देश में निर्मित पहला लड़ाकू विमान तेजस भारतीय वायु सेना को मिला - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शनिवार, 17 जनवरी 2015

देश में निर्मित पहला लड़ाकू विमान तेजस भारतीय वायु सेना को मिला

भारतीय रक्षा एवं वैमानिकी के क्षेत्र में शनिवार को एक नये युग का सूत्रपात हुआ, जब देश में बना पहला हलका लड़ाकू विमान तेजस रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने भारतीय वायु सेना को सौंपा। 32 साल पहले देश में ही हलके लड़ाकू विमान बनाने के इस मुश्किल और महत्वाकांक्षी सफर की शुरुआत हुई थी, जिसका पहला मील का पत्थर आज तेजस के रूप में भारतीय वायुसेना को सौंपा गया। इस विमान का सौंपा जाना एक ऐसी परियोजना के तहत देश में ही निर्मित किए जा रहे लड़ाकू विमानों को शामिल करने की प्रक्रिया है जिसपर 8,000 करोड़ रुपए की लागत आ चुकी है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड की इस परियोजना पर 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है। सूत्रों के अनुसार सौंपे गए विमान को प्रारंभिक परिचालन मंजूरी-2 मिल चुकी है जो इस बात का संकेत है कि तेजस विभिन्न परिस्थितियों में उड़ सकता है। अंतिम परिचालन मंजूरी (एफओसी) वर्ष के अंत तक मिल जाने की उम्मीद है।
विमान के इस संस्करण में नवीनतम इलेक्ट्रानिक युद्ध विशेषता, जो दो हफ्ते पहले हल्के लड़ाकू विमानों में से एक में लगाई गई, हवा के बीच पुन: ईंधन भरने, लंबी दूरी की मिसाइल दागने की क्षमता, और अन्य चीजों का अभाव है, जिन्हें एफओसी मंजूरी वाले विमानों में लगाया जाएगा।

कोई टिप्पणी नहीं: