विशेष आलेख : बीसीसीआई में शुरू हुआ किस्‍सा कुर्सी का - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 25 जनवरी 2015

विशेष आलेख : बीसीसीआई में शुरू हुआ किस्‍सा कुर्सी का


  • - कोर्ट के फैसले के बाद बीसीसीआई अध्यक्ष पद के लिए राजनीति तेज 
  • - किंग मेकर की भूमिका में जेटली 

सुप्रीम कोर्ट की ओर से एन श्रीनिवासन को दरकिनार किए जाने के बाद देश की सबसे अमीर खेल संस्था बीसीसीआई अध्यक्ष पद के लिए राजनीति शुरू हो गई है। अब इस बात की चर्चा हो रही है कि अगला बीसीसीआई अध्यक्ष कौन होगा? कई नामों की चर्चा है। इसमें एक बड़ा नाम है शरद पवार का, जो मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। अब तक बोर्ड से दूरी बनाकर रहने वाले शरद पवार ने अध्यक्ष पद के लिए ताल भी ठोक दी है। उन्होंने अपने करीबियों को चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटने के लिए भी कह दिया है। पवार आईसीसी के भी अध्यक्ष भी रह चुके हैं, मगर दिल्ली में सत्ता बदलने के साथ ही बीसीसीआई में भी सत्ता का समीकरण बदल गया है। एक दौर में बीसीसीआई से लेकर आईसीसी तक पवार का दबदबा था। लेकिन अब यह रुतबा बीजेपी के कद्दावर नेता और मौजूदा वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास है। राजनीति का चक्र कुछ ऐसा घूमा है कि किंग मेकर की भूमिका में अरुण जेटली हैं। उनके पास अभी सबसे अधिक वोट हैं। लेकिन राजनीतिक रंजिश की वजह से जेटली, पवार को अपना समर्थन देने के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं श्रीनिवासन के समर्थक क्रिकेट एसोसिएशन, जिसमें अधिकतर दक्षिण के संघ हैं, भी पवार का समर्थन करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में यदि पवार को जेटली के समर्थन वाले संघों का साथ नहीं मिलता है तो उनके लिए जीतना मुश्किल होगा। साथ ही पवार के विरोधी इस बात को उठाएंगे कि उनके बीसीसीआई अध्यक्ष रहने के दौरान ही उस 6.2.4 धारा में संशोधन किया गया था जिससे बीसीसीआई अधिकारियों को व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ने की छूट मिल गई थी और जिसके कारण हितों के टकराव का मुद्दा उठा जिसे बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। वैसे इस बार अध्यक्ष बनने की बारी जेटली की ही थी। लेकिन वित्त मंत्री बनने के बाद यह संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में जेटली खेमा कलकत्ता एसोसिएशन के जगमोहन डालमिया को अपना समर्थन दे सकते हैं। डालमिया को दक्षिण के श्रीनि समर्थक एसोसिएशन का भी सहयोग मिल सकता है। वहीं एक और नाम जो चर्चा में है, वह है राजीव शुक्ला का। इनको जेटली का समर्थन तो हासिल है और शायद पवार गुट का भी। लेकिन इनके नाम का विरोध भी हो रहा है। ऐसे में जगमोहन डालमिया का नाम दौड़ में सबसे आगे है। मगर सब कुछ इस पर निर्भर करेगा कि बीजेपी क्या करेगी? क्या बीजेपी कोई अपना प्रतिनिधि मैदान में उतारेगी या फिर इन्हीं में से किसी पर अपनी चाल चलेगी। 


क्या कहते हैं आंकड़े 
 श्रीनिवासन के चुनाव की रेस से बाहर होने से ग्रुप के ज्यादा समर्थक अब नेतृत्व विहीन हो गए हैं और उनके पास 31 सदस्यों के हाउस में बहुमत जुटाने के लिए उम्मीद नहीं बची है। ऐसी स्थिति में उनकी कोशिश अध्यक्ष के तौर पर एक कठपुतली प्रतिनिधि को उतारने और फिर उसे समर्थन देने के लिए बीजेपी को मनाने की होगी। बीजेपी की बीसीसीआई की आठ इकाइयों पर नियंत्रण है। ऐसे में बहुमत जुटाने और चुनाव जीतने के लिए जरूरी 16 वोट जुटाने के लिए बीजेपी का समर्थन महत्वपूर्ण होगा।

गांगुली भी हैं रेस में! 
हालिया घटनाक्रम को देखे तो ऐसा लगता है कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली भी बोर्ड अध्यक्ष पद की रेस में हैं। बताया जा रहा है कि गांगुली जेटली खेमे के प्रतिनिधि बन सकते हैं। जेटली का आठ इकाईयों पर नियंत्रण है। बृहस्पतिवार को श्रीनिवासन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अचानक सौरभ गांगुली के बीजेपी से जुड़ने की खबरों में तेजी आ गई । हालांकि बाद में गांगुली ने इन खबरों का खंडन भी कर दिया लेकिन अंदर खाने से खबर है कि गांगुली की ‘पैराशूट’ एंट्री कराई जा सकती है। गांगुली के आने से डालमिया खेमा भी बिखर सकता है। क्योंकि वह बंगाल क्रिकेट के आइकन के रूप में जाने जाते हैं। 

पवार की ताकत  - पवार को पूर्व बीसीसीआई अध्यक्षों शशांक मनोहर और इंद्रजीत बिंद्रा का समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा पवार को पूर्व सदस्यों अजय शिरके, संजय जगदाले और चिरायु अमीन जैसे साफ. छवि के मजबूत लोगों का समर्थन है।  

कमजोरी -  पवार के ग्रुप के साथ समस्या यह है कि बिना बीजेपी के समर्थन के उनको भी बहुमत हासिल नहीं हो पाएगा। क्योंकि राजनीतिक समीकरण बीजेपी को पवार का समर्थन देने की इजाजत नहीं देते हैं। हालांकि पवार के कद और पहचान से बड़ा शायद ही बीसीसीआई में और कोई है । 

डालमिया की ताकत - आईसीसी और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष डालमिया को श्रीनिवासन का समर्थन है। ऐसे में श्रीनि खेमे में डालमिया को तवज्जो मिल सकती है। वहीं एक स्थिति में जेटली खेमा भी डालमिया का समर्थन करने से गुरेज नहीं करेगा। 

कमजोरी - डालमिया के साथ विश्वास की कमी का मामला जुड़ा है। कई इकाई ऐसे हैं जो डालमिया के कार्यकाल के दौरान उनके रवैये से नाखुश हैं। समय-समय पर इकाईयों ने विरोध भी जताया है। 

राजीव शुक्ला की ताकत - शुक्ला की छवि पवार के मुकाबले बोर्ड इकाइयों में बेहतर है। शुक्ला ने बतौर उपाध्यक्ष बोर्ड इकाईयों के लिए कई बेहतर काम किए हैं।    

कमजोरी - राजीव शुक्ला आईपीएल के विवादास्पद छठे संस्करण के कमिश्नर थे और यह बात उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ  जाती है। 





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दीपक कुमार, 
संपर्क : 9555403291
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