पटना, 14 मई। ‘‘भूमि अधिग्रहण संषोधन विधेयक वापस लो’’ की मांग को लेकर तथा केन्द्र सरकार द्वारा संसद में पेष भूमि अधिग्रहण संषोधन विधेयक तथा अध्यादेष के खिलाफ आज राजधानी पटना में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने विषाल प्रतिरोध मार्च का आयोजन किया। भीषण गर्मी और देह जला देने वाली धूप के बावजूद लगभग पचास हजार लोगों ने प्रतिरोध मार्च में भाग लिया। इस मार्च में ग्रामीण महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
मार्च में शामिल विषाल जन समूह को आर॰ ब्लाॅक चैराहा के निकट भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उप महासचिव एवं ऐटक के महासचिव गुरूदास दास गुप्ता, भारतीय खेत मजदूर यूनियन के महासचिव नागेन्द्र नाथ ओझा तथा पार्टी के राज्य सचिव सत्य नारायण सिंह ने संबोधित किया। गुरूदास दास गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि आज समूचे देष में केन्द्र सरकार के भूमि अधिग्रहण विधेयक तथा अध्यादेष के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी विरोध दिवस का आयोजन कर रही है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस विधेयक का इसलिए विरोध कर रही है, क्योंकि नरेन्द्र मोदी की सरकार कानून बनाकर किसानों की जमीन बलपूर्वक छीनना चाहती है। जमीन पर न सिर्फ किसानों; बल्कि समाज के अन्य तबके के लोगों का जीवन यापन निर्भर है। इसलिए इस विधेयक के खिलाफ की लड़ाई सिर्फ किसानों की लड़ाई नहीं है; बल्कि समाज के अन्य लोगों की भी यह लड़ाई है। जमीन छीन जाने का मतलब है, करोड़ों लोगेां को जीवन यापन का जरिया छीन जाना है। जमीन का सवाल देष के करोड़ों लोगों की जिन्दगी का महत्वपूर्ण सवाल है। इसीलिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बार-बार यह संकल्प दोहराती है कि हम लोग खून देंगे, जान देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे।
श्री दासगुप्ता ने देष के लोगों से इस विधेयक के खिलाफ बड़ी और दीर्घकालीन लड़ाई के तैयार रहने की अपील की। आज का यह प्रतिरोध मार्च उस बड़ी लड़ाई का आरंभ है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी आगे भी अपनी इस लड़ाई को जारी रखेगी। इस बड़ी लड़ाई को हम सभी वामदलों और लोकतांत्रिक दलों के साथ मिलकर लड़ेंगे।
आज यहां प्रतिरोध मार्च लगभग साढ़े ग्यारह बजे दिन में पटना के गाँधी मैदान से निकला और जे॰पी॰ गोलम्बर, आकाषवाणी, फ्रेजर रोड, डाकबंगला चैक और पटना जंक्षन होते हुए आर॰ ब्लाॅक चैहारा पहुँचा हाथ में लाल झंडे और बैनर लिए हुए हजारों नर-नारी भूमि अधिग्रहण संषोधन विधेयक और अध्यादेष के खिलाफ नारे लगा रहे थे। गाँधी मैदान से जुलुस निकल जाने के बाद भी शहर के विभिन्न सड़कों से लाल झंडे लिए हुए हजारों लोग बस से, जीप से मिनी बस से और पैदल लोग आते रहे। शहर में जिधर भी देखे लाल झंडों का जनसैलाब दिखलाई पड़ रहा था।
इस दुःखद पहलू यह था कि उत्तर बिहार में आये भूकंप के कारण जैसी तैयारी थी उसके अनुकूल मार्च में भाग लेने वालों की संख्या नहीं हुई। यदि भूंकप का प्रकोप नहीं होता तो लगभग एक लाख लोग सभी जिलों से प्रतिरोध मार्च में भाग लेते। भूकंप के असर, भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप को झेलते हुए लगभग पंचास हजार लोग मार्च में शामिल हुए। इससे स्पष्ट है कि भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ व्यापक जन आक्रोष है।
संध्या 5 बजे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बिहार राज्य परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल बिहार के राज्यपाल से मिला और एक स्मार-पत्र उन्हें दिया। स्मार-पत्र में मांग की गई है कि केन्द्र सरकार जनहित का ख्याल करते हुए और जन भावना का सम्मान करते हुए भूमि अधिग्रहण संषोधन विधेयक को वापस ले, क्योंकि यह विधेयक जनविरोधी, अमानवीय; क्रूर और लोकतांत्रिक कल्याणकारी राज्य के मूल तत्वों के विरूद्ध हैं ।
प्रतिनिधिमंडल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव सत्य नारायण सिंह, पूर्व राज्य सचिव राजेन्द्र प्रसाद सिंह, पूर्व विधायक, पूर्व राजय सचिव बद्री नारायण लाल, पूर्व विधान पार्षद पार्टी के वरिष्ठ नेता रामनरेष पाण्डेय, पूर्व विधायक और केदार नाथ पाण्डेय,सदस्य, बिहार विधान परिषद शामिल थे।

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