भू-अधिग्रहण अध्यादेश को रद्द कराने के लिए विन्ध्य के किसान आन्दोलन हेतु कमर कसे – उमेश तिवारी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 3 जनवरी 2015

भू-अधिग्रहण अध्यादेश को रद्द कराने के लिए विन्ध्य के किसान आन्दोलन हेतु कमर कसे – उमेश तिवारी

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टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने मोदी सरकार द्वारा भू-अधिग्रहण के संबंध में लाये गए अध्यादेश को कार्पोरेट को किसानो की लूट की छुट देने वाला किसान विरोधी अध्यादेश बत्ताते हुए नए अध्यादेश को तत्काल रद्द करने की मांग की है.| श्री तिवारी ने कहा कि भू अधिग्रहण कानून में किसानो के पक्ष के सभी प्रावधानों को संसोधित कर कानून को अंग्रेजो से भी बदत्तर बना दिया है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता | 

श्री तिवारी ने कहा कि किसानो ने बड़ी कुर्बानिया दे कर तथा सतत आन्दोलन चलाकर कई वार राज्य सरकारे पलटकर अंग्रेजो के बनाये हुए भू-अधिग्रहण कानून को रद्द कराने में सफलता प्राप्त की थी | श्री तिवारी ने कहा कि नए भू-अधिग्रहण कानून को बनाने के लिए संसदीय समिति के समक्ष सुश्री मेधा पाटकर जी के नेतृत्व में कई बार जन आन्दोलनो के राष्ट्रीय समन्वय का पक्ष रखा गया था | इंदौर से भाजपा की सांसद संसदीय समिति की अध्यक्ष (अब लोकसभा अध्यक्ष) थी | सभी दलों की सहमती के आधार पर सांसद में चर्चा के बाद सर्वसम्मति से भू अर्जन में पारदर्शिता एवं सही पुर्नवास कानून 2013 पारित किया गया था|. 

श्री तिवारी ने कहा कि हाल ही में संपन्न हुए संसद सत्र के दौरान सरकार द्वारा भू-अधिग्रहण कानून में संसोधनो को लेकर चर्चा न कराया जाना यह बताता है कि केंद्र सरकार संसदीय लोकतंत्र को ठेंगा दिखाकर कार्पोरेट की सेवा के लिए n`<+ladfYir है. पीपीपी प्रोजेक्ट के लिए 70% तथा निजी कंपनियों के लिए 80 फीसदी प्रभावित किसानो की सहमति की अनिवार्यता के प्रावधान को समाप्त किया जाना सोशलइम्पेक्ट अध्ययन की अनिवार्यता , न्यूनतम खेती के अधिग्रहण करने के प्रावधानों को समाप्त करने तथा धरा  24(2) में 5 वर्ष की समय सीमा समाप्त करने से विकास परियोजनाओ के नाम पर जमीन की लूट को क़ानूनी मान्यता मिल जाएगी | अंग्रजो के 1894 में बनाये गए भू-अर्जन कानून में बदलाब इसलिए किया गया था ताकि विकास के नाम पर जवरजस्ती किए जा रहे अधिग्रहण से किसानो के साथ हो रहे तीब्र टकराव को समाप्त किया जा सके| वर्तमान अध्यादेश टकराव को बढाएगा देश में अशांति पैदा होगी|

श्री तिवारी ने बताया कि मोदी सरकार के गठन के बाद से ही यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि सरकार द्वारा अब तक बने जनमुखी कानूनों में बदलाव किया जाएगा. पहले श्रम कानून बदलने तथा अब भू-अधिग्रहण अध्यादेश लाने से वह आशंका सही सावित हुई है| देश, प्रदेश सहित विन्ध्य के किसानों को संघर्ष हेतु एकजुटता के साथ कमर कसनी होगी |

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