जनता दल यूनाईटेड .जदयू. के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आमिर खान की चर्चित फिल्म पीके को एक बेहतर फिल्म बताया और इसे राज्य में टैक्स फ्री करने की सलाह देते हुए कहा कि इसमें आस्था पर नहीं बल्कि पाखंड पर चोट है। श्री कुमार ने कल रात फिल्म देखने के बाद सोशल नेटवर्किग साईट फेसबुक पर कहा कि फिल्म काफी अच्छी बनी है और इसमें बहुत सहज ढंग से संदेश है। इस फिल्म में कहीं भी आस्था पर चोट नहीं थी .पाखंड पर चोट है। उन्होंने कहा कि फिल्म काफी अच्छे ढंग से फिल्माई गयी है और इसपर कैसे किसी को एतराज हो सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह इस बात को उजागर करता है .जो पाखंड में विश्वास करता है और जो पाखंडी हैं वहीं इसका विरोध कर सकते हैं. आस्थावान नहीं। कोई किसी रास्ते को स्वीकार करता है या किसी धर्म को मानता है तो आस्थावान को इससे शिकायत नहीं हो सकती है।
श्री कुमार ने कहा कि उनकी समझ में यह पिंल्म सभी को देखनी चाहिए। आज देश और समाज में पाखंडी लोग जिस तरह धर्म के नाम पर लोगों को बांटना चाहते हैं और ठेकेदारी कर रहे हैं .. वे राँग नंबर हैं..1 इस फिल्म का यह साफ संदेश है कि राँग नंबर डायल मत कीजिए और उससे सावधान रहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वे भी हिन्दू है और इस फिल्म को देखने वाले अधिकांश लोग हिन्दू ही होंगे क्योंकि हिन्दुों की आबादी सबसे ज्यादा है। ऐसे में जब उन्हें कोई एतराज नहीं है तो क्या पूरे देश के हिन्दू समाज के लोगों ने इन पाखंडी लोगों को कोई अधिकार पत्र साैंप दिया है कि वे पूरे समाज की तरपं से बात करें। उन्होंने कहा कि एक कलाकार को उसकी कला की नजर से देखना चाहिए .न कि उसके मजहब को देखना चाहिए।
श्री कुमार ने कहा कि टेलीविजन पर दिखाया गया एक बहुचर्चित धारावाहिक महाभारत के पटकथा और संवाद लिखने वाले राही मसूम रजा का धर्म इस्लाम था। उस समय किसी ने यह सवाल क्यों नहीं उठाया कि जो हिन्दू नहीं है वह कैसे महाभारत के र्मम को जानेगा लेकिन उस समय तो उनकी खूब प्रशंसा हुई और किसी ने कोई सवाल नहीं उठाया। श्री कुमार ने कहा कि आज आमिर खान पाखंड पर चोट करते हैं तो पाखंडी लोग उनके खिलाफ हो जाते हैं। उन्होंने आमिर खान की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे एक बेहतर कलाकार हैं जो स्वाभाविक अभिनय करते हैं .उनका काम देखने लायक है। उनकी हर फिल्म वह देखते हैं। उन्होंने कहा कि इस पिंल्म को गांवशगांव में लोगों को देखना चाहिए तभी लोगों को आस्था और पाखंड में फर्क समझ आयेगा. इसलिए वह बिहार सरकार को सलाह देंगे कि फिल्म को राज्य में टैक्स फ्री कर दिया जाये। इस फिल्म को वह दस में दस नंबर देते हैं।

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