बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को जेडीयू पार्टी से बर्खास्त कर कर दिया है. शरद यादव ने कल मांझी को इस्तीफ़ा देने को कहा था लेकिन मांझी ने इनकार कर दिया. आज जेडीयू महासचिव के सी त्यागी का कहना है कि जब भी एहसानफरोशी का इतिहास लिखा जाएगा मांझी का नाम शामिल होगा. बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी की लड़ाई बढ़ती जा रही है. लड़ाई मांझी बनाम नीतीश हो गई है. मुख्यमंत्री जीतन मांझी ने इस्तीफा देने से साफ इनकार करते हुए कल कह दिया कि नीतीश सत्ता के बिना नहीं रह सकते. नीतीश हैं कि दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठना चाहते हैं. लेकिन मांझी उनकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा बन गए हैं.
बिहार में राजनीतिक भूचाल मचाने के बाद मुख्यमंत्री मांझी दिल्ली आए और नीति आयोग की बैठक में भाग लेने के बाद रविवार शाम को पीएम मोदी से मुलाकात की. मांझी भले सिर्फ विकास पर हुई बात बता रहे हों लेकिन इस मुलाकात के बाद ही मांझी ने नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. मांझी ने चुनौती दी है कि अगर विधानसभा में नीतीश बहुमत साबित कर देंगे तो वो इस्तीफा दे देंगे लेकिन इससे पहले वो हटने को तैयार नहीं हैं. मांझी ने तो बता दिया है कि सोमवार को बिहार पहुंचकर मंत्रिमंडल का भी विस्तार करेंगे. बिहार में राजनीतिक पारा तो पिछले दो महीने से चढ़ रहा था लेकिन मांझी ने कैबिनेट के दो मंत्रियों ललन सिंह और पीके शाही को बर्खास्त कर क्लाईमेक्स की शुरुआत शुक्रवार को कर दी थी. शनिवार को नीतीश समर्थक बीस मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था और बाकी आठ मंत्री अभी मांझी के साथ हैं. अब मांझी दिल्ली में हैं और पटना में नीतीश समर्थक राज्यपाल का इंतजार कर रहे हैं.
शरद यादव ने मांझी को हटने के लिए चिट्ठी भी लिख दी है. शनिवार को नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना गया था. जेडीयू ने बिहार के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से मांग की है कि मांझी को बर्खास्त किया जाए. नीतीश की ओर से जेडीयू, कांग्रेस और आरजेडी के नेता राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से मिलने पहुंचे थे. राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी पटना में मिले नहीं इसलिए उनके प्रधान सचिव को 130 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी सौंपकर सभी नेता लौट आए. सवाल ये है कि जब राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा है तो राज्यपाल बिहार में क्यों नहीं है ? अब जेडीयू का आरोप है कि बीजेपी के इशारे पर ही मांझी ने ये संकट खड़ा किया है.
नीतीश के साथ जेडीयू के 97 विधायक, 24 आरजेडी के और 5 कांग्रेस के हैं. शनिवार को जेडीयू विधायक दल की बैठक में भी 97 विधायक आए थे. ऐसा लगता है कि 13 विधायक मांझी के साथ हैं. हालांकि मांझी समर्थकों का दावा है कि सदन में विश्वासमत आसानी से मिल जाएगा. बिहार में बीजेपी के 87 विधायक हैं और कहा जा रहा है कि मांझी उन्हीं के सहारे बगावत की नाव पर सवार हैं.. और मांझी के मुताबिक उनकी नाव तो डूबेगी नहीं. हालांकि मांझी सुबह दावा कर रहे थे और शाम तक स्पीकर ने नीतीश कुमार को विधायकदल के नेता के तौर पर मान्यता दे दी. इस बीच नीतीश समर्थक पूर्व मंत्री बीमा भारती ने आरोप लगाया हैकि मांझी समर्थक मंत्री विनय बिहारी और नरेंद्र सिंह के विधायक बेटे सुमित सिंह ने मांझी को समर्थन देने के लिए धमकाया है.. बीमा ने एफआईआर दर्ज करा दी है.
पिछले साल लोकसभा में मिली हार के बाद नीतीश ने मांझी को सत्ता सौंपी थी लेकिन पिछले तीन-चार महीने में मांझी ने सत्ता पूरी तरह अपने हाथ में ले ली थी जिससे नीतीश समर्थक मंत्री मांझी के खिलाफ खड़े हो गए.. और फिर शुरू हुआ बिहार में चुनाव से पहले सियासी हलचल का क्लाईमेक्स... अब ड्रामे के द एंड का इंतजार है.

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