ई कॉमर्स में ऍफ़ डी आई से मेक इन इंडिया को बड़ा खतरा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 14 मई 2015

ई कॉमर्स में ऍफ़ डी आई से मेक इन इंडिया को बड़ा खतरा

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ई कॉमर्स में ऍफ़ डी आई को अनुमति देने के मुद्दे पर वाणिज्य मंत्रालय के डी आई पी पी विभाग ने आज इस से सम्बंधित सभी वर्गों की एक बैठक दिल्ली में बुलाई जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्रीमती निर्मल सीतारमण ने के ! बैठक में कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स, फिक्की, एसोचैम सहित ई कॉमर्स व्यापर करने वाली कम्पनियों के प्रतिनिधि एवं भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे !

बैठक को सम्बोधित करते हुए श्रीमती निर्मल सीतारमण ने कहा की इस मामले पर सरकार का दिमाग पूरी तरह खुला हुआ है और सभी संभावित विषयों पर विचार किया जायेगा ! उन्होंने कहा की टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल मेक इन इंडिया को देश में बढ़ाने के लिए हो, यह सरकार की सोच है लेकिन किसी भी कारन से वस्तुओं का आयत बहुतायत में न बढ़ जाए, यह भी देखना होगा ! उन्होंने ने कहा की ऐसी जानकारी मिली है की कुछ राज्यों ने अपने तौर पर मानक तय करते हुए ई कॉमर्स व्यापर पर देख रेख की हुई है और एक संघीय राज्य में ऐसा हो सकता है ! लेकिन मौटे तौर पर एक राष्ट्रीय नीति का न होना भी इसकी एक वजह हो सकती है ! उन्होंने कहा की सरकार इस विषय से सम्बंधित हर पहलू को देखेगी और जल्द ही डी आई पी पी विभाग अन्य मंत्रालयों से इस विषय पर सम्बंधित मुद्दो को लेकर चर्चा करेगा ! उन्होंने भरोसा दिया की सभी वर्गों से इस विषय पर संवाद कायम रखा जाएगा !

इस से पूर्व कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स के राश्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खण्डेलवाल ने श्रीमती सीतारमण को एक बैठक में एक  विस्तृत ज्ञापन देते हुए कहा की ई कॉमर्स में  ऍफ़ डी आई को लागू करने से असंगठित रिटेल बाजार पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा इसका अध्यन करना बेहद जरूरी है ! इस बाजार में 5 .77 करोड़ व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं जो 46 करोड़ लोगों मको रोज़गार देते हैं और देश की जी डी पी में इस बाजार का हिस्सा 45 प्रतिशत है ! कोई कदम ऐसा न उठाया जाये जिससे यह बाजार ख़राब हो !

उन्होंने ने कहा की ई कॉमर्स में ऍफ़ डी आई को लागू करने से सीधा विपरीत असर प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया अभियान पर पड़ेगा क्योंकि ऍफ़ डी आई के कारन से हजारों वस्तुएं विदेशों से आयत होकर भारत में बेचीं जाएँगी ! इस से भारत का लघु उद्योग का स्वरुप ही बिगड़ जायेगा ! उन्होंने कहा की नीति आयोग के दिशा निर्देश में 5 करोड़ छोटे व्यवसायिओं के लिए समर्थन नीतियां बनाने की बात कही गयी है ! ई कॉमर्स में ऍफ़ डी आई से यह दिशा निर्देश भी बिलकुल बेकार हो जायेगा ! प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 31 मार्च 2015 को देश के व्यापारियों के नाम लिखे एक खुले पत्र में छोटे व्यापर को मजबूत रखने की प्रतिबध्दता दोहराई थी जो ऍफ़ डी आई के कारन इस नष्ट होगी वहीँ अभी तक ई कॉमर्स के लिए कोई स्थापित नियम एवं कानून न बने होने के कारन ई कॉमर्स कम्पनियों के लिए बाजार में खुला खेल हो गया है !

श्री खण्डेलवाल ने सुझाव देते हुए कहा की कोई भी निर्णय लेने से पहले सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 प्रतिशत और मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 प्रतिशत ऍफ़ डी आई से देश को क्या लाभ हुआ है, इसका व्यापक अध्यन होना जरूरी है ! ई कॉमर्स में ऍफ़ डी आई के बजाय सरकार वर्त्तमान रिटेल ढांचे का आधुनिकीकरण करे जिससे देश के व्यापारी वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला कर सकें ! उन्होंने यह भी कहा की रिटेल व्यापार के लिए एक राष्ट्रीय नीति भी बनायीं जाए ! देश में आंतरिक व्यापर को बेहतर तरीके से विकसित करने के लिए एक बोर्ड ऑफ़ इंटरनल ट्रेड गठन किया जाए 

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