सरकार ने आज दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि ग्रीनपीस इंडिया की एक्टिविस्ट प्रिया पिल्लै के खिलाफ लुक आउट सकरुलर को वापस ले लिया जाएगा बशर्ते वह एक शपथ पत्र दें कि वह देश में कथित उल्लंघनों के खिलाफ ब्रिटेन की एक संसदीय समिति के समक्ष गवाही नहीं देंगी. यह बात अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने अदालत में सुनवाई के दौरान कही. इस दौरान जैन और पिल्लै के वकील के बीच तीखा वाक्युद्ध हुआ. 37 वर्षीय पिल्लै ने शपथ पत्र देने से इंकार कर दिया.
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने आज मुझसे लिखित में शपथ पत्र देने को कहा कि मैं उल्लंघन के बारे में नहीं बोलूंगी और अगर मैं इस तरह का शपथ पत्र देती हूं तब मुझे इस देश को छोड़कर जाने या विदेश जाने की अनुमति दी जाएगी. लेकिन मैंने शपथ पत्र देने से मना कर दिया.’’ शपथ पत्र देने से इंकार करने का कारण बताते हुए पिल्लै ने कहा, ‘‘क्योंकि मैंने मुंह बंद करने का आदेश मानने से इंकार कर दिया. इस देश का नागरिक होने के नाते मुझे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने, बोलने, संविधान के भीतर साफ तौर पर अपनी राय रखने का अधिकार है.’’
पिल्लै ने ब्रिटिश सांसदों के समक्ष मध्य प्रदेश के महान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर प्रजेंटेशन देने के लिए लंदन जाने की अनुमति मांगी है. उन्होंने दावा किया कि यह कारण था कि उन्हें 11 जनवरी को आईजीआई हवाई अड्डे पर एक उड़ान से उतार लिया गया.
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