केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) के विदेशी चंदे की जांच की गई और उसमें कानून का कहीं भी उल्लंघन नहीं पाया गया। मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति आर. एस. एंडलॉ की खंडपीठ ने गृह मंत्रालय को इस मामले में अपनी ताजा जानकारी के साथ रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में पेश करने को कहा है।
खंडपीठ ने 'आप' की ओर से पूर्व में और वर्तमान में कानून का उल्लंघन कर जुटाए गए विदेशी धन की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर दायर की गई जनहित याचिका (पीआईएल) पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। ये जनहित याचिका वकील एम. एल. शर्मा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य 'आप' नेताओं के खिलाफ दायर की है। याचिकाकर्ता वकील ने कहा है कि 'आप' ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेग्युलेशन एक्ट-फेरा) का उल्लंघन कर विदेशों से धन हासिल किया है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में सरकार ने मुद्दे की जांच कराई और स्थिति रिपोर्ट पेश की और 'आप' के खिलाफ कुछ भी नहीं पाया। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की गई, कुछ भी नहीं पाया गया। गौरतलब है कि हाल ही में आप स्वयंसेवी एक्शन मार्च (आवाम) ने आरोप लगाया कि पार्टी ने दिल्ली के स्लम में पंजीकृत कंपनियों से चार समान किश्तों पर 2 करोड़ रुपये लिए। इन कंपनियों के निदेशक समान हैं। आवाम में शामिल स्वयंसेवी पिछले साल अगस्त में आप से अलग हुए थे।
आवाम के सदस्यों ने दावा किया कि 5 अप्रैल 2014 को चार फर्जी कंपनियों ने रात के समय आप को चेक के माध्यम से 50-50 लाख रुपये का चंदा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कंपनियों ने 2 साल तक कोई लाभ नहीं कमाने के बावजूद चंदा दिया गया। शर्मा ने दावा किया कि दुबई एवं अन्य देशों से दिल्ली में खास तौर से मुस्लिम समुदाय को फोन आए और आप को समर्थन देने का आग्रह किया गया। याचिका में कहा गया है कि आप अब विदेशों से, खास तौर से मुस्लिम आतंकवादियों से फर्जी चेक के साथ ही साथ दुबई एवं अन्य देशों से दिल्ली को किए गए फोन के जरिए चंदा हासिल कर रहा है।
यद्यपि आप ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने सुप्रीम कोर्ट से चंदा लेने वाले सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की जांच करने के लिए एसआईटी गठित करने का अनुरोध किया था। सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

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