सीधी जिले का विखण्डन करके शिवराज सिंह ने सिंगरौली जिला बनाकर बड़ा ढिढोंरा पीटा था कि मैं सीधी को गोंद लेता हूं और इस जिले को विकास की बुलंदियों तक ले जाऊंगा और सिंगरौली जिले को सिंगापुर बनाऊंगा। विखण्डन के लगभग 10 वर्ष पूरे होने वाले हैं लेकिन न सीधी जिला विकास की बुलंदी को छुसका, न ही सिंगरौली, जिला- सिंगापुर बन सका। हां यह अवश्य हुआ कि सीधी एवं सिंगरौली दोनों जिले जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं उद्योगपतियों के लिए चारागाह हो गये। उक्त बातें एक विज्ञप्ति में टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कही है। श्री तिवारी ने सीधी जिले में मची लूट का नमूना बताते हुये कहा कि सीधी जिले में पदस्थ सहायक आयुक्त आदिवाशी विभाग एल0आर0 मीना द्वारा नियमों के विरूद्ध मनमानी तरीके से लगभग 200 कर्मचारियों की नियुक्तियां, स्थानान्तरण एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण किया गया तथा अन्य कई प्रकार के आर्थिक भ्रष्टाचार किये । मीना द्वारा लूट का यह खेल मध्यप्रदेश शासन आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग मंत्रालय बल्लभ भवन भोपाल दिनांक- 08.11.2005 के उस आदेश के आड़ में किया गया जिसमें कहा गया था कि आश्रम शालाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों पर पंचायतों, स्थानीय निकाय या पालक शिक्षक संघ के माध्यम से नियुक्ति प्रदान की जाय। सूचना के अधिकार में प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला पंचायत सीधी एवं नगरपालिका सीधी द्वारा यह बताया गया कि हमारे यहां से सहायक आयुक्त आदिवासाी विकास कार्यालय को किसी प्रकार की नियुक्ति या पदस्थापना हेतु कोई प्रस्ताव या अनुशंसा पारित नहीं किया गया है। शासन के आदेश को धता बताते हुये मीना ने नियुक्ति हेतु जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की अनुशंसा को आधार बनाकर करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार का बंदरबांट किया। जिन जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा का उल्लेख नियुक्ति आदेश में मीना द्वारा किया गया है उनमें शामिल हैं श्री अजय सिंह ’’विधायक चुरहट’’ (तब नेता प्रतिपक्ष) श्री गोविन्द मिश्रा (तब सांसद), श्री केदारनाथ शुक्ला ’’विधायक सीधी’’, श्रीमती रीती पाठक ’’सांसद सीधी’’ ( तब अध्यक्ष जिला पंचायत सीधी ), श्री केमला प्रजापति उपाध्यक्ष जिला पंचायत सीधी तथा कई अधिकारियों के सगे संबंधियों को नियुक्ति की गई।
मीना के भ्रष्टाचार पर कार्यवाही हेतु कुछ अधिवक्ताओं द्वारा प्रयास किया गया तो यहीं जनप्रतिनिधि अधिकारी तथा भाजपा संगठन के पदाधिकारी जो मीना से टुकड़ा पाते थे उसका साथ दे रहे थे और अपने ओहदे का दुरूपयोग करके शिकायतकर्ताओं के विरूद्ध फर्जी मुकदमा कायम कराया। यहां तक कि मीना को संरक्षण, मंत्री स्तर से भी प्राप्त था। जवाबदेहों की गद्दारी के कारण मीना के खिलाफ कार्यवाही हेतु हाईकोर्ट जाना पड़ा जहां हाईकोर्ट के डण्डे के डर से मीना के विरूद्ध कार्यवाही संभव हो सकी, आज वह सस्पेण्ड हो चुका है आने वाले समय में वह बर्खास्त भी होगा एवं जेल भी जायेगा। आखिर भ्रष्ट भाजपा सरकार का भ्रष्ट सिस्टम उसे नहीं बचा पाया तथा जनप्रतिनिधि एवं नौकरसाही की मिली-भगत का भी भंाडा फूट गया । मीना को फर्जी जाति प्रमाण-पत्र बनाकर नौकरी पाने का दोषी भी जिला विदिशा के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा बताया जा चुका था।
श्री तिवारी ने कहा कि सीधी जिले के लुटाई के खेल में अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने जो टीम बना रखी है उसमें मीना तो एक नमूना है यहां नरेगा में लूट, शौंचालय निर्माण में लूट, जलग्रहण में लूट, पशु सेड में लूट, माइनिंग की लूट, महान नहर निर्माण मंे लूट की सही जांच और उचित कार्यवाही हो जाय तो लुटेरों की दोनों टीम (जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों) के खिलाडि़यों का गोल पोस्ट पड़रा (सीधी) केन्द्रीय जेल होगा।

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