उत्तराखंड की विस्तृत खबर 03 जनवरी) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 3 जनवरी 2015

उत्तराखंड की विस्तृत खबर 03 जनवरी)

संयुक्त संघर्ष समिति ने किया बैठक का बहिष्कार

देहरादून, 3 जनवरी(निस)। इको सेंसेटिव जोन पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक का संयुक्त संघर्ष समिति ने बहिष्कार कर दिया। समिति से जुड़े लोग बैठक के औचित्य पर सवाल उठाते जिला सभागार से बाहर निकल गए। शनिवार को उत्तरकाशी  के जिलाधिकारी सी.रविशंकर ने जिला सभागार में इको सेंसेटिव जोन के मुद्दे पर बैठक बुलाई थी। सेंसेटिव जोन के दायरे में आने वाले 88 गांवों के ग्राम प्रधानों समेत अन्य लोगों को भी बुलाया गया था। बैठक शुरू होने के कुछ देर बाद कलक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे संयुक्त संघर्ष समिति के लोग नारेबाजी करते हुए सभागार में पहुंचे। इनमें क्षेत्र के कई पंचायत प्रतिनिधि भी शामिल थे। बैठक शुरू होने पर जिलाधिकारी ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य इको सेंसेटिव जोन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करना है। ताकि प्रभावित होने वाले क्षेत्र के लोग इसे ठीक तरह से समझ सकें, लेकिन संयुक्त संघर्ष समिति के लोगों ने बैठक के औचित्य पर सवाल उठा दिया। भटवाड़ी के ब्लॉक प्रमुख चंदन सिंह पंवार ने कहा कि जब उत्तराखंड सरकार कैबिनेट में इको सेंसेटिव जोन को निरस्त करवाने को केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखने का निर्णय ले चुकी है, तब इस बैठक का कोई औचित्य नहीं रह जाता। संघर्ष समिति ने चिंता जताई कि यह बैठक भी इको सेंसेटिव जोन के कायदे कानूनों को लागू करवाने की दिशा में एककदम है। उसके बाद समिति से जुड़े सभी लोग नारेबाजी करते हुए बैठक से बाहर आग गए। हालांकि सभागार में शेष रह गए ग्राम प्रधानों व विभिन्न संगठनों के लोगों के साथ सेंसेटिव जोन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष जशोदा राणा, नगर पालिका अध्यक्ष जयेंद्री राणा, सीडीओ जीएस रावत, एसडीएम, हरिगिरी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

प्रदर्शन कर जताया विरोध
बैठक का बहिष्कार करने के बाद संयुक्त संघर्ष समिति ने नगर क्षेत्र में जुलूस प्रदर्शन कर इको सेंसेटिव जोन के खिलाफ विरोध जताया। कलक्ट्रेट परिसर से शुरू हुआ जुलूस नगर के विभिन्न मार्गो से होता हुआ वापस कलक्ट्रेट परिसर पहुंचा। जुलूस प्रदर्शन में गंगोत्री के पूर्व विधायक गोपाल रावत, भटवाड़ी के ब्लॉक प्रमुख चंदन सिंह पंवार, पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुरेश चैहान, लोकेंद्र बिष्ट, शैलेंद्र मटूड़ा, हुकम सिंह पोखरियाल समेत अनेक लोग शामिल थे। 

पहाड़ में कटौती मैदान में बढ़ोत्तरी कर रही गैस कंपनिया

देहरादून, 3 जनवरी(निस)। पहाड़ के उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध करवाना गैस कंपनी की प्राथमिकता में नहीं है। कंपनी पहाड़ी क्षेत्र के गैस उपभोक्ताओं के कोटे में कटौती कर मैदानी क्षेत्रों में आपूर्ति बढ़ा रही है। इस कारण पौड़ी में बीते एक पखवाड़े के दौरान 2500 सिलेंडरों की कम आपूर्ति हुई है। सर्दियों के मौसम में रसोई गैस की खपत बढने के कारण मांग में भी तेजी रहती है। गैस कंपनी भी इस बात से भली प्रकार वाकिफ है। पर बीते एक पखवाड़े से पौड़ी क्षेत्र में गैस आपूर्ति की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। गैस के कम सिलेंडर आने के कारण उपभोक्ताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शहर के डीएवी, चोपड़ा, पावर हाउस, पूल्ड हाउस आदि वितरण केंद्रों में गैस वितरित नहीं हो पाया है। परेशान उपभोक्ता गढ़वाल गैस प्रबंधन के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन वहां से सप्लाई कम होने की बात कही जा रही है। पर समस्या का मूल कारण पहाड़ी क्षेत्रों के उपभोक्ताओं की अनदेखी है। क्योंकि कंपनी पहाड़ी क्षेत्र के कोटे को कम कर मैदानी क्षेत्रों में आपूर्ति कर रही है। प्रबंधक गढ़वाल एनके नैथानी का कहना है कि मैदानी क्षेत्रों में आपूर्ति बढने से यहां गैस कम पहुंच पा रही है। इस वजह से कई जगहों पर सिलेंडरों का वितरण समय पर नहीं हो पाया है। आपूर्ति नियमित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

डीबीटीएल रजिस्ट्रेशन की रफ्तार भी धीमी
डीबीटीएल योजना के तहत उपभोक्ताओं को रजिस्टर्ड करने का काम भी बेहद धीमा चल रहा है। गढ़वाल गैस प्रबंधन के 36 हजार रसोई गैस उपभोक्ताओं में से अभी तक सिर्फ 4400 उपभोक्ता ही योजना से जुड़ पाए हैं। एजेंसी काम तो करवा रही है पर रफ्तार इतनी धीमी की उपभोक्ताओं को लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसे में उपभोक्ताओं को सिलेंडर महंगे दामों पर खरीदना मजबूरी है। 

रोजगार को लेकर शासन ने अपनाया उदासीन रवैया

देहरादून, 3 जनवरी(निस)। कई माह से वर्तमान भर्ती में स्वीकृत पदों और आपदा ग्रस्त जनपदों के लिए सृजित पदों को जोडने की मांग कर रहे बीएड टीईटी पास अभ्यर्थियों पर शासन का उदासीन रवैया सामने आ रहा है। शिक्षा मंत्री के निर्देश के बावजूद भी शासन स्तर पर इसके लिए कोई तैयारी नहीं की गई है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशिक्षित युवाआं को रोजगार देने के लिए रावत सरकार की मशीनरी किस तरह संवेदनशील है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सीएम का पदभार संभालने के कुछ समय बाद कैबिनेट बैठक में कई वर्षो से नौकरी की आश लगाए युवाओं में उम्मीद जगाई थी। जिसके लिए सीएम ने बकायदा कई बार बीएड टीईटी संघटनों को आश्वासन भी दिया। लेकिन आज तक सीएम से मिला आश्वासन पूरा नहीं हो पाया। वहीं नए साल के पहले दिन शिक्षा मंत्री ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक ली और वर्तमान भर्ती में स्वीकृत 389 पदों को शामिल करने और आपदा ग्रस्त जनपदों के लिए सृजित करीब 862 पदों को वर्तमान भर्ती में शामिल करने की कार्यवाही के निर्देश दिए। लेकिन दो दिन बीत जाने के बावजूद भी शासन स्तर पर शिक्षा मंत्री के आदेशों को कोई पालन होता नहीं दिखा है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार न तो 389 पदों को वर्तमान भर्ती में शामिल करने के आदेश किए गए और न ही वित्त में भेजे गए आपदा ग्रस्त जनपदों के पदों को जोडने के लिए कोई कार्यवाही की गई। हालात यह है कि वित्त में इन पदों को भेजे गए कई दिन हो गए हैं। लेकिन हालात यह है कि शासन की ओर से वित्त ेिह्लभाग में इन पदों के लिए रिमांइडर तक नहीं भेजा गया है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश की नौकरशाही किस तरह से शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री पर हावी है। मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के आदेशों का ठीक ढंग से पालन नहीं हो रहा है। 

मुख्यमंत्री के जागने पर जागा प्रशासन

harish rawat
देहरादून, 3 जनवरी(निस)। आश्रयविहीन लोगों के लिए भले ही सरकारी खजाने से लाखों रूपए आवंटित किए गए हों। लेकिन जमीन पर इसका फायदा उन लोगों तक नहीं पंहुच पा रहा है जिनके लिए कंपकंपाती ठंड जान की दुश्मन बनी हुई है। लंबे चैड़े ऑफिसें में एसी की गर्मी में रहने वाले उच्चधिकारी इस बात को शायद महसूस नहीं कर पा रहे हैं। हालात यह है कि सीएम ने फटकार लगाई तो प्रशासन ने कम्बल वितरण की प्रक्रिया तेज कर दी। जबकि इसके लिए पिछले माह की ही लाखों रपए रीलीज हो गया था। लेकिन शायद जिम्मेदार अधिकारियों ने इसको उचित समय पर बांटना जरूरी नहीं समझा। वहीं अब मुख्यमंत्री कम्बल और अलाव की व्यवस्था में ढिलाई बरतने पर जिलाधिकारी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यह बात अलग है कि सीएम के सामने जिला प्रशासन की पोल खुलने के बावजूद भी मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नए साल के दिन से भले ही सड़कों पर उतरकर जन की हालात देखने की ठानी हो। लेकिन सीएम के अंदाज का असर अभी तक अफसरशाही पर नहीं हुआ है। पहले दिन कलेक्ट्रेट में खामियां उजागर होने के बावजूद भी जिला प्रशासन की नींद नहीं खुली। बीती रात को मुख्यमंत्री हरीश रावत सड़कों पर ठंड का जायजा लेने निकले तो यहां प्रशासन की ठंडी व्यवस्था का अनुभव हुआ। आश्रयवीहन लोगों के लिए अलाव की व्यवस्था भी नदारद दिखी तो अलाव के लिए लाखों रूपए का आवंटन भी बेकार नजर आया। सीएम के अलाव और कम्बल की व्यवस्था पर सख्ती के बाद आनन-फानन में करीब पांच सौ कम्बल वितरित किए गए। इसके साथ ही एक हजार कम्बल का वितरण तहसीलों को दिया गया है। एडीएम फाईनेंस देहरादून ने बताया कि करीब चार लाख रूपए कम्बल वितरण के लिए मिले हैं। जिसमें से पन्द्रह सौ कम्बल वितरण की व्यवस्था की गई है। सभी तहसीलदारों को कम्बल वितरण की जिम्मेदारी दी गई है। बताते चले कि पिछले माह करीब 65 लाख रूपए कम्बल और अलाव की व्यवस्था के लिए स्वीकृत किए गए हैं। लेकिन समय रहते इनको वितरित करने की गति नहीं दिखाई गई।

मुख्यमंत्री का औचक निरीक्षण, प्रशासन की खुली पोल

देहरादून, 3 जनवरी(निस)। मुख्यमंत्री ने शनिवार को दून अस्पताल व गांधी पार्क का औचक निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। दून अस्पताल में डाक्टरों से मिलकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही वार्ड में भर्ती मरीजों के पास जाकर उनका हालचाल भी पूछा। सीएम ने इमरजेंसी का निरीक्षण कर उनके द्वारा पूर्व में दिये गये निर्देषो के अनुसार व्यवस्था में हुए सुधार के प्रति सन्तोष जताते हुए न्यूरो वार्ड को थोड़ा और विस्तारित करने के निर्देश दिये। उन्होने कहा कि दून अस्पताल और बेहतर ढंग से लोगो की सेवा करे इसके प्रयास हो, दून अस्पताल केवल अस्पताल नही है, वह मेडिकल कालेज की भांति सुविधा देने वाला अस्पताल बने। यहां की पैथोलाजी व अन्य लैब राउण्ड द क्लॉक कार्य करे इसके प्रयास हो। यहां पर आने वाले मरीजो को सभी आवश्यक सहायता व सुविधाये मिले इसके लिये उन्होने सीएमएस को आवश्यक व्यवस्था के निर्देश दिये। उन्होने अस्पताल में मरीजो से भेंट कर उन्हेे भी नववर्ष की शुभकामनाये दी तथा अस्पताल में मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होने कहा कि दून अस्पताल की इमरजेंसी को और बेहतर किया जाना जनहित में जरूरी है। इसके पश्चात मुख्यमंत्री श्री रावत ने गांधी पार्क का भी निरीक्षण किया। उन्होने पार्क में लोगो से मुलाकात की तथा समस्याओं से अवगत हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले महीने वे इस पार्क में आए थे, तब उन्होने पार्क के अन्दर के गढ्ढांे को भरने व महिला शौचालय के निर्माण के निर्देश दिये थे, इन निर्देशो का पालन न होने पर सीएम ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह नगर निगम प्रशासन की गंभीर लापरवाही है, कि उनके निर्देशों का अभी तक पालन नही हुआ है। उन्होंने मुख्य नगर अधिकारी को निर्देश दिये कि पार्क में जो कमी है तथा उनमें जो सुधार कार्य जनहित में किये जाने है उन पर भी शीइा्र कार्यवाही की जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने वर्ष 2015 को कर्म वर्र्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। जन सेवा के कार्य में प्रतिदिन हम समर्पित भाव से लगे रहे यह हम सबकी जिम्मेदारी भी है। हम सबको साथ चल कर जनता को बेहतर सुविधाये देनी होगी। उन्होने शहरो में स्थापित रैन बसैरो की स्थिति में भी तुरन्त सुधार लाने, वहां पर निराश्रितो को रहने के पूरे इंतजाम करने के भी निर्देश दिये। उन्होने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिये कि सडक किनारे जो भी व्यक्ति बेसहारा पड़ा मिले उसे आवलम्ब अस्पताल अथवा रैन बसेरा में भर्ती कराये। उन्होने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये है कि प्रदेश में ठंड से किसी की भी मौत न हो, इसके लिए जिलाधिकारी जिम्मेदार होंगे। 

रवि की गिरफ्तारी से बुलंद हुए पुलिस टीम के हौसले

देहरादून, 3 जनवरी(निस)। भूरा की फरारी में प्रयोग की गयी स्कार्पियो एवं एक साथी रवि कुमार की गिरफ्तारी से पुलिस टीमों के हौसले बुलंद हैं। भूरा के कई साथियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस अधिकारियों की आस जगने लगी है। पुलिस ने भूरा के एक साथी रवि कुमार को दबोचा । जिसकी निशानदेही पर लूट एवं फरारी में प्रयोग की गयी स्कार्पियो गाड़ी भी बरामद की गयी थी। भूरा को फरार हुए १८ दिन हो चुके हैं और अब तक भूरा पुलिस को छकाने में कामयाब रहा है लेकिन पुलिस ने इस कड़ी में उसके कई साथियों को गिरफ्तार करते हुए अहम सफलताएं हासिल की है। बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों से लूटे गए हथियार भी बरामद किए गए हैं लेकिन पुलिस अधिकारी इस बात की पुष्टि करने को तैयार नहीं है। फिलहाल रवि की बातों से लग रहा है कि पुलिसकर्मियों से लूटे गए हथियार भूरा अपने साथ ले गया है। इधर लगातार भूरा के साथियों की गिरफ्तारी एवं भूरा के बारे में मिलने वाली जानकारियों के बाद पुलिस टीमो के हौसले भी बुलंद हैं। खुद जिस प्रकार से उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने दिल्ली में डेरा डाला हुआ है उसके बाद उम्मीद की जा रही है कि भूरा तक पुलिस के हाथ पहुंचने ही वाले हैं। हालांकि अधिकारी इस अभियान के बारे में अपनी प्रगति पर कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। बता दें कि उपनगर रूडकी की जेल के बाहर से पांच अगस्त 2014 को हुए गोलीकांड का मुख्य आरोपी अमित उर्फ भूरा उर्फ संजय पुत्र यशपाल निवासी ग्राम सिरनवाली फुगाना मुज्जफरनगर हाल निवासी शालीमार गार्डन गाजियाबाद, ने चीनू पंडित को रिहा होते समय शाम लगभग पांच बजे जान से मारने की नीयत से कारबाईन आदी से ताबड़तोड़ फायरिंग की गयी थी। इसमें तीन लोगो को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। हालांकि उस समय चीनू पंडित बच गया था। उसके बाद अमित भूरा को एसओजी टीम ने 13 अगस्त 2014 को गिरफ्तार कर रूड़की जेल तथा 16 अगस्त 2014 को सुरक्षा कारणों से हरिद्वार जेल एवं उसके बाद 28 सितंबर 2014 को देहरादून जेल शिफ्ट कर दिया था। अभियुक्त अमित भूरा की पेशी जिला बागपत में होनी थी। देहरादून जेल से पांच पुलिसकर्मी अमित भूरा को लेकर बागपत के लिए चले थे। इन कर्मचारियों में गंगा राम, प्रदीप, धर्मेद्र, इलम चंद्र, रविंद्र सिंह तैनात किए गए थे। उक्त पुलिसकर्मियों को सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस लाईन देहरादून से दो एके-47, 120 कारतूस, व दो एसएलआर 80 कारतूस के साथ भेजा गया था। भूरा की फरारी ने जेल से लेकर पुलिस व्यवस्थाओं में व्याप्त लापरवाहियों की पोल खोल कर रख दी थी। यह तो तय हो गया था कि भूरा ने अपने भागने की योजना जिला कारागार देहरादून से ही बनाई थी। शासन ने भी जेल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए आईजी जेल के पद पर से आईएएस अधिकारी को हटा कर आईपीएस अधिकारी डी पीवीके प्रसाद को जेल विभाग की नई जिम्मेदारी सौंपी है। उधर प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत अमित भूरा प्रकरण पर बेहद सख्त मूड में दिखाई दे रहे हैं और उन्होंने एसएसपी अजय रौतेला को हटाए जाने के बाद पुलिस महकमे में कुछ अन्य बड़े बदलाव किए जाने के भी संकेत दिए थे। यही कारण है कि अपनी कुर्सी को खतरे में देख खुद आला अधिकारी अमित भूरा सर्चिग टॉस्क पर निगरानी रखे हुए हैं, हालांकि तमाम टीमों के गठन के बावजूद भी अमित भूरा अब तक पुलिस टीमों पर भारी ही नजर आ रहा है।

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