भोपाल - मध्य प्रदेष सरकार की योजना के तहत प्रदेष के अंदर 1 अप्रेल 2015 से ई पंजीयन रजिस्ट्री आदेष प्रभावषील किया जा रहा है । प्रदेष सरकार की राजस्व आय का प्रमुख पंजीयन एंव मुद्राॅक विभाग होता है इस विभाग के माध्यम से अरवों रू0 की राजस्व आय प्रतिबर्ष हो रही है लेकिन इस प्रकार के ई पंजीयन में अनेक त्रृटियाॅ है जिन्हे सुधार करना आवष्यक है । यदि सुधार नही किया जाता है तो मध्य प्रदेष के प्रदेष के पंजीयन विभाग की मुष्बिते बढ़ जायेगी तथा संपत्ति खरीदने एवं बैचने के विवादित मामलों में बृध्दि होगी ।
ई पंजीयन की प्राणाली के बारे में गणेषषंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब के प्रान्तीय अध्यक्ष संतोष गंगेले ने प्रदेष के ई पंजीयन प्रषिक्षण देने वाले सतना के पंजीयन अधिकारी श्री जी पी सिंह, से इस संबंध में विस्तार से चर्चा की तो उन्होने कहा कि ई पंजीयन में जो कमियाॅ है उन्हे दूर करने का प्रयास जारी है । साॅफ्टबेयर बनाने वाली कंपनी को षिकायते दी जा रही है । इसी संबंध में छतरपुर जिला के एक पंजीयन अधिकारी श्री करन सिंह घोष से चर्चा की तो उन्होने कहा कि ई पंजीयन प्राणाली से दस्तावेजों के पंजीयन में अनंेक कठिनाईयाॅ आयेगी क्योकि बर्तमान पंजीयन प्राणाली के व्दारा दस्तावेज तैयार करने एवं कराने में अभी पक्षकार को आधा घंटा का समय लगता है तथा पंजीयन में दस मिनिट लगते है लेकिन ई प्राणाली पंजीयन में इंटरनेट पर पूरी कार्यावाही होना है जिससे पक्षकारों को समय दिया जायेगा यदि समय निकल गया तो पंजीयन में अनेक कठिनाईयाॅ होगी ।
गणेषषंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब के प्रान्तीय अध्यक्ष संतोष गंगेले ने इस संबंध मे बर्तमान में पाॅच जिला में चल रही ई पंजीयन व्यवस्था में हो रही परेषानियों को देखते हुऐ ई पंजीयन सुधार हेतू सरकार को पत्र के माध्यम से एक ज्ञापन भेजा है जिसमें सुधार की आवष्यकता:-
1-ई पंजीयन की प्रक्रियाॅ के कारण प्रत्येक पंजीयन कार्यालय में पदस्थ उप पंजीयक एवं पंजीयन लिपिक इस साॅफवेटर में अनुभवहीन है, बरिष्ठ व उम्र के हिसाब से प्रषिक्षण के बाद भी वह ई पंजीयन नही कर सकेगें । प्रत्येक विभाग में पंजीयन अधिकारी के साथ प्रक्षिषित सहायक की संविदा नियुक्ति की जाना चाहिए । जिला स्तर तक ही ई पंजीयन की व्यवस्था लागू की जावे । तहसील स्तर पर बाद में हो ।
2- ई पंजीयन साॅफवेयर जो तैयार किया गया है जिसमें नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम एवं ग्राम पंचायत क्षेत्र के आवासीय प्लाटों, भवनो, दुकानों में प्राधिकृत अधिकारी व्दारा जारी स्वामित्व प्रमाण पत्र के आधार पर होने वाले दस्तावेज पंजीयन का कोई काॅलम नही है, प्रत्येक कालम में खसरा नम्बर एवं भू-अधिकार पुस्तिका को स्थान दिया गया है । चॅूकि नगर पालिका नगर निगम, ग्राम पंचायत क्षेत्र में जो आवादी के अंदर संपत्ति होती है उसका आवादी नंबर तो होता है लेकिन सरकार आवादी नम्बर की भू-अधिकार पुस्तिका नही होती है यदि साॅफटवेयर में भू-अधिकार पुस्तिका नही भरी जायेगी तो वह आगे कार्य नही करेगा इसलिए इस में आवष्यक सुधार किया जावे । ई पंजीयन बर्तमान में जिला स्तर तक ही सीमित रखा जावे ।
3-बर्तमान दस्तावेज लेखक/ स्टाम्प बिक्रेताओं का जीवन इसी विभाग से संचालित हो रहा है , उनके जीवन संचालन का ध्यान रखकर बर्तमान पंजीयन व्यवस्था एवं ई पंजीयन व्यवस्था लागू रखी जावे । ई पंजीयन के परिणाम से राजस्व का नुकषान हो रहा है तथा आम आदमी एवं पक्षकारों के दस्तावेज तत्काल न होने से आपझी विवाद व झगड़ें हो रहे है बेईमानी बढ़ रही है । संपत्ति के मामले बहुत नाजुक होते है , अधिकाॅष बिक्रेता पंजीयन के दिनांक को ही अपनी रकम प्राप्त करते है या पंजीयन के समय प्राप्त करते है इसलिए इस नियम में सिथलता की आवष्यकता है । ई पंजीयन पूर्ण रूपसे प्रभावषील न बनाया जावे । षिक्षित व योग्य युवाओं के जरिये यह धीरे धीरे एक साल के अंदर नियम लागू किया जावे ।
संतोष गंगेले
भोपाल

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