गुजरात उच्च न्यायालय ने 2002 के गोधरा ट्रेन नरसंहार मामले में दोषियों द्वारा दायर अपीलों पर बुधवार को सुनवाई शुरू की. इनमें से कुछ दोषियों को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई है.
साल 2011 में विशेष अदालत ने 31 लोगों को दोषी ठहराया था. उनमें से 11 को मौत की सजा सुनाई गई थी जबकि अन्य को नरसंहार के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. साबरमती एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे 59 यात्रियों की तब मौत हो गई थी जब 27 फरवरी 2002 को गोधरा स्टेशन के निकट ट्रेन के एस-6 डिब्बे में आग लगा दी गई थी.
निचली अदालत ने 63 आरोपियों को बरी कर दिया था. बाद में उच्च न्यायालय में कई अपील दायर की गई थी. जो दोषी पाए गए हैं उन्होंने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील दायर की है जबकि राज्य सरकार ने 63 लोगों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है. कुछ अपील मृतकों के रिश्तेदारों ने दायर की है. न्यायमूर्ति अनंत दवे और न्यायमूर्ति जी आर उधवानी की पीठ ने इन अपीलों पर आज से सुनवाई शुरू की.
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