अमेरिका ने पाकिस्तान पर मेहरबानी की खबर का खंडन किया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 6 जनवरी 2015

अमेरिका ने पाकिस्तान पर मेहरबानी की खबर का खंडन किया

जम्मू-कश्मीर सीमा पर हो रही गोलीबारी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. सीजफायर उल्लंघन की ओट में घुसपैठ की वारदात भी सामने आई है, वहीं अमेरिका ने उन खबरों का खंडन किया है, जिसमें पाकिस्तान पर मेहरबानी दिखाने और आतंकवाद से निपटने का सर्टिफिकेट दिए जाने की बात कही गई है. अमेरिका का कहना है कि उसने पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अभि‍यानों के लिए कोई प्रमाणपत्र नहीं दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि 2013 के बाद पाकिस्तान को कोई फंड जारी नहीं किया गया है.

भारत-पाक में बढ़ते तनाव को पाटने के लिए बातचीत को अहम बताते हुए अमेरिका ने कहा है कि वह दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच बातचीत को प्रोत्साहन देता है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी ने सोमवार को कहा, 'निश्चित रूप से हम दोनों देशों के बीच बातचीत का समर्थन करते हैं. बीते बरस कुछ कदम उठाए गए हैं और जैसा कि आप जानते हैं, यहां कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं. निश्चित तौर पर, अभी और काम किया जाना बाकी है.' उन्होंने कहा 'जिन परिवारों ने अपने परिजनों को खोया है, उनके साथ हमारी संवेदनाएं हैं. सीमा पर तनाव को लेकर निश्चित रूप से हमारी चिंता बनी हुई है और हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं. हम दोनों देशों के बीच बातचीत को प्रोत्साहन देते हैं.'

गौरतलब है‍ कि इससे पहले खबर आई थी कि अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने पाकिस्तान सरकार को अल कायदा, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का सर्टिफिकेट दिया है. जॉन केरी के इस सर्टिफिकेट से पाकिस्तान 'केरी-लुगार बिल' के तहत अमेरिका से सहायता पैकज पाने का हकदार हो गया है. इस बिल में आतंक के खिलाफ कार्रवाई को महत्वपूर्ण शर्त माना गया है, जिसकी पूर्ति के बाद ही अमेरिका से आर्थिक सहायता को हरी झंडी मिलती है.

कोई टिप्पणी नहीं: