे हैं।’ भारत के रूस के साथ संबंधों पर वित्त मंत्री ने कहा कि दोनों देश हमेशा से अच्छे दोस्त रहे हैं।
जेटली ने जोर देकर कहा कि अलग-अलग देशों के साथ दोस्ती में कोई विरोधाभास नहीं है। ‘रूस महत्वपूर्ण समय में हमारे साथ खड़ा रहा। कभी हम अपनी रक्षा जरूरतों के लिए काफी हद तक रूस पर निर्भर थे।’ वित्त मंत्री कहा कि सरकार भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कदम उठा रही है। नयी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ‘भ्रष्टाचार’ शब्द का दबी जुबान से भी जिक्र नहीं हुआ है। जेटली ने कहा कि भ्रष्टाचार से न केवल व्यापार करने की लागत बढ़ती है, बल्कि इससे देश का भरोसा कम होता है।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘मैं सार्वजनिक तौर पर कह चुका हूं कि मै गरीबों व कारोबार का समर्थक हूं। मुझे दोनों के बीच विरोधाभास नहीं दिखाई देता।’ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को सबसे महत्वपूर्ण कर सुधार बताते हुए वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस बारे में विधेयक संसद के आगामी सत्र में पारित हो जाएगा। जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजकाज के संचालन में एक नया रवैया लेकर आए हैं। मंत्रियों के चयन में भी उन्होंने ऐसा ही किया है।

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