काले धन पर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि मोदी सरकार जल्द ही एचएसबीसी बैंक की जेनेवा ब्रांच के साठ भारतीय खाताधारकों के नाम सार्वजनिक करने जा रही है। लेकिन कांग्रेस को मोदी सरकार के इस कदम से साजिश की गंध आ रही है। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि मोदी सरकार काले धन के मुद्दे पर बेहद गंभीर है। कांग्रेस नेता पीसी चाको ने आशंका जताई है कि भाजपा नेताओं के नाम भी काला धन रखने वालों की सूची में हो सकते हैं। उनका कहना है, 'हमें लग रहा है कि मोदी सरकार द्वारा भारतीय खाताधारकों के नामों के खुलासे के पीछे कोई चाल है। ऐसा करके भाजपा दूसरों के साथ समझौता करना चाह रही है, ऐसा प्रतीत होता है।'
कहा तो यह भी जा रहा है कि काला धन रखने वालों की सूची में कुछ नाम कांग्रेस नेताओं के भी हो सकते हैं। इस पर चाको का कहना है, 'अगर काला धन रखने वालों की सूची में कांग्रेस नेताओं का नाम आता है, तो इसके लिए पार्टी जवाबदेह नहीं है। यह उनका निजी मामला है, जिसके लिए वे खुद जवाबदेह होंगे।' सीपीआई नेता डी राजा का कहना है कि अब काला धन विदेशी बैंकों में जमा करने वालों के नाम पब्लिक डॉमिन में आ गए हैं। अब देश की जनता सरकार से चाहती है कि इस दिशा में कड़ी कार्रवाई की जाए। वही साक्षी महाराज का कहना है कि मोदी सरकार काले धन के मुद्दे पर बेहद गंभीर है। विदेशी बैंकों में काला धन रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाएगी और काला धन भारत जरूर वापिस आएगा।
सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग द्वारा की गई जांच-पड़ताल के बाद जिन लोगों के खिलाफ यह कार्यवाही शुरू की गई है उनमें कुछ कॉरपोरेट, बिजनेस घराने और अन्य लोग शामिल हैं। आयकर विभाग ने यह जांच विदेश में जमा काले धन का पता लगाने के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) के निर्देश पर की थी। सूत्रों का कहना है कि एचएसबीसी बैंक के इन 60 खातेदारों के खातों में 1500-1600 करोड़ रुपये तक की रकम जमा होने का अनुमान है।
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस एमबी शाह के नेतृत्व वाली एसआइटी ने गत दिसंबर में सरकार और शीर्ष अदालत को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एचएसबीसी की जेनेवा शाखा से जुड़े मामलों को जल्द ही न्यायसंगत परिणति तक पहुंचाया जाएगा।
.jpg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें