दिल्ली उच्च न्यायालय ने आमिर खान अभिनीत फिल्म पीके के निर्माताओं और निर्देशकों को एक उपन्यासकार की हिंदी में छपी किताब फरिश्ता के कई हिस्सों की कथित साहित्यिक चोरी के मामले में नोटिस जारी किया है। उपन्यासकार ने उच्च न्यायालय में दायर याचिका में ऐसा आरोप लगाया था। यह किताब वर्ष 2013 में छपी थी। न्यायाधीश नाजमी वजीरी ने फिल्म के निर्देशकों विधु विनोद चोपड़ा और राज कुमार हिरानी, उनकी निर्माण कंपनियांे और पटकथा लेखक अभिजीत जोशी से कहा है कि वे इस संदर्भ में साक्ष्य पेश करने के लिए 16 अप्रैल से पहले उच्च न्यायालय के संयुक्त पंजीयक के समक्ष पेश हों। न्यायाधीश ने कहा, नोटिस जारी किया जा चुका है। इस आरोप के संदर्भ में उन्हें जो भी कहना है, संयुक्त पंजीयक के समक्ष कह लेने दीजिए। अदालत ने यह नोटिस कपिल ईसापुरी की उस याचिका के आधार पर जारी किया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि फिल्म के निर्देशकों चोपड़ा और हिरानी, उनकी निर्माण कंपनियों और पटकथा लेखक जोशी ने उपन्यास से किरदार, विचारों की अभिव्यक्ति और दृश्य चुराए हैं।
कपिल ने निर्माताओं से एक करोड़ रुपये के दंडात्मक मुआवजे के साथ-साथ अपने काम के लिए श्रेय की भी मांग की है। वकील ज्योतिका कालरा की मदद से दायर की गई याचिका में कपिल ने दावा किया था कि अपने उपन्यास में उन्होंने तथाकथित धर्मगुरुओं की अंधभक्ति की आलोचना की है। और इसके साथ ही उन्होंने उसमें कहा है कि धर्म का पेशा प्राकतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित और कृत्रिम है। और लोगों के एक समूह के बीच कोई भी उनके अलग-अलग धर्मों की पहचान नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि फिल्म के जरिए उठाए गए विभिन्न मुद्दे उनकी किताब में से नकल किए गए हैं।
याचिका में दावा किया गया, इस उपन्यास में कई और भी ऐसी स्थितियां हैं, जिनमें छिटपुट बदलाव और गैरजरूरी रूपांतरण करके प्रतिवादियों ने बड़ी सफाई से नकल की है। आमिर खान, अनुष्का शर्मा, संजय दत्त और सुशांत सिंह राजपूत की मुख्य भूमिकाओं वाली फिल्म पीके दरअसल धर्मगुरुओं पर व्यंग्य है। फिल्म दूसरे ग्रह से आए एक व्यक्ति (आमिर) की कहानी कहती है, जो एक शोध अभियान के तहत धरती पर आता है और उसकी दोस्ती एक टीवी पत्रकार जगत जननी (अनुष्का) से हो जाती है। वह उससे धार्मिक हठधर्मिता और अंधविश्वासों से जुड़े सवाल पूछता है।
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